google.com, pub-9395330529861986, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Kanchanwani कंचनवाणी: कलंक : जब 'चोरों के चोर' बन गए थानेदार; वैशाली से गया तक खाकी पर दाग

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Monday, 5 January 2026

कलंक : जब 'चोरों के चोर' बन गए थानेदार; वैशाली से गया तक खाकी पर दाग

 

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बिहार पुलिस की साख पर सवाल! वैशाली के लालगंज और गया में 'चोरों के चोर' निकले थानेदार। चोरी का सोना और नकदी डकारने के आरोप में थानाध्यक्ष और एसआई निलंबित। जानिए पुलिस के भक्षक बनने की पूरी कहानी।

Tarun Kumar Kanchan

The credibility of the Bihar Police is in question! Police officers in Lalganj, Vaishali, and Gaya have been found to be "thieves of thieves." The station chief and SI have been suspended for allegedly embezzling stolen gold and cash. Learn the full story of the police's transformation into predators.

क्या हो जब चोर को पकड़ने वाली पुलिस खुद 'चोरों की चोर' बन जाए? बिहार के वैशाली और गया से आई हालिया खबरें कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही हैं। इन घटनाओं ने न केवल पुलिस महकमे को शर्मसार किया है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग कहने लगे खाकी के पीछे 'खलनायक' छिपा है।

​बिहार पुलिस की साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 'जन-जन की ओर, शांति की ओर' का नारा देने वाली पुलिस के कुछ अधिकारी ही अब अपराध की राह पर निकल पड़े हैं। ताजा मामला वैशाली जिले के लालगंज का है, जहां चोरी का माल बरामद करने गई पुलिस टीम पर ही जेवर और नकदी गायब करने का संगीन आरोप लगा है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए लालगंज थानाध्यक्ष और एक सब-इंस्पेक्टर (SI) को निलंबित कर दिया गया है।

लालगंज: छापेमारी में 'खेल', न वीडियोग्राफी हुई न जब्ती सूची बनी

​घटना 30 दिसंबर 2025 की है। लालगंज पुलिस को सूचना मिली थी कि बिलनपुर गांव में रामप्रीत सहनी के घर पर चोरी के सामान का बंटवारा हो रहा है। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष संतोष कुमार और एसआई सुमन जी झा ने पुलिस बल के साथ वहां छापेमारी की।

​पुलिस की 'जादुई' कार्रवाई:

पुलिस की दस्तक देख अपराधी तो भाग निकले, लेकिन पुलिस ने वहां से भारी मात्रा में चोरी के बर्तन, तीन टीवी, जिंदा कारतूस और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी व नकदी बरामद की। खेल यहीं से शुरू हुआ। आरोप है कि:

​बरामद किए गए सोना-चांदी और नकदी को जब्ती सूची (Seizure List) में दिखाया ही नहीं गया।

​नियमों की धज्जियां: छापेमारी के दौरान न तो वीडियोग्राफी कराई गई और न ही उच्चाधिकारियों (SDPO सदर-2) को बरामदगी की सही जानकारी दी गई।

​कार्रवाई: ग्रामीणों की शिकायत और शुरुआती जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद, मुजफ्फरपुर डीआईजी के आदेश पर एसपी ललित मोहन शर्मा ने थानाध्यक्ष संतोष कुमार और एसआई सुमन जी झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन हाजिर कर दिया है।

गया में तो हद हो गई: कूरियर बॉय से सोना लूटने में थानेदार गया जेल

​खाकी को शर्मसार करने वाला यह इकलौता मामला नहीं है। गया जी रेल थाने में तो पुलिस ने डकैतों जैसा व्यवहार किया। कोलकाता से कानपुर सोना ले जा रहे एक कूरियर बॉय से जीआरपी के जवानों ने जांच के बहाने करीब एक किलो सोने के तीन बिस्कुट छीन लिए। पीड़ित के साथ मारपीट की गई और उसे चलती ट्रेन से उतार दिया गया।

​तकनीकी साक्ष्यों (CDR और टावर लोकेशन) के आधार पर जब जांच हुई, तो तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की संलिप्तता पाई गई। पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए थानाध्यक्ष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और चार सिपाहियों को निलंबित कर दिया है।

सिस्टम के 'दीमक' और कड़ा प्रहार

​लालगंज थानाध्यक्ष संतोष कुमार का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी एक महिला के साथ ठगी और शोषण के मामले में उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे, लेकिन तब कार्रवाई में ढिलाई बरती गई। शायद उसी ढिलाई का नतीजा था कि पुलिस के हौसले इतने बढ़ गए कि उन्होंने मालखाने में जमा होने वाले सामान पर ही हाथ साफ कर दिया।

​"वर्दी का मतलब सेवा है, लूट नहीं"

बिहार पुलिस मुख्यालय ने इन घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है। डीजी (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने साफ कर दिया है कि पुलिस को 'भक्षक' बनने की इजाजत नहीं दी जाएगी और दोषी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसकी जगह जेल की सलाखों के पीछे होगी। इन घटनाओं ने आम जनता के बीच पुलिस की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है। मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्दी की आड़ में अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

​मुख्य बिंदु:

​निलंबन: संतोष कुमार (थानाध्यक्ष) और सुमन जी झा (SI)

​आरोप: चोरी के सामान से जेवर और नकदी की हेराफेरी।

​पिछला रिकॉर्ड: लालगंज थानाध्यक्ष पर पहले भी एक महिला के शोषण और ठगी के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप लग चुके थे।

​निष्कर्ष: ​पुलिस का काम अपराध रोकना है, न कि अपराध में हिस्सेदारी करना। लालगंज और गया की इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि विभाग के भीतर कुछ 'काली भेड़ें' पूरी व्यवस्था को प्रदूषित कर रही हैं। हालांकि, विभाग द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई एक उम्मीद जगाती है कि कानून सबके लिए बराबर है।

​आपकी राय: क्या आपको लगता है कि सिर्फ निलंबन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए काफी है या इन भ्रष्ट अधिकारियों पर और भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए

पुलिस महकमे में बढ़ती इस तरह की आपराधिक प्रवृत्तियों को रोकने के लिए आपकी दृष्टि में क्या उपाय किए जाने चाहिए? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य साझा करें।

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​​बिहार पुलिस न्यूज़ (Bihar Police News)

​लालगंज थानाध्यक्ष निलंबित (Lalganj SHO Suspended)

​वैशाली पुलिस चोरी कांड (Vaishali Police Theft Case)

​भ्रष्ट पुलिस अधिकारी (Corrupt Police Officers Bihar)

​गया जीआरपी लूटकांड (Gaya GRP Gold Loot Case)

​पुलिस रक्षक या भक्षक (Police: Protector or Predator)

​संतोष कुमार थानाध्यक्ष लालगंज (Santosh Kumar SHO Lalganj)

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