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| शोले में कैदी और जेलर का खेल |
नहीं रहे अंग्रेज जमाने के जेलर
असरानी | British-era jailer Asrani is no moreअंग्रेज जमाने के जेलर नहीं रहे (Nahin rahe angrej jamaane ke jelar asaraanee)। मशहूर कॉमेडियन और एक्टर असरानी का 84 वर्ष का आयु में निधन हो गया। वो पिछले सप्ताह से अस्पताल में थे।
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| हंसते-हंसाते हुए विदा |
400 से अधिक फिल्मों में किया काम
बॉलीवुड के हास्य कलाकार असरानी का पूरा नाम गोवर्धन असरानी था। पहली जनवरी 1941 को जयपुर में जन्मे असरानी ने 1960 के दशक से अपने करियर की शुरुआत की और 400 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनका अनोखा अंदाज उन्हें बॉलीवुड का बेमिसाल सितारा बनाता है। उन्होंने फिल्म शोले में बेहतरीन जेलर की भूमिका निभाई थी। उन्होंने शोले' में अपने आप को 'अंग्रेज़ों के जमाने का जेलर' कहा था। उनके कहने का अंदाज, आधे इधर जाओ और आधे उधर बचा सो मेरे पीछे, आज भी गुदगुदी प्रदान करता है।
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| कैदियों की गिनती करते अंग्रेज जमाने के जेलर |
फेंफड़ों में भर गया था पानी
बॉलीवुड अभिनेता असरानी के मैनेजर बाबू भाई थीबा ने पत्रकारों को बताया की असरानी पिछले चार दिनों से अस्पताल में भारती थे। उनके फेफड़ों में पानी भर गया था ।परिवार के लोगों ने असरानी का अंतिम संस्कार सांता क्रूज़ के शांति नगर स्थित श्मशान में किया। निधन की खबर सामने आने पर सोशल मीडिया पर शोक संवेदनाएं जारी की गई ।
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| अलविदा गोवर्धन आसरानी |
मौत को तमाशा नहीं बनाना चाहते थे
उनकी पत्नी ने बताया की असरानी ने उन्हें सलाह दी थी कि मेरी मौत के बाद हंगामा न हो । जब अंतिम संस्कार हो जाए तभी ही आम लोगों को मेरे निधन के बारे में बताया जाए । यही कारण रहा कि अंतिम संस्कार में केवल उनके परिवार के लोग ही मौजूद थे । मैनेजर ने बताया कि अंतिम संस्कार के समय लगभग 20 आदमी पहुंचे थे । बॉलीवुड इंडस्ट्री में भी इसकी खबर नहीं दी गई । शोले के अलावा अभिमान, छोटी सी बात और भूलभुलैया में उन्होंने स्मरणीय भूमिका निभाई थी।
तरुण कुमार कंचन
फोटो सोशल मीडिया के साभार
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