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Tuesday, 14 April 2026

विकास के पर्याय: एक 'कर्मयोगी' के युग का समापन और मेरी पत्रकारिता के कुछ अनछुए पन्ने और नीतीश कुमार


बिहार की राजनीति के एक युग का समापन! मेरे संस्मरणों के जरिए जानिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 'मुन्ना' से 'कर्मयोगी' बनने का सफर। रेलवे सुधार, मरीन ड्राइव और मेट्रो जैसे विकास कार्यों से लेकर 10 बार शपथ लेने के बेदाग रिकॉर्ड तक, बिहार के पुनर्जागरण की अनकही कहानी।"

तरुण कुमार कंचन

बिहार की सियासत में आज एक अध्याय नहीं, बल्कि एक युग का समापन हो रहा है। राजनीति की बिसात पर शह और मात के खेल तो चलते रहेंगे, लेकिन जो विरासत पीछे छूट रही है, उसकी गूंज आने वाली कई सदियों तक सुनाई देगी। आज जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पद से विदा ले रहे हैं, तो मेरी आँखों के सामने एक 'नेता' नहीं, बल्कि एक *'कर्मयोगी'* का अक्स उभर रहा है। यह रिपोर्ट उस राजनेता के नाम है जिसने बिहार की मिट्टी को विकास के सपनों से सींचा।

स्मृतियों के झरोखे से: 'प्रभात खबर' के वे दिन और 'मुन्ना' का विजन

एक पत्रकार के रूप में मेरा सफर कई ऐतिहासिक क्षणों का गवाह रहा है। मुझे आज भी वे दिन याद हैं जब मैं *'प्रभात खबर'* पटना में एक युवा रिपोर्टर के रूप में अपनी कलम को धार दे रहा था। वह दौर था जब नीतीश जी श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में रेल मंत्री बनकर पहली बार बिहार आए थे।

मुझे सौभाग्य मिला पटना से लेकर उनके पैतृक क्षेत्र *बाढ़ और बख्तियारपुर* तक के कार्यक्रमों को कवर करने का। उसी यात्रा के दौरान मैंने जाना कि बख्तियारपुर की गलियां उन्हें आज भी प्यार से 'मुन्ना' कहती हैं। लेकिन उस 'मुन्ना' के इरादों में हिमालय जैसी अडिगता थी।

 रेलवे में क्रांति: उस दौर में रेल डकैतियां और असुरक्षा बिहार की पहचान बन चुकी थी। नीतीश जी ने न केवल सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि इस्लामपुर रेल लाइन को पुनर्जीवित कर और बाढ़ में NTPC जैसे विशाल प्रोजेक्ट लाकर यह साबित कर दिया कि 'विजन' किसे कहते हैं।

 विकास का महापथ: सड़क से मेट्रो तक का सफर

नीतीश कुमार के शासनकाल को भविष्य में 'बिहार के बुनियादी ढांचे के पुनर्जीगरण' के रूप में पढ़ा जाएगा। उन्होंने सिर्फ फाइलें नहीं दौड़ाईं, बल्कि जमीन पर लकीरें खींचीं।

 सड़कों का जाल: बिहार के सुदूर गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही। राजद के कार्यकाल में जहां सड़कों पर बोर्ड टांग दिया गया था कि यह सड़क केंद्र सरकार की है, आज वहां चमचमाती सड़क पर सरपट गाड़ियां दौड़ रही हैं।

 गंगा पथ (मरीन ड्राइव): पटना की जिस गंगा के किनारे कभी सन्नाटा पसरा रहता था, आज वहां का 'मरीन ड्राइव' शहर की लाइफलाइन बन चुका है। यह उनके आधुनिक बिहार का हस्ताक्षर है।

 मेट्रो रेल: पटना की सड़कों पर मेट्रो का सपना आज उन्हीं की जिजीविषा के कारण हकीकत में बदल रहा है।

सुशासन और बेदाग व्यक्तित्व: रिकॉर्ड 10 बार शपथ

भारतीय राजनीति के इतिहास में 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना कोई सामान्य घटना नहीं है। सत्ता के शीर्ष पर इतने लंबे समय तक रहने के बाद भी, उनके दामन पर भ्रष्टाचार का एक छींटा तक न होना उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उनकी शुचिता और ईमानदारी आज के दौर में दुर्लभ है।

"पद तो आते-जाते रहते हैं, पर जो कार्य पत्थर की लकीर बन जाएं, वही इतिहास में दर्ज होते हैं।"

 अंतिम क्षण तक कर्तव्यनिष्ठा: 'कर्मयोगी' का विदाई संदेश

आज जब उनके इस्तीफे की खबरें चारों ओर हैं, तब भी नीतीश जी का 'कर्मयोगी' स्वरूप अडिग दिखा। आज की सुबह भी उन्होंने सबसे पहले *बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर* की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और तुरंत कैबिनेट की बैठक में जुट गए। यह दर्शाता है कि उनके लिए समय का हर एक कतरा बिहार की सेवा के लिए है, विदाई के शोक के लिए नहीं।

बिहार का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, वह नीतीश कुमार के जिक्र के बिना अधूरा होगा। उन्होंने एक पिछड़े राज्य की पहचान को बदलकर उसे विकास की मुख्यधारा में खड़ा किया। उनकी कार्यक्षमता और सोच को मेरा शत-शत नमन।

धन्य है उनकी सोच और वंदनीय है उनकी कार्यक्षमता!

जय हिंद, जय बिहार!


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कीवर्ड (Keywords)

  • नीतीश कुमार विदाई (Nitish Kumar Resignation)
  • बिहार विकास मॉडल (Bihar Development Model)
  • तरुण कुमार कंचन पत्रकारिता (Tarun Kumar Kanchan Journalism)
  • नीतीश कुमार के कार्य (Nitish Kumar Achievements)
  • सुशासन बाबू बिहार (Sushasan Babu Bihar)
  • कंचन वाणी (Kanchan Vani Blog)
  • प्रभात खबर संस्मरण (Prabhat Khabar Memories)
  • पटना मरीन ड्राइव और मेट्रो (Patna Marine Drive and Metro)
  • बिहार राजनीति का इतिहास (History of Bihar Politics)

हैशटैग (Hashtags)

#NitishKumar #BiharPolitics #Karmayogi #BiharDevelopment #Sushasan #JournalismLife #Patna #KanchanVani #BiharMetrorail #NitishEra #ThankYouNitishKumar




Monday, 19 January 2026

जंगल के हीरो का कत्ल: करोड़ों के 'खाल' कारोबार में शामिल सफेदपोश, आखिर कब थमेगा यह ख़ूनी खेल?

वन्यजीव तस्करी, बिहार, VIP कनेक्शन, पलामू टाइगर रिजर्व, तेंदुआ खाल, हिरण खाल, जंगल सुरक्षा, Wildlife Trafficking India
बिहार में 'वन्यजीव तस्करी' का सबसे बड़ा खुलासा: 3.70 करोड़ के खेल में पूर्व मंत्री का बेटा, VIP सिंडिकेट का पर्दाफ़ाश!

Tarun Kumar Kanchan

The most sensational wildlife smuggling case in Bihar! A former minister's son arrested in Jhanjharpur with leopard and deer skins. This bloody 3.70 crore rupee racket has links to VIPs, white-collar criminals, and big business.

बिहार में वन्यजीव तस्करी का अब तक का सबसे सनसनीखेज खुलासा! झंझारपुर में तेंदुआ और हिरण की खाल के साथ पूर्व मंत्री का बेटा गिरफ्तार। 3.70 करोड़ के इस खूनी कारोबार के तार VIPs, सफेदपोश और बड़े कारोबारियों से जुड़े हैं। जानें कैसे पलामू टाइगर रिजर्व से लेकर नेपाल तक फैला यह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट हमारे जंगल के मूक नायकों को मौत के घाट उतार रहा है। क्या सिर्फ छोटे प्यादों पर गिरेगी गाज, या सरगना भी पकड़े जाएंगे? पूरी रपट पढ़ें और जानें जंगल की सुरक्षा पर मंडराता यह बड़ा ख़तरा।

जंगल के हीरो संकट में - कौन है उनकी जान का सौदागर?

यह सिर्फ एक आपराधिक खबर नहीं है; यह हमारे राष्ट्रीय गौरव पर एक करारा प्रहार है। बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर से वन्यजीव तस्करी के जिस भयावह नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, उसने पूरे देश को सकते में डाल दिया है। सवाल सीधा और तीखा है: कैसे होगी जंगली जानवरों की रक्षा, जब उनकी जान के पीछे अंतरराज्यीय संगठित गिरोह काम कर रहा हो? और इससे भी बड़ा खुलासा यह है कि इस खूनी कारोबार की तारें सफेदपोश नेताओं और नामी-गिरामी व्यवसायियों से जुड़ी हैं। जंगल के मूक नायकों पर मंडराता यह ख़तरा अब हमारे दरवाज़े तक आ पहुंचा है।

पूर्व मंत्री के पुत्र की गिरफ्तारी ने खोली VIP क्राइम की परत

सनसनीखेज मोड़ तब आया जब वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर झंझारपुर में छापेमारी की। इस कार्रवाई में एक शक्तिशाली तेंदुआ और दो मासूम हिरण (चितल) की खाल बरामद हुई।

पकड़े गए चार आरोपितों में एक नाम ऐसा था, जिसने सबको चौंका दिया। राज्य सरकार के पूर्व मंत्री स्वर्गीय रूपनारायण झा के पुत्र पंकज कुमार झा। एक राजनीतिक रूप से समृद्ध और प्रभावशाली परिवार के व्यक्ति का इस संगीन अपराध में शामिल होना, सत्ता और अपराध के खतरनाक गठजोड़ की ओर इशारा करता है। यह घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि यह वीआईपी क्राइम की वह परत है, जिसे अब बेनकाब करना नितांत आवश्यक है।

 3.70 करोड़ का 'मौत का खेल': पलामू से मोतिहारी तक फैला ख़ूनी सिंडिकेट

गिरफ्तार तस्करों के कबूलनामे ने इस पूरे रैकेट की भयावह गहराई खोल दी है। जांच में सामने आया है कि झंझारपुर इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का सिर्फ एक 'डील प्वाइंट' था, जहां खालों का सौदा होता था। जब्त की गई इन खालों के बदले कुल 3.70 करोड़ रुपये का लेन-देन होना था।

 डील का ब्योरा: 2.2 करोड़ रुपये मुजफ्फरपुर के तस्कर को और 1.5 करोड़ रुपये पूर्वी चंपारण के एक नामी ज्वेलरी शोरूम के मैनेजर को भेजे जाने थे।

 अंतरराज्यीय कनेक्शन: खालों के तार झारखंड के गौरव पलामू टाइगर रिजर्व पार्क से जुड़े होने की आशंका है। इसका मतलब है कि यह मौत का कारोबार झारखंड से शुरू होकर बिहार के संवेदनशील जंगलों (VTR समेत) और नेपाल तक फैला है।

केंद्रीय एजेंसियों और कोलकाता की विशेष टीम की लंबी निगरानी ने इस घिनौने व्यापार पर से पर्दा हटाया है, लेकिन यह साफ़ है कि यह एक टिप ऑफ़ द आइसबर्ग है।

 परदे के पीछे के सरगना : सिर्फ 'प्यादों' पर गिरेगी गाज?

सबसे गंभीर पहलू यह है कि पकड़े गए पंकज झा और उनके साथी (अजय कुमार झा, धीरज कुमार श्रीवास्तव, और चंदन कुमार सिंह) तो मात्र 'प्यादे' थे, जिन्हें काम के बदले 30 हजार से 5 लाख रुपये तक का मामूली कमीशन मिलना था।

असली खतरा वे पाँच बड़े मास्टरमाइंड्स हैं, जिनके नाम इन प्यादों ने उगले हैं, लेकिन जो अब भी अंडरग्राउंड हैं। जब तक मुजफ्फरपुर स्थित माड़ीपुर के सुधाकर कुमार, तपन जी, राकेश उर्फ गुड्डू भैया और संदीप बॉस जैसे सरगनाओं को दबोचकर जेल की सलाखों के पीछे नहीं डाला जाता, तब तक इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करना महज एक सपना रहेगा।

 डीएफओ भास्कर चंद्र भारती ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रिमांड पर लेकर पूछताछ की बात कही है। सभी आरोपितों पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जंगल को बचाना है, तो VIP तस्करों को दंडित करना होगा

यह घटना एक वेक-अप कॉल है। यह दिखाता है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सिर्फ जंगल के गार्डों का काम नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। जब राजनीतिक रसूख वाले लोग और बड़े कारोबारी इस अपराध में शामिल होते हैं, तो जांच की निष्पक्षता और अपराधियों को दंडित करने की प्रक्रिया पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग जाता है।

अगर हम अपने टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय पशुओं को बचाना चाहते हैं, तो सरकार को इस सिंडिकेट के VIP कनेक्शन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के तोड़ना होगा।

पाठकों, क्या आपको लगता है कि सिर्फ छोटे तस्करों को पकड़ने से यह कारोबार रुक पाएगा? अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें!

 💥तरुण कुमार कंचन

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 कीवर्ड्स: वन्यजीव तस्करी, बिहार, VIP कनेक्शन, पलामू टाइगर रिजर्व, तेंदुआ खाल, हिरण खाल, जंगल सुरक्षा, Wildlife Trafficking India

Hashtags : #वन्यजीव_तस्करी #BiharWildlifeScam #VIPTerror #तेंदुआखाल
 #PalamuTigerReserve #WildlifeTrafficking #जंगलसुरक्षा #बिहार 
 #झंझारपुर #SaveTheWildlife

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Friday, 19 December 2025

अंकोरवाट भी छोटा पड़ जाएगा… बिहार में क्या बनने जा रहा है ऐसा, जिसकी चर्चा दुनिया में है?

 

बनने के बाद ऐसा अद्भुत दिखेगा बिहार का विराट रामायण मंदिर

Tarun Kumar Kanchan

"बिहार के पूर्वी चंपारण में बन रहा है दुनिया का सबसे बड़ा 'विराट रामायण मंदिर' (Virat Ramayan Mandir Bihar)। जानें इस मंदिर की भव्यता, 210 टन वजनी शिवलिंग और सांप्रदायिक सौहार्द की उस कहानी के बारे में जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।"

Virat Ramayan Temple – A temple that will not only surpass Cambodia's Angkor Wat in size, but will also set a new example of Indian culture and social harmony.

बिहार की धरती एक बार फिर इतिहास रचने जा रही है। पूर्वी चंपारण (East Champaran) के केसरिया-चकिया मार्ग पर एक ऐसा 'महाप्रोजेक्ट' आकार ले रहा है, जिसे देख पूरी दुनिया दंग रह जाएगी। यह है विराट रामायण मंदिर (Virat Ramayan Temple)— एक ऐसा मंदिर जो न केवल आकार में कंबोडिया के अंकोरवाट को पीछे छोड़ देगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक सद्भाव की एक नई मिसाल पेश करेगा।

हाइलाइट्स: क्यों खास है यह मंदिर?

·       विश्व का सबसे बड़ा मंदिर  (World's Largest Temple) : आकार और ऊंचाई में दुनिया के सभी मौजूदा मंदिरों से विशाल।

·       तीन मंजिला शिवलिंग (World's Largest Shivling) : 33 फीट ऊंचा और 210 टन वजनी काले ग्रेनाइट का विशाल शिवलिंग।

·       भाईचारे की मिसाल: मंदिर के लिए मुख्य जमीन एक मुस्लिम परिवार ने दान की है।

·       विशाल संरचना: मंदिर में 22 गर्भगृह और 18 गगनचुंबी शिखर होंगे।

एक पूर्व IPS अधिकारी किशोर कुणाल का सपना, जो अब बन रहा है हकीकत

किशोर कुणाल

इस अद्भुत परियोजना की परिकल्पना आचार्य किशोर कुणाल (पूर्व आईपीएस अधिकारी और महावीर मंदिर न्यास के सचिव) ने की थी। वर्षों पहले देखा गया उनका यह सपना अब जमीन पर उतर रहा है। 2012 में भूमि पूजन के बाद, 2023 से इसका निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। लक्ष्य है कि बिहार को वैश्विक धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) के नक्शे पर सबसे ऊपर लाया जाए।

 

मुस्लिम दानदाता की जमीन : सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल


जहाँ आज दुनिया में धर्म के नाम पर दूरियां बढ़ रही हैं, वहीं विराट रामायण मंदिर प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बनकर उभर रहा है। मंदिर के निर्माण के लिए मोहम्मद इश्तियाक खान और उनके परिवार ने करोड़ों की जमीन दान में दी है। एक मुस्लिम नागरिक द्वारा राम मंदिर के लिए किया गया यह दान इस मंदिर की नींव में 'गंगा-जमुनी तहजीब' की खुशबू भर देता है।


अंकोरवाट से भी ऊंचा और अयोध्या से तीन गुना बड़ा

इस मंदिर की भव्यता का अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं: 


अंकोरवाट (कंबोडिया) का मंदिर


विशेषता

विवरण

लंबाई

1080 फीट

चौड़ाई

540 फीट

ऊंचाई

270 फीट (अंकोरवाट से 50 फीट अधिक)

शिखर

18 शिखर

गर्भगृह

22 देवालय (Sanctums)

यह मंदिर अयोध्या के नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर से लगभग तीन गुना बड़ा होगा। यहाँ एक साथ हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

आकर्षण का केंद्र: तीन मंजिला ऊंचा 'महा शिवलिंग'

शिवलिंग को 100 पहियों वाले एक विशेष ट्रेलर ट्रक से बिहार लाया जा रहा है

मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाला 33 फीट ऊँचा और 210 मीट्रिक टन वज़न वाला विशाल ग्रेनाइट का शिवलिंग इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण है। जिसे दुनिया में सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक माना जा रहा है। यह मंदिर का धार्मिक आकर्षण बढ़ाता है और आस्था का शक्तिशाली प्रतीक भी बनेगा।

यहां स्थापित होगा शिवलिंग

·       निर्माण: इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है।

·       समय और लागत: इसे तराशने में 10 साल का समय और लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत आई है।

·       सफर: 210 टन वजनी इस शिवलिंग को 100 पहियों वाले एक विशेष ट्रेलर ट्रक से बिहार लाया जा रहा है। इसकी सुरक्षा का आलम यह है कि यह मात्र 5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा है।


·       स्थापना: फरवरी 2025 तक इसे मंदिर के मुख्य परिसर में स्थापित करने का लक्ष्य है।

पूर्वी चंपारण ही क्यों?

पूर्वी चंपारण में विराट रामायण मंदिर निर्माण का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि यह क्षेत्र रामायण परंपरा के सांस्कृतिक भूगोल से जुड़ा हुआ है, जहाँ मिथिला, वाल्मीकि आश्रम और रामकथा की स्मृतियाँ समीपवर्ती रूप में मौजूद हैं। साथ ही यह इलाका ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण होते हुए भी धार्मिक-पर्यटन की दृष्टि से अपेक्षाकृत उपेक्षित रहा है। आचार्य किशोर कुणाल का मानना था कि एक विराट धार्मिक परियोजना के माध्यम से न केवल रामायण की समग्र कथा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सजीव रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास, रोजगार और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्याप्त भूमि की उपलब्धता और स्थानीय समाज के सहयोग ने भी इस स्थान को उपयुक्त बनाया। इस प्रकार यह मंदिर अयोध्या के पूरक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में बिहार की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने की एक सचेत कोशिश है।

1.     राम-जानकी मार्ग: यह स्थान अयोध्या से जनकपुर (नेपाल) को जोड़ने वाले प्रस्तावित मार्ग का प्रमुख पड़ाव है।

2.     सांस्कृतिक भूगोल: यह क्षेत्र प्राचीन मिथिला और वाल्मीकि आश्रम के करीब है, जो रामायण काल की स्मृतियों को संजोए हुए है।

3.     विकास की नई किरण: यहाँ चार आश्रम, धर्मशालाएं और विवाह भवन बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा।

निष्कर्ष

विराट रामायण मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि बिहार के गौरव का पुनरुत्थान है। जब यह बनकर तैयार होगा, तो न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के पर्यटक बिहार की ओर खिंचे चले आएंगे। यह मंदिर हमें सिखाता है कि जब आस्था और अपनेपन का मिलन होता है, तो 'विराट' सृजन होता है।

क्या आप भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए तैयार हैं? हमें कमेंट में बताएं और इस जानकारी को शेयर करें!

 


मन में उठते विचार

1.          बिहार के एक गांव में शुरू हुआ काम, जो रामायण से लेकर वर्ल्ड रिकॉर्ड तक ले जाएगा

2     एक मुस्लिम परिवार, करोड़ों की ज़मीन और राम मंदिर… कहानी सिर्फ आस्था की नहीं है

3.     अयोध्या से तीन गुना बड़ा मंदिर? बिहार में चल रहे इस निर्माण ने सबको चौंकाया

4.     210 टन का पत्थर, 100 पहियों वाला ट्रक और 5 किमी की रफ्तार—आख़िर क्या है यह मिशन?

5.     बिहार में कौन सा मंदिर बन रहा है जो अंकोरवाट को पीछे छोड़ देगा?

6.     रामायण से जुड़ा वो स्थान, जहाँ बन रहा है दुनिया का सबसे विशाल मंदिर

7.     क्यों पूर्वी चंपारण बन रहा है अचानक वैश्विक धार्मिक चर्चा का केंद्र?

8.     जिस मंदिर के लिए मुस्लिम परिवार ने ज़मीन दी, उसकी कहानी जानकर आप चौंक जाएंगे

9.  क्या बिहार बनने जा रहा है दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन हब?

10. रामायण, रिकॉर्ड और रिश्तों की कहानी—बिहार से बड़ी खबर

11.  धर्म से ऊपर इंसानियत: बिहार में बन रहा मंदिर जिसकी नींव भाईचारे पर टिकी है

12.  जहाँ राम मंदिर के लिए मुस्लिम परिवार ने खोल दी अपनी ज़मीन—कहानी बिहार से

13.  आज जब देश बंटा दिखता है, बिहार से आई ये खबर चुपचाप इतिहास रच रही है

14.  Bihar News: ऐसा मंदिर बन रहा है जिसकी ऊँचाई ने दुनिया को चौंका दिया

15.  World’s Biggest Temple? बिहार के इस प्रोजेक्ट ने सबका ध्यान खींचा

16.  Bihar में चल रहा निर्माण, जो पूरा होते ही इतिहास बदल देगा

17.  ये सिर्फ मंदिर नहीं… बिहार से उठ रही एक ऐसी कहानी है, जो दुनिया देखेगी

18.  आज हम आपको ले चलेंगे बिहार के उस गांव में, जहाँ बन रहा है इतिहास

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