google.com, pub-9395330529861986, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Kanchanwani कंचनवाणी: तेजप्रताप

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Sunday, 16 November 2025

Bihar Politics : तेजस्वी सपने में लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ, बाबा सुनाएंगे कथा | Tejashwi will take oath as Chief Minister in his dream, Baba will narrate the story

 


Following the Rashtriya Janata Dal (RJD)'s crushing defeat in the 2025 Bihar Assembly elections, the party is facing a deepening crisis. Leader of the Opposition Tejashwi Yadav continues to face attacks, attacks, and infighting, exposing the discord within the RJD.

राजद में भी मचा है 'घमासान': तेजस्वी पर शिवानंद तिवारी का हमला और तेज प्रताप का 'जयचंदों' को दफनाने का ऐलान

​बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Elections 2025) में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर भी संकट गहराता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर आघात, वार और प्रहार लगातार जारी हैं, जिससे राजद में कलह खुलकर सामने आ गई है।

​🔥 शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwary) का तंज:

                    " लालू धृतराष्ट्र की तरह... तेजस्वी के लिए सिंहासन गर्म कर रहे "

​


राजद के वरिष्ठ नेता और लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले शिवानंद तिवारी (जिन्हें लालू 'बाबा' कहते हैं) ने तेजस्वी यादव पर तीखा कटाक्ष किया है।

​सीएम पद पर तंज: तिवारी ने कहा कि तेजस्वी अब अपने सपने में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और लोगों को कथा सुनाएंगे।

​पार्टी से हटाने का आरोप: उन्होंने खुलासा किया कि तेजस्वी ने ही उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटाया और कार्यकारिणी में भी जगह नहीं दी।

​लालू प्रसाद पर वार: शिवानंद तिवारी ने लालू प्रसाद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह 'धृतराष्ट्र' की तरह अपने बेटे (तेजस्वी) के लिए राज सिंहासन गर्म कर रहे थे।

​पुरानी आकांक्षा का जिक्र: तिवारी ने याद दिलाया कि लालू की आकांक्षा कभी छोटी थी - वह सिर्फ रामलखन सिंह यादव जैसा नेता बनना चाहते थे। उन्होंने कटाक्ष किया कि लालू की यह इच्छा अब पूरी हो गई है, क्योंकि पूरे परिवार के जोर लगाने के बावजूद पार्टी के केवल 25 विधायक ही जीत पाए।

​'मुक्त' होने की बात: तिवारी ने कहा कि अब वह पार्टी की जिम्मेदारी से मुक्त होकर फुर्सत पा चुके हैं और अब कहानियां सुनाते रहेंगे।

 

​⚔️ रोहिणी आचार्य के अपमान पर भड़के तेज प्रताप,

                                                                        'जयचंदों' को दफनाने की धमकी

​


एक तरफ शिवानंद तिवारी के बयान से हड़कंप मचा है, वहीं दूसरी ओर, लालू प्रसाद के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव अपनी बहन रोहिणी आचार्य के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार से सदमे में हैं और उन्होंने खुलेआम बगावत कर दी है।

​तेज प्रताप का अल्टीमेटम: तेज प्रताप यादव ने पत्रकारों से कहा कि यदि उनके पिता (लालू प्रसाद) इजाजत दें, तो वह पार्टी के सभी "जयचंदों" को जमीन में दफन कर देंगे। उन्होंने तेजस्वी को चेतावनी दी कि रोहिणी उनकी बहन हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए था।

​रोहिणी को बड़ा पद: तेज प्रताप ने यह भी ऐलान किया कि वह जल्द ही रोहिणी दीदी से पार्टी के 'राष्ट्रीय संरक्षक' की जिम्मेदारी स्वीकार करने का अनुरोध करेंगे।

 

​😢 रोहिणी आचार्य का छलका दर्द:

                                        'गंदी किडनी' और मायके के बेटों को नसीहत

​


सिंगापुर उड़ान भरने से पहले रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को खूब खरी-खोटी सुनाई।

​'गंदी किडनी' का ताना: रोहिणी ने भावनात्मक पोस्ट में कहा कि उन्हें गाली देते हुए कहा गया कि वह 'गंदी' हैं और उन्होंने अपने पिता को अपनी 'गंदी किडनी' लगवा दी। उन पर किडनी देने के बदले करोड़ों रुपए लेने और टिकट लेने का भी आरोप लगाया गया।

​विवाहित बेटियों को संदेश: उन्होंने सभी शादीशुदा बेटियों और बहनों से भावुक अपील की कि "भूल कर भी अपने भगवान रूपी पिता को नहीं बचाएं" अगर मायके में कोई बेटा या भाई मौजूद हो। उन्होंने कहा कि बेटियों को सिर्फ अपने घर-परिवार, ससुराल, बच्चे और काम पर ध्यान देना चाहिए।

​बड़ा गुनाह: रोहिणी ने कहा कि उन्होंने अपने पिता को बचाने के लिए जो किया, उसे आज 'गंदा' बताया जा रहा है। उन्होंने माना कि अपने परिवार और बच्चों को न देखकर किडनी देना उनसे "बड़ा गुनाह" हो गया।

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Monday, 3 November 2025

Bihar Election 2025 : बिहार में चुनाव प्रचार का 'धुआंधार तमाशा' फोटो के साथ देखें | The 'smashing spectacle' of election campaign with photos

 





The first phase of the Bihar Assembly elections, scheduled for November 6, has reached its peak of drama, populism and political rhetoric in the final phase of campaigning.

  बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण, जिसका मतदान 6 नवंबर को होना है, अपने प्रचार के अंतिम दौर में नाटकीयता, लोकलुभावनवाद और राजनीतिक जुमलों की चरम सीमा तक पहुँच गया है। 24 घंटे में चुनाव प्रचार भी बंद होने वाला है। प्रमुख राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, और इस दौरान नेताओं के बयानों और हरकतों ने चुनाव को एक 'धुआंधार तमाशे' (dhuandhar Tamasha) में बदल दिया है। इस चरण में, पारंपरिक रैलियों के साथ-साथ नेताओं का असामान्य व्यवहार भी चर्चा का विषय बना रहा, जिसने चुनावी माहौल को गरमा दिया है।

 केंद्रीय नेतृत्व का मेगा शो: मोदी और शाह की आक्रामकता


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में चुनावी अभियान को धार दी। पटना में उनका भव्य रोड शो केंद्र में रहा। यह रोड शो न केवल शक्ति प्रदर्शन था, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश थी कि भाजपा और एनडीए गठबंधन राज्य की सत्ता में वापसी के लिए प्रतिबद्ध हैं। रोड शो में उमड़ी भीड़ ने यह दर्शाया कि मोदी का करिश्मा अभी भी बरकरार है। उनकी रैलियों में विकास, परिवारवाद पर हमला, और जंगलराज की वापसी के डर जैसे मुद्दे हावी रहे।

रविवार को देर शाम पटना में रोड शो के दौरान सड़क
 पर भव्य स्वागत और लोक लुभावन सड़क की सजावट


पटना में रोड शो के दौरान उत्साहित लोग, जो यह बता रहा है कि मोदी का जादू अब भी जनता के सिर पर चढ़ा हुआ है। इस उत्साह को देखकर पटना के सारे एनडीए उम्मीदवार मुस्कुरा रहे हैं।

बिहार के वैशाली में सभा को संबोधित
 करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह



वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी रैलियों में आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने एनडीए सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और विपक्ष पर भ्रष्टाचार तथा जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। केंद्रीय नेताओं का यह मेगा शो एनडीए के लिए मतदाताओं को लामबंद करने का अंतिम प्रयास था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों को भी क्षेत्रीय समीकरणों के साथ जोड़ने की कोशिश की।




राहुल गांधी का 'मछली मारो' अभियान: लोक-संपर्क की नई शैली

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार में एक बिल्कुल ही अलग और अप्रत्याशित शैली अपनाई। उनका एक स्थानीय तालाब में कूदकर मछली पकड़ना या 'मछली मारना' एक ऐसा वीडियो बना, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। यह कृत्य, चाहे सहज हो या नियोजित, आम आदमी से जुड़ने और अपनी छवि को "सूट-बूट की सरकार" के विपरीत स्थापित करने का प्रयास था। राहुल गांधी की रैलियों का मुख्य फोकस बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर रहा। उन्होंने केंद्र और राज्य की एनडीए सरकारों को इन्हीं मुद्दों पर घेरा। उनकी 'मछली मारो' वाली छवि ने युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की, जो कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक से बाहर के हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी रविवार को बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के परना स्थित सोना चिमनी में आयोजित चुनावी सभा में भाषण के बाद राहुल गांधी ने स्थानीय युवाओं की गुजारिश पर पोखर में मछली पालन देखने का आग्रह स्वीकार किया। आम जन से सहज रूप में घुलते-मिलते हुए वे सड़क मार्ग से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित तालाब तक पहुंचे और लगभग 40 मिनट तक वहां समय बिताया। 


तालाब में उन्होंने नौकायन का आनंद लिया। मछलियां पकड़ीं और तैराकी करते भी नजर आए। उनका यह आम जनता वाला रूप देखकर मौके पर मौजूद ग्रामीण और युवा उत्साहित रहे।

 तेजप्रताप यादव का 'महाभारत': पौराणिक संदर्भों में सियासी जंग

राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप
 यादव अपने प्रत्याशी के समर्थन में सभा
 को संबोधित करते। इस दौरान उन्होंने जनता
 से श्रीकृष्ण के संदर्भों का उल्लेख किया।  

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव हमेशा की तरह अपने अनोखे अंदाज़ में नज़र आए। उन्होंने अपने भाषणों में अक्सर चुनावी लड़ाई को
'महाभारत' का रूप दिया। उनके पौराणिक कथाओं और पात्रों के संदर्भ, विशेषकर खुद को अर्जुन या अन्य शक्तिशाली पात्रों के रूप में पेश करना, उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।


एक फैशन शो के दौरान
 तेजप्रताप यादव

तेजप्रताप का यह आध्यात्मिक-सह-राजनीतिक ड्रामा आरजेडी के युवा समर्थकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने और उन्हें उत्साहित करने का एक तरीका था। हालांकि
, उनके बयान अक्सर विवादों में भी रहे, जिसने पार्टी के लिए मीडिया कवरेज तो सुनिश्चित की, लेकिन चुनावी गंभीरता पर भी सवाल खड़े किए।




 तेजस्वी यादव का 'शपथ ग्रहण' ऐलान: अति-आत्मविश्वास या चुनावी चाल?

लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव, 
जिन्होंने गत लोकसभा चुनाव के दौरान
 नवरात्रि पर हिन्दू वोटरों को मछली
 खाकर दिखाया था।
 


महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी यादव ने प्रचार को एक नया आयाम दिया। उन्होंने न सिर्फ अपने पक्ष में मतदान की अपील की
, बल्कि खुलकर मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण की तिथि घोषित करके एक अति-आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। यह घोषणा एक चुनावी चाल के तौर पर देखी जा रही है, जिसका उद्देश्य महागठबंधन के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनाना और उनके समर्थकों में उत्साह भरना है।

तेजस्वी का प्रचार अभियान मुख्यतः 'नौकरी, नौकरी, नौकरी' के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने बिहार के युवाओं को सरकारी नौकरियों का वादा करके एक बड़ा दांव खेला। उनकी रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने महागठबंधन को एक मजबूत चुनौती के रूप में स्थापित किया है। उनके बयानों ने युवाओं और दलित-पिछड़े वर्ग को मुख्य रूप से आकर्षित किया है।


तेजस्वी यादव एक चुनावी सभा में प्रत्याशी के साथ। उन्होंने अपने चुनावी क्षेत्र राघोपुर में कहा
था कि आप विधायक नहीं मुख्यमंत्री चुन रहे हैं। 20 नवंबर को मुख्यमंत्री शपथ लेगा। फिर
 दारोगा साहब आपके सामनेकुर्सी छोड़ देंगे।

 

कुल मिलाकर: मुद्दों से ज़्यादा 'तमाशा'

पहले चरण का चुनाव प्रचार इस बात का गवाह है कि जनता के वास्तविक मुद्दों (बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा) के साथ-साथ नेताओं के निजी अंदाज़ और नाटकीयता ने भी एक बड़ी भूमिका निभाई है। एनडीए ने विकास, स्थिरता और राष्ट्रीय गौरव को अपनी पिच बनाया। महागठबंधन ने बदलाव, नौकरी और सामाजिक न्याय को अपना हथियार बनाया। लेकिन, रोड शो की चमक, तालाब में मछली पकड़ने का ड्रामा, महाभारत की कथाएँ और शपथ ग्रहण की तारीख़ों का ऐलान - इन सबने मिलकर इस चुनाव प्रचार को एक ऐसा 'तमाशा' बना दिया है, जिसमें दर्शक (मतदाता) अपनी-अपनी पसंद के नेता को देखने आए हैं, और अब निर्णायक घड़ी नज़दीक है।

6 नवंबर को तमाशे का परिणाम ईवीएम में कैद होगा

यह चुनाव प्रचार एक हाई-वोल्टेज ड्रामा था, जिसने बिहार की राजनीति को एक बार फिर देश के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब 6 नवंबर को मतदाता इस 'तमाशे' का परिणाम ईवीएम में कैद करेंगे।

- तरुण कुमार कंचन

सभी फोटो सोशल मीडिया से

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