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Monday, 19 January 2026

राजद में 'ऑपरेशन क्लीन' या परिवार में वर्चस्व की जंग? 25 जनवरी की बैठक और तेजस्वी के 'एकछत्र राज' की इनसाइड स्टोरी



क्या राजद में 'ऑपरेशन क्लीन' के बहाने तेजस्वी यादव अपने ही भाई-बहनों को पार्टी से बेदखल कर रहे हैं? जानिए 25 जनवरी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का असली एजेंडा, रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोप और लालू यादव को 'संरक्षक' बनाकर किनारे करने की इनसाइड स्टोरी। बिहार की राजनीति में मचे इस घमासान की पूरी रिपोर्ट।

Tarun Kumar Kanchan

What is brewing within the Rashtriya Janata Dal (RJD) is not just an assessment of the electoral defeat, but also hints at a major 'change of guard' and 'family feud' within the party.

बिहार की राजनीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बीच सियासी पारा सातवें आसमान पर है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर जो कुछ भी पक रहा है, वह सिर्फ चुनावमें मिली हार की समीक्षा नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर एक बड़े 'सत्ता परिवर्तन' और 'पारिवारिक घमासान' का संकेत दे रहा है। 25 जनवरी को होने वाली राजद की महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। क्या तेजस्वी यादव वाकई पार्टी को नए सिरे से खड़ा कर रहे हैं, या यह अपने ही भाई-बहनों को किनारे लगानेकी एक सोची-समझी रणनीति है?

​तेजस्वी का 'एकछत्र राज' और अपनों से किनारा?

​राजद के गलियारों में चर्चा है कि 25 जनवरी की बैठक का असली एजेंडा संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के हाथ में पार्टी की कमान और वीटो पावर सौंपना है। खबर है कि इस बैठक में लालू प्रसाद यादव को 'संरक्षक' की भूमिका में सीमित किया जा सकता है, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास सभी निर्णायक शक्तियां होंगी।

​लेकिन इस शक्ति प्रदर्शन के पीछे एक और कड़वी सच्चाई छिपी है—परिवार का आंतरिक कलह। हाल के दिनों में जिस तरह से रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव के साथ तेजस्वी के रिश्तों में खटास आई है, उसने पार्टी कार्यकर्ताओं को हैरत में डाल दिया है।

​रोहिणी आचार्य के आरोपों ने हिला दी थी चूलें

​कुछ समय पहले रोहिणी आचार्य ने अपने ही छोटे भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सहयोगी संजय यादव पर जो गंभीर आरोप लगाए थे, उसने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं। रोहिणी ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि तेजस्वी ने उन पर चप्पल उठाई। यह विवाद इतना गहरा गया कि रोहिणी को न केवल घर और राज्य, बल्कि देश छोड़कर अपने पति के पास सिंगापुर वापस जाना पड़ा। इस घटना के बाद तेजस्वी यादव कई दिनों तक सार्वजनिक जीवन से गायब रहे, जिसे उनकी नैतिक हार के रूप में देखा गया।

​मकर संक्रांति: दही-चूड़ा भोज और बढ़ती दूरियां

​मकर संक्रांति के मौके पर राजद के भीतर की दरार साफ नजर आई। एक तरफ लालू प्रसाद यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के आवास पर जाकर दही-चूड़ा खाया और उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव इस भोज से पूरी तरह नदारद रहे।

​तेज प्रताप का दर्द: पिता का प्यार पाकर तेज प्रताप गदगद तो थे, लेकिन छोटे भाई की बेरुखी ने उन्हें आहत किया। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि वे 'जयचंदों' से घिरे हुए हैं।

​तेजस्वी की रणनीति: तेजस्वी का न आना यह साफ संकेत था कि वे पार्टी में अब किसी दूसरे 'पावर सेंटर' को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

​'ऑपरेशन क्लीन': 300 बागियों पर गिरेगी गाज

​विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तेजस्वी यादव अब 'एक्शन मोड' में हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर 'सफाई अभियान' शुरू करने का फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने बागियों की एक लंबी लिस्ट तेजस्वी को सौंपी है।

​इस 'क्लीन स्वीप' के मुख्य बिंदु:

​कमेटियां भंग: प्रदेश से लेकर प्रखंड स्तर तक की सभी कमेटियां भंग की जाएंगी।

​300 नेताओं की छुट्टी: चुनाव में पार्टी विरोधी काम करने वाले लगभग 300 पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

​सोशल मीडिया पर नजर: तीन दर्जन ऐसे नेताओं को चिह्नित किया गया है जो सोशल मीडिया पर दल विरोधी पोस्ट करते थे।

​अनुशासन का हंटर: पार्टी कार्यालय में बेवजह बैठने वाले और अनुशासन तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

​"विधानसभा चुनाव में हार से हमने सबक लिया है। अब संगठन में सिर्फ निष्ठावान और ऊर्जावान लोगों की जगह होगी। जाति विशेष की राजनीति के बजाय हम सभी धर्मों और वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।" 

               - तेजस्वी यादव

​क्या लालू यादव को 'रिटायर' करने की तैयारी है?

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 25 जनवरी की बैठक में 'स्वास्थ्य' का हवाला देकर लालू प्रसाद यादव को सक्रिय राजनीति के फैसलों से दूर किया जा सकता है। तेजस्वी खुद को पार्टी के एकमात्र चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

​नया प्रदेश अध्यक्ष: जगदानंद सिंह और वर्तमान अध्यक्ष के स्वास्थ्य को देखते हुए किसी 'ऊर्जावान' और युवा नेता को कमान सौंपी जा सकती है।

​सीधी पहुंच: तेजस्वी पर अक्सर आरोप लगते थे कि वे आम कार्यकर्ताओं को उपलब्ध नहीं होते। अब उन्होंने तय किया है कि वे नियमित रूप से प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे और जनता से मिलेंगे।

​बिहार की जनता और राजद का भविष्य

​बिहार की जनता ने महागठबंधन को 1 करोड़ 90 लाख से अधिक वोट दिए हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन सवाल वही है—क्या संगठन की यह 'ओवरहॉलिंग' पार्टी को मजबूत करेगी या परिवार के भीतर की आग राजद के कोर वोट बैंक (MY समीकरण) को छिटका देगी?

​25 जनवरी की बैठक राजद के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यदि तेजस्वी यादव अपने भाई-बहनों को दरकिनार कर पूरी शक्ति अपने हाथ में लेते हैं, तो पार्टी के भीतर एक बड़ा विद्रोह भी हो सकता है। फिलहाल, तेजस्वी 'सड़क से सदन तक' आक्रामक रुख अपनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा घर के भीतर के 'विपक्ष' को संभालने की है।

राजद का भविष्य: जनता की राय (Opinion Poll)
"क्या आपको लगता है कि बिना लालू जी के सक्रिय नेतृत्व और परिवार की एकजुटता के तेजस्वी यादव 2026 में राजद की नैया पार लगा पाएंगे? अपनी राय नीचे पोल में दें और कमेंट में कारण बताएं!"
प्रश्न: राजद में होने वाला 'ऑपरेशन क्लीन' और 25 जनवरी की बैठक को आप किस नजरिए से देखते हैं?
 A: यह पार्टी को नई ऊर्जा दे आयुने और हार से उबरने का सही कदम है।
 B: यह सिर्फ तेजस्वी यादव का पार्टी पर 'एकछत्र राज' स्थापित करने का तरीका है।
C: परिवार (रोहिणी और तेज प्रताप) को दरकिनार करना राजद के लिए भविष्य में भारी पड़ेगा।
D: लालू प्रसाद यादव को 'संरक्षक' बनाना पार्टी के अंत की शुरुआत है।

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Friday, 9 January 2026

ज़मीन के बदले नौकरी: CBI की चार्जशीट में क्या है? वो 5 बड़े खुलासे जिन्होंने लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ाईं | जानें किस पर क्या आरोप हैं

Lalu Yadav CBI Charge Sheet Land for Job Scam


जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर आरोप तय। कोर्ट ने कहा- लालू ने रेलवे को निजी जागीर बनाया। पढ़ें पूरी खबर और कोर्ट की टिप्पणी। 

Tarun Kumar Kanchan

Charges have been framed against Lalu Prasad Yadav and his family in the job-for-land case. The court ruled that the Railways had turned the country into a private fiefdom. Read the full report and the court's comments.

जमीन के बदले नौकरी घोटाले (Land for Job Scam) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सहित अन्य मुख्य आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने इस दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए रेल मंत्रालय को अपनी 'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल किया।

कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां : 'अपराधिक सिंडिकेट' की तरह हुआ काम

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि सरकारी नौकरियों को जमीन हड़पने के लिए एक 'बार्गेनिंग चिप' (सौदेबाजी के हथियार) के रूप में इस्तेमाल किया गया।

अदालत ने कहा :

·       संगठित साजिश : कोर्ट के अनुसार, यह घोटाला एक सुनियोजित और संगठित आपराधिक साजिश थी।

·       पारिवारिक लाभ : लालू यादव, उनके परिवार और करीबियों ने मिलकर एक 'आपराधिक सिंडिकेट' की तरह काम किया ताकि परिवार के सदस्यों (पत्नी, बेटों और बेटियों) के नाम पर अचल संपत्ति बनाई जा सके।

·       पद का दुरुपयोग : रेल मंत्रालय के निर्णयों का दुरुपयोग किया गया और गरीब अभ्यर्थियों को बिना विज्ञापन जारी किए नौकरियां दी गईं, ताकि बदले में उनसे जमीन लिखवाई जा सके।

तेजस्वी, तेज प्रताप और मीसा भारती पर भी आरोप

अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव और मीसा भारती के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया है।

हालांकि, इस मामले में एक बड़ी राहत उन 52 आरोपियों को मिली है जिन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया है। इनमें रेलवे के कई अधिकारी और सीपीओ शामिल हैं। सीबीआई ने कुल 103 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

क्या है 'जमीन के बदले नौकरी' (Land for Job)  का पूरा मामला?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे।

बिना किसी विज्ञापन के 'बैकडोर एंट्री'

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के ग्रुप-डी (खलासी/सब्स्टीट्यूट) पदों पर भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक नोटिस या विज्ञापन जारी नहीं किया गया था। चयिनत उम्मीदवार ज्यादातर पटना के ही रहने वाले थे।

आवेदन से पहले ही मिल गई थी नौकरी?

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई मामलों में उम्मीदवारों को आवेदन करने या उनके दस्तावेज़ प्रोसेस होने से पहले ही नौकरी पर रख लिया गया था। बाद में कागज़ी खानापूर्ति की गई ताकि इसे वैध दिखाया जा सके।

ज़मीन के हस्तांतरण का 'पैटर्न'

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि ज़मीन लेने का एक तय तरीका (Modus Operandi) था:

·       सीधे नाम पर नहीं: पहले ज़मीन को लालू परिवार के करीबियों (जैसे भोला यादव या अन्य सहयोगियों) के नाम कराया गया।

·       उपहार (Gift Deeds): कई उम्मीदवारों ने अपनी ज़मीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों को 'गिफ्ट' कर दीं।

·       सर्किल रेट से कम कीमत: जिन जमीनों को खरीदा गया, उनकी कीमत उस समय के सर्किल रेट से बहुत कम दिखाई गई।

 शेल कंपनियों का इस्तेमाल

घोटाले की परतों को छिपाने के लिए 'एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड' जैसी कंपनियों का उपयोग किया गया। आरोप है कि इस कंपनी के पास करोड़ों की ज़मीनें थीं और बाद में इस पूरी कंपनी के शेयर ही लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को मामूली कीमत पर ट्रांसफर कर दिए गए। इससे ज़मीनें सीधे उनके पास आ गईं बिना किसी रजिस्ट्री के।

अयोग्य उम्मीदवारों का चयन

सीबीआई ने दलील दी कि नौकरी पाने वाले कई अभ्यर्थी इतने अयोग्य थे कि वे अपना नाम तक ठीक से नहीं लिख सकते थे। उनके पास मौजूद शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी फर्जी संस्थानों के पाए गए।

लैंड फॉर जॉब स्कैम: लालू परिवार के सदस्यों की विशिष्ट भूमिका (CBI चार्जशीट के अनुसार)

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में केवल लालू प्रसाद यादव को ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी इस 'आपराधिक सिंडिकेट' का मुख्य लाभार्थी और हिस्सेदार माना है। विशेष सीबीआई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यक्ति का भ्रष्टाचार नहीं था, बल्कि एक 'पारिवारिक तंत्र' था। जहां पिता (लालू यादव) ने पद का प्रभाव इस्तेमाल किया, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों ने उन पदों के बदले मिली संपत्तियों को अपने नाम पर संचित किया।

यहाँ जानें किस पर क्या आरोप हैं:

तेजस्वी यादव (पूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार)

सीबीआई की पूरक चार्जशीट में तेजस्वी यादव का नाम प्रमुखता से शामिल है।

·       मुख्य आरोप: तेजस्वी यादव उस कंपनी (AK Infosystems Pvt Ltd) के मुख्य शेयरधारक और निदेशक रहे हैं, जिसके पास उम्मीदवारों से ली गई जमीनें ट्रांसफर की गई थीं।

·       लाभार्थी: जांच एजेंसी का दावा है कि भले ही नियुक्तियों के समय तेजस्वी की उम्र कम थी, लेकिन बाद में उन्होंने इन संपत्तियों और कंपनियों का मालिकाना हक हासिल किया, जो सीधे तौर पर घोटाले की आय (Proceeds of Crime) से जुड़ी थीं।

 राबड़ी देवी (पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार)

लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी पर जमीनें सीधे अपने नाम करवाने का आरोप है।

·       सीधी खरीद/गिफ्ट: चार्जशीट के मुताबिक, कई उम्मीदवारों ने राबड़ी देवी के नाम पर सीधे जमीन की रजिस्ट्री की या उन्हें पावर ऑफ अटॉर्नी दी।

·       साजिश में भागीदारी: कोर्ट ने माना है कि रेल मंत्री की पत्नी होने के नाते वे इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा थीं और उनके नाम पर पटना में कई कीमती भूखंड बेहद कम दामों पर ट्रांसफर किए गए।

मीसा भारती (सांसद, राज्यसभा)

लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती पर भी इस घोटाले के लाभ को संभालने के आरोप हैं।

·       संपत्ति का प्रबंधन: सीबीआई के अनुसार, मीसा भारती और उनके पति के स्वामित्व वाली फर्मों का इस्तेमाल घोटाले से अर्जित धन और जमीनों को 'सफेद' करने या निवेश करने के लिए किया गया।

·       सीधी हिस्सेदारी: कई प्लॉट और संपत्तियों के सेल डीड में मीसा भारती का नाम बतौर खरीदार या लाभार्थी दर्ज है।

हेमा यादव और अन्य सदस्य

लालू यादव की अन्य बेटियों, जैसे हेमा यादव का नाम भी लाभार्थियों की सूची में है। उन पर आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने अपनी जमीन उन्हें 'उपहार' के रूप में दी थी, जबकि उनका उन उम्मीदवारों से कोई पारिवारिक संबंध नहीं था।

कोर्ट में बचाव पक्ष की दलील और कानूनी स्थिति

जहाँ एक ओर सीबीआई ने इसे 'आपराधिक सिंडिकेट' बताया, वहीं लालू यादव के वकीलों का कहना है कि:

·       यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) से प्रेरित है।

·       ज़मीनें बाज़ार मूल्य पर खरीदी गई थीं और इनके वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं।

·       रेलवे की नियुक्तियों में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।

Conclusion :

जमीन के बदले नौकरी घोटाला न केवल बिहार की राजनीति बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास के बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। कोर्ट की हालिया टिप्पणी और लालू परिवार पर आरोप तय होना आरजेडी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब सबकी नजरें 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

FAQs  - जमीन के बदले नौकरी घोटाला

प्रश्न 1: जमीन के बदले नौकरी (Land for Job Scam) मामला क्या है?

 उत्तर: यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों और उनके परिवारों से कम कीमत पर जमीनें अपने परिवार के सदस्यों के नाम करवाई थीं।

प्रश्न 2: राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ क्या टिप्पणी की?

उत्तर: कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी 'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल किया और उनके परिवार ने एक 'आपराधिक सिंडिकेट' के रूप में काम करते हुए सार्वजनिक रोजगार को जमीन हड़पने का जरिया बनाया।

प्रश्न 3: इस मामले में कौन-कौन से मुख्य आरोपी शामिल हैं?

 उत्तर: मुख्य आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, और बेटी मीसा भारती व हेमा यादव शामिल हैं। सीबीआई ने कुल 103 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

प्रश्न 4: कोर्ट ने किन धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है?

 उत्तर: अदालत ने आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है।

प्रश्न 5: क्या इस मामले में किसी को राहत भी मिली है?

 उत्तर: हाँ, विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में रेलवे के अधिकारियों और सीपीओ सहित 52 आरोपियों को बरी (Discharge) कर दिया है।

प्रश्न 6: 'आरोप तय होने' (Charge Framing) का कानूनी मतलब क्या है?

उत्तर: आरोप तय होने का अर्थ है कि अदालत ने प्रथम दृष्टया माना है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसके बाद मामले का औपचारिक 'ट्रायल' शुरू होता है, जहाँ गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं।

प्रश्न 7: इस मामले की अगली सुनवाई कब है?

उत्तर: कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी, 2026 की तारीख तय की है, जिसमें आरोपियों से औपचारिक रूप से पूछा जाएगा कि वे अपना अपराध स्वीकार करते हैं या ट्रायल का सामना करेंगे।

भाजपा का हमला: "कानून ने आखिरकार पकड़ ही लिया"

वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लालू यादव ने सार्वजनिक पदों का इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने के लिए किया। उन्होंने कहा, "आप कितने भी घोटाले करें, कानून अंततः पकड़ ही लेगा। कोर्ट की 'सिंडिकेट' वाली टिप्पणी लालू परिवार के भ्रष्टाचार की गवाह है।"


 Keyword: Land for Job Scam, Lalu Prasad Yadav, राउज एवेन्यू कोर्ट, जमीन के बदले नौकरी घोटाला।

·       Tags: Lalu Yadav News, Tejashwi Yadav, CBI Court, Railway Scam, Bihar Politics, Hindi News.


क्या आपको लगता है कि इस फैसले का असर आने वाले बिहार चुनावों पर पड़ेगा? अपनी राय नीचे कमेंट में बताएं।


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Saturday, 27 December 2025

Bihar Land News : जमीन के झगड़े खत्म! पूरे परिवार की जमीन का दाखिल-खारिज (Mutation) अब सिर्फ एक आवेदन में

 

Tarun kumar kanchan

Nitish government has taken a revolutionary step to end land related disputes in Bihar and make the mutation process transparent. Now, after family partition, every member will not have to visit different offices to get the land registered in their name.

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला: पारिवारिक बंटवारे के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया हुई आसान, 'डिजिटल बंटवारा' को प्राथमिकता

​पटना: बिहार में जमीन से जुड़े विवादों को खत्म करने और दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नीतीश सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब पारिवारिक बंटवारे के बाद जमीन को अपने नाम करवाने के लिए हर सदस्य को अलग-अलग दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे।

​राज्य के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को घोषणा की कि 27 दिसंबर से बिहारभूमि पोर्टल पर 'बंटवारा दाखिल-खारिज' की नई व्यवस्था शुरू कर दी गई है।

​क्या है नई व्यवस्था?

​पुराने नियम के अनुसार, परिवार में बंटवारा होने के बाद हर हिस्सेदार को अपनी जमीन के लिए अलग-अलग आवेदन करना पड़ता था। इसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होते थे। नई व्यवस्था की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

​एक आवेदन, सबका काम: अब परिवार का कोई भी एक सदस्य आवेदन करेगा और पोर्टल पर सभी हिस्सेदारों के नाम उनके हिस्से की जमीन की जमाबंदी एक साथ कायम हो जाएगी।

​डिजिटल बंटवारा: अब मौखिक बंटवारे की जगह डिजिटल और दस्तावेजी बंटवारे को प्राथमिकता दी जाएगी।

​उत्तराधिकार-सह-बंटवारा: यदि पूर्वजों की मृत्यु हो चुकी है, तो उत्तराधिकार के साथ-साथ बंटवारे की प्रक्रिया भी एक ही बार में पूरी की जा सकेगी।

​मौखिक बंटवारा छोड़ें, सरकारी दस्तावेज अपनाएं

​संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने आम जनता से अपील की कि वे केवल 'मौखिक बंटवारे' के भरोसे न रहें। उन्होंने कहा, "मौखिक बंटवारा ही भविष्य में भूमि विवादों की सबसे बड़ी जड़ बनता है। इसके कारण लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह जाते हैं। इसलिए नई सुविधा का लाभ उठाएं और अपनी जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराएं।"

​जनवरी से मार्च तक लगेंगे विशेष शिविर

​बिहार सरकार भूमि सुधार के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। खबर के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​अगस्त-सितंबर में चलाए गए राजस्व महा-अभियान के दौरान 46 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

​इनमें से 40 लाख आवेदन केवल बंटवारा और उत्तराधिकार नामांतरण से जुड़े थे।

​31 दिसंबर तक सभी लंबित आवेदनों को पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा।

​जनवरी से मार्च 2026 के बीच पंचायतों में विशेष शिविर लगाकर इन सभी मामलों का निपटारा किया जाएगा।

​नोट: जमीन संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार ने 'भूमि सुधार जनकल्याण संवाद' की भी शुरुआत की है, जिसके तहत अधिकारी जिलों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे।

​कैसे करें आवेदन? (Quick Steps)

​अगर आप भी इस सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:

​बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएं।

​दाखिल-खारिज आवेदन के विकल्प को चुनें।

​बंटवारा/उत्तराधिकार श्रेणी का चयन करें और मांगे गए विवरण भरें।

​निष्कर्ष: बिहार सरकार की यह पहल न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी, बल्कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे लाखों परिवारों को राहत भी देगी।

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Bihar Land News: अब एक ही आवेदन में होगा पूरे परिवार की जमीन का दाखिल-खारिज, जानें 27 दिसंबर से शुरू हुई नई प्रक्रिया

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Thursday, 20 November 2025

Bihar Politics : नई सरकार के लिए 'बीमार' कहे जा रहे नीतीश की 10वीं शपथ: यह ताज नहीं, काँटों की सेज है! Nitish Kumar, who is being called 'sick', takes his 10th oath for the new government: This is not a crown, but a bed of thorns!

 


💥Tarun Kumar Kanchan
चुनौतियों का पहाड़ और काँटों भरा ताज 
A mountain of challenges and a crown of thorns

 Nitish Kumar's swearing-in as Chief Minister of Bihar for the 10th time is not just a political event, it's a litmus test for him. This swearing-in ceremony hints at a "crown of thorns," beneath which a mountain of challenges awaits.

 

आज 20 नवंबर को थोड़ी देर में नीतीश कुमार ऐतिहासिक गांधी मैदान में 10वी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के अलावा देश के कई मुख्यमंत्री और बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि बिहार की तीन लाख जनता भी इस मौके पर साक्षी होंगे। नीतीश कुमार का 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं है, यह उनके लिए अग्निपरीक्षा है। यह शपथ ग्रहण समारोह एक ऐसे 'काँटों भरे ताज' की ओर इशारा करता है, जिसके नीचे चुनौतियों का पहाड़ इंतज़ार कर रहा है।


74 वर्षीय मुख्यमंत्री को अब केवल शासन नहीं करना है, बल्कि खाली खजाने, ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक के रिकॉर्ड कर्ज, और 'एक करोड़ नौकरी' जैसे विशाल चुनावी वादों के बीच संतुलन साधना है। विपक्ष द्वारा उनकी नेतृत्व क्षमता पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब उन्हें अपने काम से देना होगा। वित्तीय संकट से जूझते, सबसे कम GSDP वाले और सर्वाधिक गरीबी वाले बिहार में, क्या नीतीश कुमार जनता के भरोसे को अटूट विश्वास में बदलकर अपने आलोचकों को चुप करा पाएंगे?

🎯 जनता का भरोसा और घोषणा पत्र के वादे

नई सरकार के सामने सबसे पहली और सबसे बड़ी चुनौती है जनता के भरोसे को विश्वास में बदलना है। NDA गठबंधन पर बिहार की जनता ने जो भरोसा जताया है, उसे ठोस नीतियों और त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से सिद्ध करना होगा।

रोजगार और 'एक करोड़ नौकरी' का वादा

चुनावी घोषणा पत्र में किया गया 'एक करोड़ लोगों को नौकरी' देने का वादा सरकार की प्राथमिकता में शीर्ष पर है। यह वादा न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

चुनौती: वर्तमान में, बिहार में संगठित और असंगठित क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या सीमित है। सरकारी अनुमानों के अनुसार भी, बड़े पैमाने पर नई नौकरियों का सृजन करना एक दुष्कर कार्य है।

उदाहरण: एक करोड़ नौकरियों के लिए अगले पाँच वर्षों में प्रति वर्ष 20 लाख नई नौकरियों का सृजन करना होगा, जिसके लिए उद्योगों में भारी निवेश, आधारभूत संरचना का विकास और कौशल विकास कार्यक्रमों की बड़े पैमाने पर आवश्यकता होगी। केवल सरकारी नौकरियों के बूते यह लक्ष्य हासिल करना असंभव है।

💰 वित्तीय मोर्चे पर बड़ी मुश्किलें: कर्ज और देनदारियाँ

बिहार की नई सरकार को एक खाली खजाने और रिकॉर्ड स्तर के कर्ज के साथ शुरुआत करनी पड़ रही है। वित्तीय मोर्चे पर कुशल प्रबंधन एक बड़ी परीक्षा होगी।

बिहार सरकार पर रिकॉर्ड कर्ज

विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार पर कुल कर्ज रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच चुका है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 37% है।

कर्ज का बोझ: बिहार सरकार पर कर्ज की राशि लगभग ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक हो गई है (विभिन्न संस्थानों और बाज़ार से लिया गया कर्ज)। एक सूचना के मुताबिक हर बिहारी पर 27 लाख का कर्ज है।

कर्ज का वहन: इस विशाल कर्ज पर ब्याज का भुगतान और मूलधन चुकाने के लिए एक कुशल वित्तीय प्रबंधन योजना की तुरंत आवश्यकता है। ब्याज भुगतान पर होने वाला खर्च विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि को कम कर देता है।

 बिहार सरकार की देनदारियाँ और खाली खजाना

चुनावी वादे—जैसे मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक सहायता आदि—को पूरा करने के लिए बड़े वित्तीय आवंटन की आवश्यकता होगी।

वित्तीय संकट: रिकॉर्ड कर्ज के बीच, सरकार के खजाने में बची हुई राशि बहुत कम है, जो इन देनदारियों को पूरा करने की राह में एक कठिन आर्थिक चुनौती है।

GSDP (प्रति व्यक्ति)

बिहार की स्थिति: यह सबसे निचले राज्यों में से एक है।

राष्ट्रीय औसत का लगभग एक-तिहाई है। इसका मतलब यदि राष्ट्रीय औसत प्रति व्यक्ति आय ₹100 है, तो बिहार की प्रति व्यक्ति आय केवल लगभग ₹33 ही है। यह बिहार में निम्न आर्थिक उत्पादकता और आय को दर्शाता है।

गरीबी दर

बिहार की स्थिति: यह सर्वाधिक है (लगभग 33.7%) जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 21.9% है। इसका मतलब बिहार की लगभग एक-तिहाई आबादी (33.7%) गरीब है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या लगभग पाँच में से एक (21.9%) है। यह उच्च निर्धनता को इंगित करता है।  एलएलएम

 मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI)

बिहार की स्थिति: यह निचले पायदान पर है।

 इसका मतलब,  स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर (मानव विकास के मुख्य मापदंड) के मामले में बिहार अन्य राज्यों और राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे है। यह मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण अंतराल को दर्शाता है।

 यह डेटा दर्शाता है कि बिहार आर्थिक उत्पादन, गरीबी उन्मूलन और मानव विकास के मानकों पर भारत के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है। बिहार के लोगों का जीवन स्तर (Life Standard) अन्य प्रमुख राज्यों की तुलना में काफी नीचे है। GSDP कम होने के कारण विकास कार्यों और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च करने की क्षमता सीमित हो जाती है। नई सरकार को समावेशी विकास दर बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

🏥 स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर तत्काल ध्यान

 स्वास्थ्य सुविधा की स्थिति

बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति (Healthy facilities) चिंताजनक बनी हुई है।

चुनौतियाँ: डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और जिला अस्पतालों में सुविधाओं और उपकरणों की भारी कमी है। महामारी की स्थिति में यह कमी और भी उजागर हो जाती है।

अपराध पर काबू पाना और 'जंगल राज' की धारणा

कानून व्यवस्था को मजबूत करना और अपराध दर को नियंत्रित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए 'जंगल राज' की धारणा को खत्म करने के लिए सख्त उपाय आवश्यक हैं।

उदाहरण: विधानसभा चुनाव में बाहुबली कहे जाने वाले अनंत सिंह और ओसामा जैसे लोगों का विधानसभा में पहुँचना, और हाल ही में दुलारचंद यादव की हत्या के बाद फैली सनसनी, यह दर्शाती है कि कानून व्यवस्था को लेकर अभी भी जनता में चिंता का माहौल है। सरकार को पुलिस तंत्र में सुधार और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना होगा।

🤝 सामाजिक चुनौतियाँ: जाति और आर्थिक विषमता

जाति/समुदाय की बढ़ती खाई

जातिगत समीकरणों को साधते हुए विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच बढ़ती खाई को पाटना और सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रखना महत्वपूर्ण है।

जाति विद्वेष और सामुदायिक विवाद: हाल-फिलहाल में बिहार में जाति विद्वेष और सामुदायिक विवाद के कई छोटे-बड़े मामले रिपोर्ट किए गए हैं, जो सामाजिक एकता के लिए खतरा हैं।

उदाहरण: सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर जातिगत तनाव के मामले, जैसे कि भूमि विवाद से जुड़े अंतर-जातीय संघर्ष, अक्सर सामने आते रहे हैं। नई सरकार को सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करना होगा।

 

आर्थिक विषमता और गरीबी रेखा

क्षेत्रीय असमानताएँ और गरीबी एक बड़ा मुद्दा है।

गरीबी रेखा के नीचे: बिहार में 33.7% लोग अभी भी गरीबी रेखा (BPL) के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में, सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएँ चलाई हैं, जिससे गरीबों को कुछ लाभ मिला है, लेकिन गरीबी का प्रतिशत अभी भी बहुत अधिक बना हुआ है। सरकार को आर्थिक विकास के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुँचाना होगा ताकि गरीबी का यह प्रतिशत तेजी से कम हो सके।

नीतीश कुमार की 10वीं बार की यह पारी आसान नहीं है। यह 'काँटों से भरा ताज' है। उन्हें न केवल अपने विरोधियों को अपनी कार्यक्षमता से चुप कराना होगा, बल्कि खाली खजाने, भारी कर्ज, और जनता की उम्मीदों के बीच संतुलन भी बनाना होगा। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए नई सरकार को पहले 100 दिनों में ही ठोस आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की शुरुआत करनी होगी।



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