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Thursday, 18 June 2026

झारखंड राज्यसभा चुनाव: नंबर इंडिया के पास, खेला भाजपा का; नथवानी की हैट्रिक, कांग्रेस के हाथ सिर्फ झुनझुना!

झारखंड से निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी भाजपा के सहयोग से पहुंचे राज्यसभा। साभार - सोशल मीडिया।

 

झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़ा सियासी उलटफेर! 56 विधायकों के भारी संख्या बल के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा हारे, एनडीए समर्थित परिमल नथवानी ने मारी बाजी। पढ़ें कंचनवाणी पर पूरी इनसाइड स्टोरी चुटीले अंदाज में।

तरुण कुमार कंचन

देवघर। कहते हैं राजनीति में 'अंकगणित' ज़रूरी होता है, लेकिन झारखंड में गुरुवार को जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि असली खेल 'केमिस्ट्री' और 'मैनेजमेंट' का है। संख्या बल की भारी-भरकम तिजोरी लेकर बैठी सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन को भाजपा ने ऐसा चश्मा पहनाया कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा बस हाथ मलते रह गए और निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी जीत गए। हाँ, गनीमत इस बात की रही कि इस बार बेचारी वोटिंग मशीन की आबरू बच गई; हार का ठीकरा उस पर नहीं, बल्कि भीतरघातियों पर फूटा है।

गणित फेल, मैनेजमेंट पास!

81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन 56 विधायकों का सीना फुलाए बैठा था, जबकि एनडीए के पास सिर्फ 24 की 'चिल्लर' थी। लेकिन जब बक्सा खुला, तो इंडिया गठबंधन की एकजुटता के दावों की हवा निकल चुकी थी।

बैद्यनाथ राम (झामुमो): 30 वोट पाकर झारखंड के पहले दलित राज्यसभा सांसद बने। (महागठबंधन की लाज बस यहीं बची)।

परिमल नथवानी (निर्दलीय/एनडीए समर्थित) : 28 वोट लेकर सीधे दिल्ली का टिकट कटा लिया।

प्रणव झा (कांग्रेस) : सिर्फ 20 वोटों पर सिमट कर 'रनर-अप' की ट्रॉफी से संतोष करना पड़ा।

ट्विस्ट ऑफ द डे : मतगणना में तीन वोट 'अमान्य' (रिजेक्ट) पाए गए। कानाफूसी तो यह भी है कि इनमें से दो नथवानी जी के हिस्से के थे और एक झा जी का, लेकिन जब खेल ही निराला हो, तो अधिकारिक पुष्टि की परवाह किसे है?

नथवानी की हैट्रिक: 'झारखंड मेरी कर्मभूमि है बाबू!'

इस जीत के साथ ही कॉर्पोरेट जगत और राजनीति के उस्ताद परिमल नथवानी ने झारखंड से राज्यसभा पहुंचने की हैट्रिक (2008 से 2020 के बाद अब फिर) लगा दी है। जीत का सर्टिफिकेट हाथ में आते ही उन्होंने दिल्ली दरबार (पीएम मोदी, अमित शाह और एनडीए नेतृत्व) का आभार जताया और मुस्कुराते हुए कहा— "झारखंड मेरी कर्मभूमि है, विकास रुकने नहीं दूंगा।"

कहीं गम, कहीं 'गुलाल'

नतीजे आते ही विधानसभा का नजारा देखने लायक था। एनडीए खेमे में ऐसे ढोल-नगाड़े बजे मानो सरकार ही बना ली हो। दूसरी तरफ, महागठबंधन के सिपहसालार कोने में खड़े होकर एक-दूसरे का कुर्ता नाप रहे थे और 'क्रॉस वोटिंग' करने वाले 'विभीषणों' की लिस्ट तैयार करने में जुटे थे।

 56 विधायक होने के बावजूद दूसरी सीट गंवा देना... इसे कहते हैं 'घर में थे छप्पन भोग, फिर भी भूखे रह गए लोग!' अब देखना यह है कि कांग्रेस इस झटके से कब उबर पाती है।

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Wednesday, 17 June 2026

बड़ी खबर : एक ऐसा फैसला जिससे बदल रहा है 500 साल पुराना नाम

 


बिहार की राजनीति से बड़ी खबर! अब इतिहास बनने जा रहा है 500 साल पुराना नाम 'पटना'। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया एलान, वापस लौटेगा 2000 साल पुराना 'पाटलिपुत्र' का गौरव। जानिए पूरा ऐतिहासिक सफर कंचनवाणी पर।

 

कंचनवाणी डेस्क

पटना । बिहार की सियासत और इतिहास के पन्नों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। करीब 500 साल पुराना नाम 'पटना' अब जल्द ही इतिहास के पन्नों में सिमटने जा रहा है। बिहार की राजधानी को एक बार फिर वही नाम मिलने जा रहा है, जिससे 2000 साल पहले इसकी ख्याति पूरी दुनिया में थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एलान किया है कि पटना का नाम बदलकर अब दोबारा 'पाटलिपुत्र' किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित प्रखण्ड सहयोग-सह-जन कल्याण शिविर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि जल्द ही कैबिनेट में नाम बदलने का प्रस्ताव लाया जाएगा, ताकि इस ऐतिहासिक महानगर को उसका प्राचीन गौरव वापस मिल सके।

कैबिनेट में जल्द आएगा प्रस्ताव

नदियावां में जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, पटना शहर की पहचान अब इसके प्राचीन नाम 'पाटलिपुत्र' के रूप में ही होनी चाहिए। यह मगध की पावन भूमि और महान साम्राज्यों की राजधानी रही है। इस विषय पर लंबे समय से चर्चा चल रही थी और अब सरकार ने इस विरासत को पुनर्जीवित करने का मन बना लिया है। इसके लिए जल्द ही आधिकारिक तौर पर कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।

क्यों खास है पाटलिपुत्र?

यह महज एक नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि उस कालखंड को नमन है जब यह शहर भारत की शक्ति का केंद्र हुआ करता था। 600 ईसा पूर्व से लेकर मौर्य, नंद, शुंग और गुप्त राजवंशों के दौरान पाटलिपुत्र ही पूरे अखंड भारत की केंद्रीय और प्रशासनिक राजधानी थी।

 स्वर्ण युग और मौर्य काल की भव्यता: महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और चक्रवर्ती सम्राट अशोक के काल में यह दुनिया के सबसे बड़े और वैभवशाली शहरों में गिना जाता था। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में यहाँ के लकड़ी के बने भव्य महलों, विशाल सुरक्षा दीवारों और नगर व्यवस्था का ऐसा वर्णन किया है जिसे पढ़कर आज भी गर्व होता है।

 ज्ञान और विज्ञान का वैश्विक केंद्र: गुप्त साम्राज्य के दौरान यही पाटलिपुत्र महान गणितज्ञ और खगोल वैज्ञानिक आर्यभट्ट की कर्मभूमि बना, जिन्होंने दुनिया को शून्य (0) का ज्ञान दिया।

समय के थपेड़ों और बदलती परिस्थितियों के कारण कालान्तर में इसका राजनीतिक महत्व भले कम हुआ हो, लेकिन कुम्हरार और बुलंदीबाग जैसी जगहों पर आज भी खुदाई में निकलने वाले मौर्यकालीन अवशेष इसकी अमर कहानी बयां करते हैं।

पुष्पपुरी से पाटलिपुत्र और पटना :

बिहार की इस ऐतिहासिक राजधानी का नाम समय और शासकों के साथ बदलता रहा है। आइए इसके पौराणिक काल से लेकर आज तक के सफर को सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं:

कुसुमपुर और पुष्पपुरी

रामायण और महाभारत काल के शुरुआती ग्रंथों में इस क्षेत्र को 'कुसुमपुर' या 'पुष्पपुरी' कहा गया है। इसका मुख्य कारण यह था कि इस इलाके में फूलों (विशेषकर पलाश और गुलाब) की बड़े पैमाने पर खेती होती थी।

 पाटलिपुत्र (छठी शताब्दी ईसा पूर्व)

यह इस शहर का सबसे प्रतापी नाम रहा। 460 ईसा पूर्व में अजातशत्रु के पुत्र और उत्तराधिकारी उदयन ने मगध की राजधानी को राजगृह (राजगीर) से हटाकर यहाँ स्थानांतरित किया और इस नए महानगर की नींव रखी। 'पाटल' (एक विशेष प्रकार का फूल) के नाम पर इसे 'पाटलिपुत्र' कहा गया।

पालिबोथरा (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व)

जब मौर्य काल में यूनानी राजदूत मेगास्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया, तो विदेशी उच्चारण के कारण उसने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में इसे 'पालिबोथरा' (Palibothra) के नाम से दर्ज किया, जिससे इसे वैश्विक पहचान मिली।

पट्टन या पटना (1541 ईस्वी - शेरशाह सूरी काल)

मध्यकाल तक आते-आते यह महान शहर काफी बिखर चुका था। साल 1541 में अफगान शासक शेरशाहसूरी ने इस क्षेत्र के सामरिक और व्यापारिक महत्व को समझा। उसने यहाँ एक मजबूत किले का निर्माण कराया और इसे नए सिरे से बसाकर नाम दिया— पटना। संस्कृत के 'पट्टन' (यानी बंदरगाह या व्यापारिक नगर) से बिगड़कर यह नाम बना, क्योंकि यह गंगा, सोन और गंडक के संगम पर व्यापार का बड़ा केंद्र था। कुछ विद्वान इसे स्थानीय 'पटन देवी' के नाम से भी जोड़ते हैं।

अजीमाबाद (1704 ईस्वी - मुगल काल)

मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में उसके पोते शहजादा अजीम-उश-शान को बिहार का सूबेदार बनाया गया। उसने शहर का नाम बदलकर अपने नाम पर 'अजीमाबाद' रख दिया। हालांकि, यह नाम आम जनता की जुबान पर नहीं चढ़ सका और लोग इसे पटना ही बुलाते रहे।

आधुनिक पटना (ब्रिटिश काल से अब तक)

अंग्रेजों के शासनकाल में और आजादी के बाद भी इसका नाम पटना ही रहा। साल 1912 में जब बंगाल विभाजन के बाद बिहार-ओडिशा एक नया प्रांत बना, तो पटना को इसकी राजधानी बनाया गया। बाद में 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा और 15 नवंबर 2000 को झारखंड इससे अलग हो गए, लेकिन पटना बिहार की धड़कन और राजधानी के रूप में अडिग रहा।

आधुनिक संदर्भ में प्राचीन गौरव की वापसी

संक्षेप में कहें तो, जिस शहर को 2000 साल पहले 'पाटलिपुत्र' के रूप में वैश्विक ख्याति मिली थी, उसे आज से करीब 485 साल पहले (1541 ई.) शेरशाह सूरी ने 'पटना' नाम दिया था। अब करीब 5 शताब्दी बाद इतिहास का पहिया एक बार फिर घूमा है। बिहार सरकार का यह फैसला आधुनिक संदर्भ में राज्य की प्राचीन अस्मिता और गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित करने की एक बड़ी सांस्कृतिक कोशिश है। अब देखना यह है कि कैबिनेट की मुहर के बाद कागजों से लेकर जनमानस तक 'पाटलिपुत्र' नाम दोबारा कितनी जल्दी अपनी पुरानी चमक बिखेरता है।

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Tuesday, 16 June 2026

क्रिकेटर आकाशदीप के घर पहुंचे CM सम्राट चौधरी: दी वैवाहिक शुभकामनाएं, जानें कितनी सुंदर और पढ़ी-लिखी हैं आकाशदीप की दुल्हनिया?

मंगलवार को भारतीय तेज गेंदबाज आकाशदीप के घर पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

भारतीय तेज गेंदबाज आकाशदीप और अक्षिता राज की शादी की तारीख, वेन्यू और पूरा शेड्यूल जानें। बड्डी गांव पहुंचे बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने दिया आशीर्वाद और गांव को दी 12 बीघे के खेल स्टेडियम की सौगात। पढ़ें कंचनवाणी की रिपोर्ट।

 

कंचनवाणी रिपोर्टर

 पटना। भारतीय तेज गेंदबाज आकाशदीप जल्द ही अपनी जिंदगी की एक नई और खूबसूरत पारी शुरू करने जा रहे हैं। इस बीच उनके पैतृक गांव बड्डी (सासाराम) से एक बेहद खास खबर सामने आई है। मंगलवार का दिन क्रिकेटर आकाशदीप और उनके परिवार के लिए बेहद यादगार बन गया, जब बिहार के उपमुख्यमंत्री सह मुख्यमंत्री (कार्यकारी) सम्राट चौधरी स्वयं उनके घर पहुंचे और उन्हें आगामी वैवाहिक जीवन के लिए ढेरों शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया।

मुख्यमंत्री के इस औचक आगमन से पूरे बड्डी गांव और आसपास के इलाकों में उत्सव जैसा माहौल देखा गया।

दोपहर 12:05 बजे बड्डी पहुंचा सीएम का हेलीकॉप्टर

मंगलवार दोपहर करीब 12:05 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर बड्डी गांव में बने अस्थायी हेलिपैड पर उतरा। वहां से वे सीधे आकाशदीप के आवास पर पहुंचे, जहां क्रिकेटर और उनके परिजनों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने आकाशदीप को गले लगाकर बधाई दी और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने आकाशदीप के संघर्षों की सराहना करते हुए कहा: आकाशदीप ने अपनी कड़ी मेहनत, अद्वितीय प्रतिभा और अटूट संकल्प के दम पर न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। वे युवाओं के लिए एक बड़े रोल मॉडल हैं।

मां ने किया सम्मानित, सीएम ने लिया शादी की तैयारियों का जायजा

इस बेहद खास मौके पर आकाशदीप की माताजी ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने परिवार के सभी सदस्यों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और शादी की तैयारियों के बारे में भी अनौपचारिक बातचीत की।

बड्डी गांव को मिलेगा 12 बीघे का खेल स्टेडियम

इस मुलाकात के दौरान सिर्फ शादी की ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को लेकर भी एक बड़ा फैसला हुआ। मुख्यमंत्री ने बड्डी गांव में आकाशदीप की पहल पर लगभग 12 बीघा जमीन में बन रहे खेल स्टेडियम की प्रगति की जानकारी ली।

 सरकार देगी पूरा सहयोग: मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए आधारभूत ढांचा बेहद जरूरी है। इस स्टेडियम के निर्माण में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।

 युवाओं में भारी उत्साह: सीएम के इस बड़े आश्वासन के बाद स्थानीय खेल प्रेमियों और युवाओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों का मानना है कि इस स्टेडियम के बनने से क्षेत्र के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकेंगी।

 

आकाशदीप की जीवनसंगिनी कौन



क्रिकेट के गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भारतीय पेसर आकाशदीप की जीवनसंगिनी कौन बन रही हैं?

 कौन हैं अक्षिता राज?

आकाशदीप की शादी अक्षिता राज से होने जा रही है। अक्षिता भी बिहार के ही रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन के मानिकपुर गांव की रहने वाली हैं।

 बेहद सुशिक्षित हैं अक्षिता: अक्षिता एक बेहद शालीन, सुंदर और उच्च शिक्षित महिला हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों से पूरी करने के बाद देश के नामचीन संस्थान BIT मेसरा (Birla Institute of Technology, Mesra) से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है।


पारिवारिक रजामंदी से तय हुआ रिश्ता:
एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली अक्षिता और आकाशदीप का यह रिश्ता पूरी तरह से पारिवारिक रजामंदी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ तय हुआ है।

शादी का पूरा शेड्यूल

आकाशदीप और अक्षिता की शादी आगामी 24 जून 2026 को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी (बनारस) के एक बेहद प्रतिष्ठित फाइव-स्टार होटल में संपन्न होगी। शादी से जुड़े मांगलिक कार्यक्रमों की शुरुआत 21 जून से ही उनके पैतृक गांव में हो जाएगी।

21 जून: आकाशदीप के पैतृक गांव बड्डी (सासाराम, रोहतास) में  'तिलक समारोह' का आयोजन होगा।

 22 जून: पैतृक घर पर 'मेहंदी' की रस्म निभाई जाएगी।

 23 जून: पारंपरिक गीतों के बीच 'हल्दी' का कार्यक्रम संपन्न होगा।

 24 जून: वाराणसी में मुख्य विवाह समारोह (बारात और सात फेरे) आयोजित किया जाएगा।

कंचनवाणी परिवार की ओर से भारतीय क्रिकेटर आकाशदीप और अक्षिता राज को उनके आने वाले सुंदर और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए अग्रिम बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं!

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