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Friday, 20 March 2026

बिहार में 'नीतीश युग' का अंत: शाहनवाज होंगे भाजपा का 'सरप्राइज' मुख्यमंत्री चेहरा?

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नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में भाजपा का अगला मुख्यमंत्री कौन? क्या विकासवादी छवि और इथेनॉल पॉलिसी के जनक शाहनवाज हुसैन बनेंगे बिहार के नए मुखिया? जानिए बिहार भाजपा के बड़े चेहरों और शाहनवाज हुसैन की दावेदारी का पूरा विश्लेषण।

Tarun Kumar Kanchan

मुजफ्फरपुर । बिहार की राजनीति ने एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। लगभग दो दशकों तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब बिहार में 'सुशासन बाबू' के युग का पटाक्षेप होता दिख रहा है। 20 नवंबर 2025 को रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने अचानक सक्रिय राजनीति के इस सर्वोच्च पद को छोड़कर दिल्ली की राह पकड़ ली है। इस बदलाव ने बिहार भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री पद की रेस को तेज कर दिया है, जिसमें एक नाम जो चर्चाओं से थोड़ा दूर है, लेकिन योग्यता में सबसे आगे नजर आता है, वह है— सैयद शाहनवाज हुसैन।

शाहनवाज हुसैन: विकासवादी सोच और प्रशासनिक अनुभव का संगम


सैयद शाहनवाज हुसैन भाजपा के उन गिने-चुने मुस्लिम चेहरों में से हैं जिनकी स्वीकार्यता पार्टी के भीतर और बाहर रही है। यदि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो भाजपा अपनी मुस्लिम विरोधी छवि को बदल सकती है और अपने विरोधी दल के नेताओं का मुंह बंद करा सकती है।

   प्रशासनिक अनुभव: शाहनवाज हुसैन केंद्र में नागरिक उड्डयन और कपड़ा मंत्री रह चुके हैं, साथ ही बिहार के उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने निवेश लाने (खासकर इथेनॉल पॉलिसी) में काफी सक्रियता दिखाई थी।

 विकासपरक छवि: उनकी पहचान एक "काम करने वाले" नेता की रही है। उन्होंने 'उद्योग' जैसे सूखे विभाग में जान फूँकने की कोशिश की, जिससे युवाओं में उनकी छवि सकारात्मक बनी है।

 सौम्य व्यक्तित्व: वह एक संतुलित और मृदुभाषी नेता माने जाते हैं, जो सभी समुदायों के बीच संवाद करने की क्षमता रखते हैं। सैयद शाहनवाज हुसैन बिहार की राजनीति में एक कद्दावर चेहरा रहे हैं। उन्होंने बिहार के उद्योग मंत्री (Industries Minister) के रूप में कार्य किया था। उनके कार्यकाल (Tenure) और उनके द्वारा किए गए मुख्य कार्यों का पर गौर करते तो उनकी कार्यक्षमता सामने आती है।

शाहनवाज हुसैन फरवरी 2021 से अगस्त 2022 तक बिहार सरकार में उद्योग मंत्री रहे। वे एनडीए (NDA) सरकार में भाजपा के कोटे से मंत्री बने थे और उस समय नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री थे। उनके छोटे से कार्यकाल (लगभग 1.5 साल) को बिहार के औद्योगिक विकास के लिए काफी सक्रिय माना जाता है।

 इथेनॉल नीति (Ethanol Policy): शाहनवाज हुसैन के समय में बिहार इथेनॉल उत्पादन संवर्धन नीति, 2021 लाने वाला देश का पहला राज्य बना। उन्होंने बिहार में इथेनॉल प्लांट लगाने के लिए भारी निवेश आकर्षित किया।

  पूर्णिया में इथेनॉल प्लांट: उनके प्रयासों से पूर्णिया में देश के पहले अनाज आधारित इथेनॉल संयंत्र (Grain-based Ethanol Plant) का उद्घाटन हुआ।

  इन्वेस्टर मीट (Investors' Meet): उन्होंने बिहार की छवि बदलने के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में 'इन्वेस्टर मीट' का आयोजन किया, ताकि बड़े उद्योगपति बिहार में निवेश करें।

 स्टार्टअप पॉलिसी (Startup Policy 2022): उनके कार्यकाल में 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' और 'महिला उद्यमी योजना' को बहुत बड़े स्तर पर लागू किया गया। इसका फायदा हर ब्लॉक के युवाओं को मिला होगा, जहाँ सरकार ₹10 लाख तक की मदद (जिसमें ₹5 लाख लोन और ₹5 लाख सब्सिडी होती है) अपना छोटा उद्योग या स्टार्टअप शुरू करने के लिए देती है।

 खादी का प्रचार: बिहार खादी के ब्रांड एंबेसडर के रूप में उन्होंने खादी मॉल और बिहार के हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का काम किया।

 लॉजिस्टिक पॉलिसी: उन्होंने बिहार के लिए एक समर्पित लॉजिस्टिक पॉलिसी पर भी काम किया ताकि माल की आवाजाही आसान हो और फैक्ट्रियां लगाने में आसानी हो।

औद्योगिक क्लस्टर (Industrial Clusters)

उन्होंने बिहार के हर जिले में वहां की खासियत के हिसाब से क्लस्टर बनाने की योजना पेश की थी। जमुई के लिए उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों (Food Processing) की संभावनाओं पर जोर दिया था।

जमुई में सोने की खान का मुद्दा (Gold Reserve)

शाहनवाज हुसैन ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर जमुई में देश के सबसे बड़े सोने के भंडार (Gold Reserve) के खनन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए काफी पैरवी की थी। उन्होंने विधानसभा में भी कहा था कि जमुई का सोना बिहार की किस्मत बदल सकता है। हालांकि यह एक लंबी परियोजना है, लेकिन उनके समय में इसके सर्वे और खनन की तैयारी को काफी महत्व मिला।

यद्यपि 1.5 साल का समय किसी बड़े उद्योग को धरातल पर उतारने के लिए कम होता है, लेकिन शाहनवाज हुसैन ने यहाँ के युवाओं के लिए "उद्यमी योजना" के माध्यम से रोजगार के नए रास्ते खोलने की नींव जरूर रखी थी। हालांकि भाजपा अगर उन्हें मुख्यमंत्री चेहरा बनाती है, तो कई चुनौतियों (Challenges) का सामना करना पड़ सकता है।

 जातीय अंकगणित (Caste Calculus): बिहार की राजनीति 'मंडल' (OBC) और 'कमंडल' (Hindutva) के इर्द-गिर्द घूमती है। शाहनवाज हुसैन किसी बड़े जातीय वोट बैंक (जैसे यादव, कुर्मी या कोइरी) का प्रतिनिधित्व नहीं करते। भाजपा को डर रहता है कि एक मुस्लिम चेहरे को आगे करने से उसका सवर्ण या ओबीसी आधार खिसक न जाए।

  RSS का आंतरिक नजरिया: हालांकि शाहनवाज पुराने कार्यकर्ता हैं, लेकिन संघ (RSS) आमतौर पर बिहार जैसे हिंदी पट्टी के राज्यों में एक ऐसे चेहरे को प्राथमिकता देता है जो वैचारिक रूप से उनके 'कोर एजेंडे' को मजबूती से रख सके।

 भीतरी गुटबाजी: बिहार भाजपा के 'पुराने चावल' (पुराने नेता) और 'नए चेहरों' के बीच अक्सर खींचतान रहती है। शाहनवाज हुसैन को मुख्यमंत्री बनाने पर पार्टी के भीतर अन्य दावेदारों के बीच असंतोष पैदा होने का खतरा रहता है।

बिहार भाजपा में सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और नित्यानंद राय जैसे कई कद्दावर नेता हैं, जो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। शाहनवाज हुसैन को इन नेताओं और उनके समर्थक समूहों के बीच स्वीकार्यता दिलाना एक बड़ी चुनौती होगी।

शाहनवाज हुसैन की तुलना अगर बिहार भाजपा के अन्य दिग्गज दावेदारों से करें, तो समीकरण काफी दिलचस्प हो जाते हैं। 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद बिहार की राजनीति जिस मोड़ पर है वहां भाजपा के भीतर 'चेहरे' की जंग तेज है।

शाहनवाज हुसैन बनाम सम्राट चौधरी

 

सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार भाजपा के सबसे शक्तिशाली चेहरों में से एक हैं। वह कोइरी (OBC) समाज से आते हैं, जो बिहार में एक बड़ा वोट बैंक है। संगठन पर उनकी पकड़ मजबूत है। शाहनवाज का कद राष्ट्रीय है, लेकिन सम्राट चौधरी के पास वर्तमान में 'जनाधार' और 'जातीय समीकरण' का लाभ अधिक है। भाजपा फिलहाल बिहार में पिछड़ी जातियों के नेतृत्व पर ज्यादा भरोसा कर रही है।


शाहनवाज हुसैन बनाम विजय कुमार सिन्हा


 विजय सिन्हा सवर्ण (भूमिहार) समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं और RSS के काफी करीब माने जाते हैं। वह प्रखर वक्ता हैं और विपक्ष (खासकर राजद) पर आक्रामक हमले के लिए जाने जाते हैं। विजय सिन्हा का झुकाव 'कोर हिंदुत्व' और सवर्ण राजनीति की ओर है, जबकि शाहनवाज हुसैन की छवि 'विकासवादी' और 'सबका साथ' वाली है।


शाहनवाज हुसैन बनाम नित्यानंद राय (केंद्रीय गृह राज्य मंत्री)

 


नित्यानंद राय यादव समाज से आते हैं। भाजपा उन्हें लालू यादव के यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए एक बड़े हथियार के रूप में देखती है। वह अमित शाह के भी बेहद करीबी माने जाते हैं। राय के पास केंद्र का समर्थन और जातीय मजबूती दोनों है। शाहनवाज के लिए इनसे आगे निकलना तभी संभव है जब भाजपा किसी 'गैर-जातीय' और 'प्रशासनिक' चेहरे पर दांव लगाना चाहे। जैसा कि भाजपा ने हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश में कर चुकी है।

 

  विपक्ष का हमला: शाहनवाज हुसैन पर एक महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। हालांकि उन पर लगे दुष्कर्म के आरोपों में पुलिस ने 'कैंसिलेशन रिपोर्ट' दी है, लेकिन राजनीतिक रूप से विपक्ष इन पुराने मामलों और उनके भाई से जुड़े विवादों को उछालकर उनकी छवि को घेरने की कोशिश करेगा।

हम कह सकते हैं कि 'सबका साथ, सबका विकास' का प्रतीक के रूप में अगर भाजपा देश को यह संदेश देना चाहती है कि वह समावेशी है और मुसलमानों को नेतृत्व दे सकती है, तो शाहनवाज हुसैन सबसे उपयुक्त चेहरा हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें 'मुख्यमंत्री' के बजाय 'उप-मुख्यमंत्री' के रूप में पेश किए जाने की संभावना अधिक हो सकती है।

शाहनवाज हुसैन भाजपा के लिए 'पोस्टर बॉय' और 'संकटमोचक' (Troubleshooter) के रूप में बेहतरीन हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी राह कठिन है, लेकिन अगर भाजपा "मुस्लिम नेतृत्व" का एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयोग करना चाहे, तो वह उनकी पहली पसंद होंगे।

अब आपकी बारी, आप इस बारे में क्या सोचते हैं। कमेंट में ओपिनियन पोल को शामिल कर अपने विचार जरूर रखें।

 

कंचनवाणी ओपिनियन पोल (Opinion Poll)

सवाल: नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान किसके हाथ में? भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए आपकी पहली पसंद कौन है?

·       विकल्प A: सैयद शाहनवाज हुसैन (विकास और औद्योगिक विजन के लिए)

·       विकल्प B: सम्राट चौधरी (मजबूत सांगठनिक और जातीय पकड़ के लिए)

·       विकल्प C: विजय कुमार सिन्हा (प्रखर नेतृत्व और अनुभवी चेहरा)

·       विकल्प D: नित्यानंद राय (केंद्रीय अनुभव और जमीनी पकड़)

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Thursday, 13 November 2025

Bihar Elections 2025 : Video & Photo : सासाराम में EVM से छेड़छाड़ के आरोप पर मतगणना केंद्र पर देर रात हंगामा और लाठीचार्ज

 

सासाराम के बज्रगृह में ट्रक पर लदे टीन के बक्से और घेर रखे लोग

Bihar Elections 2025: Late night ruckus and lathicharge at counting centre in Sasaram over allegations of EVM tampering

 

​सासाराम (रोहतास): बिहार चुनाव 2025 (Bihar Elections 2025) की मतगणना से पूर्व, सासाराम के तकिया बाजार समिति परिसर, जिसे ईवीएम का बज्रगृह (स्ट्रांग रूम strongroom) बनाया गया है, वहां बुधवार देर रात ईवीएम (EVM) में छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। यह हंगामा उस समय शुरू हुआ जब स्ट्रांग रूम के पास अचानक एक संदिग्ध ट्रक देखा गया और सीसीटीवी कैमरों (CCTV Camera) के बंद होने की खबर आई।

​🚨 हंगामे के मुख्य कारण और आरोप:

​


बुधवार देर रात बज्रगृह पर हंगामा करते लोग

ईवीएम स्ट्रांग रूम में संदिग्ध गतिविधियों का आरोप: समर्थकों और प्रत्याशियों (राजद सहित) ने आरोप लगाया कि स्ट्रांग रूम के मुख्य गेट और अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे अचानक बंद कर दिए गए, जिससे उन्हें ईवीएम की सुरक्षा के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी।


​टीन के खाली बक्सों से लदे ट्रक का प्रवेश: देर रात करीब 3 घंटे के लिए एक ट्रक को बाजार समिति परिसर में प्रवेश दिया गया, जिसे बाद में बाहर निकाला जा रहा था। हंगामा कर रहे लोगों ने ट्रक को रोक लिया। प्रत्याशियों ने सवाल उठाया कि बिना जाँच किए ट्रक को अंदर क्यों ले जाया गया और उस समय सीसीटीवी बंद क्यों थे?

​लाठीचार्ज का आरोप: स्थिति बिगड़ने पर देर रात लगभग 2:30 बजे भारी संख्या में पुलिस बल को बुलाया गया, जिसने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। इसमें सासाराम के राजद प्रत्याशी सत्येंद्र साह और एक पत्रकार भी चोटिल हुए हैं।

​🏛️ प्रत्याशियों का विरोध प्रदर्शन:


​राजद सहित सातों विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश प्रत्याशी मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

​दिनारा के राजद प्रत्याशी राजेश यादव, सासाराम के प्रत्याशी सत्येंद्र साह और नोखा की प्रत्याशी अनीता चौधरी स्ट्रांग रूम के बाहर धरने पर बैठ गए।

​🔎 प्रशासन का स्पष्टीकरण और कार्रवाई:

सासाराम डीएम उदिता सिंह

​जिलाधिकारी (DM) उदिता सिंह ने मामले का संज्ञान लिया और चिनारी विधानसभा के निर्वाचित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है।

​DM ने बताया है कि विवादित ट्रक चेनारी विधानसभा से संबंधित था और उसमें खाली बक्से पड़े हुए थे।

​पुलिस अधीक्षक (SP) ने प्रत्याशियों और समर्थकों द्वारा लगाए गए लाठीचार्ज के आरोप को गलत और बेबुनियाद बताया है।

​🔒 वर्तमान स्थिति:

​फिलहाल, तकिया बाजार समिति का मुख्य गेट पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

​बाजार क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

​करगहर मोड पर पुलिस तैनात कर वाहनों को तकिया की ओर जाने से रोका जा रहा है।

#EVMHacking #BiharPolitics #Sasaram #मतगणना #BiharNews #राजद #EVMStrongRoom

 


https://kanchanwani2020.blogspot.com/2025/11/bihar-elections-2025-record-breaking.html

Sunday, 9 November 2025

Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव के दूसरे चरण का रण, किंग मेकर की चर्चा और बदलता सामाजिक समीकरण!

 

बिहार के एक चुनावी सभा में जुटी भीड़

The battle for the second phase, the discussion of kingmakers and the changing social equations!

 ​दूसरे चरण के चुनाव प्रचार का शोर आज थम रहा है, और इसके साथ ही बिहार की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म है। The noise of the second phase of election campaign is coming to an end today, and with this the market of speculations is hot in Bihar politics. सरकार बनाने को लेकर कई तरह के कयास  #ElectionStrategy  #CasteCalculus लगाए जा रहे हैं, लेकिन क्या इन कयासों के पीछे कोई 'खेल' चल रहा है?

​

प्रशांत किशोर का रोड शो

अचानक बढ़ता शोर: प्रशांत किशोर और किंग मेकर की कहानी 
(Intriguing & Kingmaker-focused):

​हाल के दिनों में मीडिया में अचानक एक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है: बिहार में अधिक वोटिंग होने से प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी 'जन सुराज' की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पहले चरण के मतदान केंद्रों पर मतदाता इंडिया गठबंधन या एनडीए की बात कर रहे थे, लेकिन अचानक पीके को सुर्खियों में लाना कई आशंकाएं पैदा करता है।

​क्या यह सिर्फ दूसरे चरण के मतदान को प्रभावित करने की रणनीति है?

​पीके ने शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को लगातार उठाया है, जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है?

​राजनीतिक पंडितों के अनुसार, जन सुराज सत्ता में दहाई अंक तक पहुंचकर 'किंग मेकर' की भूमिका निभा सकता है, लेकिन सत्ता में आने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति लगातार अंतर्द्वंद्व (internal conflict) और काम करने के दबाव वाली होगी।

Direct and Questioning: ​यूं किंग मेकर बनना जन सुराज की सबसे बड़ी भूमिका हो सकती है, इससे अधिक की उम्मीद कम है।


​🗺️ बदलती राजनीति: 'माय' से 'बाप' तक का सफर (Caste Equation & Change-focused):

​

सभा को संबोधित करते तेजस्वी यादव

बिहार की राजनीति हमेशा से सामाजिक समीकरण साधने पर टिकी रही है। लेकिन 2025 के इस चुनाव में पुरानी धारणाओं को तोड़ने की कोशिश हो रही है।

​धुर जाति की राजनीति करने वाला एक दल, जिसका मुख्य समीकरण कभी 'माय' (मुस्लिम-यादव) था और जो कभी 'भूरा बाल साफ करो' का नारा देता था, उसने अब एक नया समीकरण गढ़ा है: 'बाप' (बहुजन, अगड़ा और पिछड़ा)।

​यह बदलाव दर्शाता है कि राजनीतिक दल पारंपरिक समीकरणों के दायरे से बाहर निकलकर नए सामाजिक ध्रुवीकरण की तलाश में हैं।

 

​📊 आंकड़े में दूसरा चरण: महासंग्राम की पूरी तस्वीर

​दूसरा चरण 11 नवंबर को 20 जिलों के 122 विधानसभा क्षेत्रों में होने जा रहा है।

​सीटें: 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति, और 2 अनुसूचित जनजाति।

​कुल मतदाता: लगभग 3 करोड़ 70 लाख।

​उम्मीदवार: कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में।

​खास बात: 100 साल से अधिक उम्र वाले 6000 से अधिक मतदाता इस चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

​सर्वाधिक उम्मीदवार: कैमूर का चैनपुर, रोहतास का सासाराम, और गया शहर (222 उम्मीदवार)।

​सबसे कम उम्मीदवार: पश्चिम चंपारण का लोरिया, चनपटिया, पूर्वी चंपारण के रक्सौल, सुगौली, सुपौल के त्रिवेणीगंज और पूर्णिया का बनमनखी (सिर्फ 5-5 उम्मीदवार)।

​🤝 जटिल सामाजिक समीकरण: कौन किसे साध रहा?

​

चुनावी सभा में प्रधानमंत्री मोदी 

दोनों गठबंधनों ने जातीय समीकरणों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन गठबंधनों की रणनीति कुछ इस प्रकार है, जिसे समझने की जरुरत है।

एनडीए : यादव प्रत्याशी मैदान में उतारे; लव-कुश (कोइरी-कुर्मी) को साधने में जदयू और रालोमो (उपेंद्र कुशवाहा); चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में सक्रिय; भाजपा स्वर्ण और वैश्य समाज पर फोकस। औवेसी का हस्तक्षेप, जिससे मुस्लिम वोटर बंटने की उम्मीद।

महागठबंधन (इंडिया) : तेजस्वी यादव ने प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के साथ अति पिछड़ा बहुल क्षेत्रों में पैठ बढ़ाई; अब्दुलबारी सिद्दीकी मुस्लिम वोटरों को प्रभावित करने में जुटे; कांग्रेस ने अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, पवन खेड़ा, और जिग्नेश मेवानी को उतारकर सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा।

वीआईपी मुकेश सहनी मल्लाह (निषाद) जाति को गोलबंद कर रहे हैं।

समीकरण की हकीकत में सेंध

​यादव वोट: एनडीए को उम्मीद है कि विकास और सनातन के नाम पर यादव मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा नीतीश और भाजपा से जुड़ा है।

​मल्लाह जाति: मुकेश सहनी पर उनकी अपनी जाति के 25-30% लोगों को भरोसा नहीं है, क्योंकि वे 'अवसर की राजनीति' करते हैं।

​पासवान वोट: चिराग पासवान पर सवाल उठ रहे हैं कि 'फर्स्ट बिहार, फर्स्ट बिहारी' का वादा कहां गया। अनुसूचित जातियों में बड़ा वोट शेयर अभी भी राजद के साथ माना जा रहा है।

एनडीए को 2020 की तुलना में चिराग और उपेंद्र कुशवाहा के साथ होने से वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

मुस्लिम मतदाता : बिहार मे सबसे बड़ी जनसंख्या मुस्लिम मतादाओं की है। उसे हर दल ने साधने की कोशिश की है। मुस्लिम मतदाताओं का सर्वाधिक झुकाव राष्ट्रीय जनता दल के साथ है। हालांकि जदयू का दावा है कि मुस्लिमों का सबसे ज्यादा विकास नीतीश कुमार के शासन काल में हुआ है। उन्हें इसका लाभ मिलेगा। भाजपा नेता कहना है कि हमने विकास की हर योजना में मुस्लमानों को बराबर की भागीदार बनाया है। दूसरे दल लगातार यह प्रशन उठाता रहा है कि भाजपा ने किसी मुस्लिम के उम्मीदवार नहीं बनाया है। सबसे बड़ी बात इस बार प्रचार में भी मुस्लिम नेताओं की भागीदारी भी नगण्य रही है। इसमें लोगों का कहना है कि भाजपा खुलकर हिन्दूवादी पार्टी होने का दावा कर रहा है ताकि हिन्दुओ को गोलबंद किया जा सके।   

​

​👵 'आधी आबादी' का रुख: नीतीश पर निढाल महिला वोटर #WomenVoters #NitishKumar

नीतीश कुमार की एक मुद्रा

​इस चुनाव में 255 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। बसपा (26) और जन सुराज (25) ने सबसे अधिक महिलाओं को टिकट दिया है।

​महिलाओं का रुख: महिला सशक्तिकरण के लाभ (Women Voters & Enthusiasm-focused) के कारण जदयू का पलड़ा भारी है।

​एक रोचक वाकया सामने आया, जहां एक पत्रकार के सामने एक महिला ने अपने पति (जो लालटेन को वोट देने की बात कर रहा था) को टोकते हुए कहा: "इनका कहने से क्या होगा? हम वोट नीतीश को ही देंगे। उन्होंने हमें ₹10,000 दिए और रोजगार के लिए बड़ा कर्ज दिया, हम आज अपने बल पर परिवार चला रहे हैं।"

​यह घटना दर्शाती है कि एनडीए ने यादव वोटरों में भी सेंध लगाई है, क्योंकि महिलाएं विकास और योजनाओं के नाम पर नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

​युवाओं को तेजस्वी के सरकारी नौकरी के वादे और मोदी के 5 साल में 1 करोड़ रोजगार के रोडमैप ने भी प्रभावित किया है।

​🎤 चुनाव प्रचार: कौन कितना बोला?

​यह चुनाव बड़े नेताओं की रैलियों का गवाह रहा:

​तेजस्वी यादव: 155 चुनावी सभाएं (सर्वाधिक)।

​नीतीश कुमार: 67 सभाएं।

​नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी: 14-14 सभाएं।

​अन्य दिग्गज: अमित शाह (33), राजनाथ सिंह (21), प्रियंका गांधी (13), योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव भी मैदान में दिखे।

​प्रशांत किशोर ने सभी सीटों पर रोड शो किया, जहां जनता ने दिलचस्पी दिखाई।

​भीड़ सब जगह थी, लेकिन वोट को कौन कितना प्रभावित कर पाया, यह 14 नवंबर को ही पता चलेगा।

​🎲 चुनावी खेल और परिणाम का अंदेशा

​बिहार विधानसभा चुनाव में एक बड़ा 'खेल' चल रहा है, जिसे सत्ता के खिलाफ गोलबंदी का नाम दिया जा रहा है। अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं:

​महागठबंधन: पहले चरण में 80+ सीटें।

​एनडीए: पहले चरण में 100 के आसपास सीटें।

​मीडिया का अनुमान: राजद 80 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी, भाजपा को 65-70, जदयू को 40-42, और जन सुराज 25-30 सीटें जीतकर किंग मेकर बनेगा।

​विश्लेषण का अंदेशा: यह विश्लेषण दूसरे चरण के मतदान को प्रभावित करने के लिए दिया जा रहा है। हालांकि, बिहार के मतदाता समझदार हैं और अपने पत्ते नहीं खोलते।

​#ElectionResult #Bihar ऊँट किस करवट बैठेगा, यह 14 नवंबर को स्पष्ट होगा।

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- तरुण कुमार कंचन