"Stanford AI Report 2026: भारत ग्लोबल AI रेस में तीसरे स्थान पर पहुंचा, लेकिन स्कोर के मामले में अमेरिका से काफी पीछे। जानें क्यों भारत को इस साल चाहिए 10 लाख AI एक्सपर्ट्स और क्या है 'नंबर 1' बनने का असली रास्ता।"
Tarun Kumar Kanchan
India has taken a major
leap forward in the global race for artificial intelligence (AI). According to
Stanford University's latest "Global AI Vibrancy" report, India is
now the world's third-largest AI powerhouse.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में भारत ने एक बड़ी
छलांग लगाई है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ताजा 'ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी' रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा AI
पावरहाउस बन गया है। लेकिन इस चमकती
रैंकिंग के पीछे एक कड़वी हकीकत और बड़ी चुनौती भी छिपी है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की हालिया
रिपोर्ट ने भारत के सामने एक आईना रख दिया है। एक तरफ हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े AI
देश बनकर उभरे हैं,
जो गर्व का विषय है। लेकिन दूसरी तरफ,
स्कोर यह बताता है कि हम रेस में तो हैं,
लेकिन जीत से बहुत दूर।
रैंकिंग में नंबर 3, पर 'स्कोर' में फेल?
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत
भले ही पायदान के मामले में तीसरे नंबर पर हो, लेकिन अंकों के आधार पर हम टॉप लीडर
अमेरिका से कोसों दूर हैं।
· अमेरिका करीब 79%
(78.6) अंकों के साथ शीर्ष
पर है।
· चीन 36.95
अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है।
· भारत को मात्र 21.59
अंक मिले हैं।
देखा जाए तो तीसरे स्थान पर होने के
बावजूद भारत को तकनीकी रूप से 'पासिंग
मार्क्स' भी नहीं मिले हैं। यह
फासला दर्शाता है कि हमें अभी रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत काम करना बाकी
है। लेकिन, क्या इसका कोई
समाधान नहीं है? बिल्कुल
है, और वह समाधान 'एक
ठोस सामूहिक प्रयास' में
छिपा है।
इस साल 10 लाख AI प्रोफेशनल्स की भारी मांग
रैंकिंग में सुधार और इस तकनीक को बनाए
रखने के लिए भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'मैनपावर' की है। उद्योग विशेषज्ञों और सरकारी
अनुमानों के अनुसार, साल
2026 के अंत तक भारत को
लगभग 10 लाख
एआई प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग के क्षेत्र
में यह मांग अब तक के उच्चतम स्तर पर है। यदि भारत इस मांग को पूरा कर लेता है,
तो हमारा स्कोर आने वाले सालों में तेजी
से बढ़ सकता है। भारत
यदि इस साल 10 लाख AI प्रोफेशनल्स
को काम पर लगा लेता
है तो यह केवल रोजगार का आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारत का वह 'प्रयास' है
जो हमें 21 के स्कोर से उठाकर 50
के पार ले जा सकता है।
· अगर ये 10 लाख युवा केवल विदेशी कंपनियों के लिए 'कोडिंग' करेंगे, तो हम तीसरे नंबर पर ही रहेंगे।
· लेकिन अगर ये युवा
'स्वदेशी AI'
और 'डीप-टेक' पर काम करेंगे, तो हम स्कोर की खाई को पाट पाएंगे।
ये 'प्रयास' किन क्षेत्रों में जरूरी हैं?
भारत के पास डेटा का भंडार है, जो दुनिया के किसी देश के पास नहीं।
हमें बस इसका सही इस्तेमाल करना है:
1. शिक्षा और स्वास्थ्य: जहाँ AI के जरिए हम गांव-गांव तक बेहतरीन इलाज
और पढ़ाई पहुंचा सकें।
2. कृषि: जहाँ 21.59 का स्कोर मायने नहीं रखता, बल्कि किसान की फसल का सही दाम मायने
रखता है।
3. सॉवरेन AI: भारत को अपनी भाषाओं और अपनी संस्कृति
के अनुरूप अपना AI मॉडल
विकसित करना होगा।
AI का सबसे ज्यादा इस्तेमाल
भारत में AI का उपयोग अब केवल आईटी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामान्य नागरिकों के जीवन और बड़े उद्योगों का
हिस्सा बन चुका है। रिपोर्ट और बाजार के रुझानों के अनुसार, इन 4 क्षेत्रों में भारत सबसे आगे है:
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं (BFSI): भारत में करीब 90% बैंकों ने अपने AI बजट में वृद्धि की है। फ्रॉड डिटेक्शन (धोखाधड़ी
रोकने), चैटबॉट्स और क्रेडिट स्कोरिंग के
लिए AI का व्यापक उपयोग हो रहा है।
- स्वास्थ्य सेवा (Healthcare): दूरदराज के इलाकों में बीमारियों का
जल्द पता लगाने, मेडिकल स्कैन (MRI/X-ray) के विश्लेषण और 'टेलीमेडिसिन' में AI क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। अनुमान है कि 2035 तक यह क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था
में बड़ा योगदान देगा।
- कृषि (Agriculture): 'किसान ई-मित्र' और ड्रोन तकनीक के जरिए मिट्टी के
परीक्षण, मौसम के पूर्वानुमान और फसलों की
सेहत की निगरानी के लिए AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
रिटेल और ई-कॉमर्स: लगभग 71% खुदरा कंपनियां अब ग्राहकों के
अनुभव को बेहतर बनाने और सप्लाई चेन को मैनेज करने के लिए 'जेनरेटिव एआई' का सहारा ले रही
हैं।
भविष्य की संभावना और निवेश का सैलाब
इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका और चीन
के पास संसाधनों की अधिकता है, लेकिन भारत के पास 'जुगाड़ से लेकर इनोवेशन' तक की अद्वितीय क्षमता है। भले ही हमारा स्कोर अभी कम है, लेकिन दुनिया का भरोसा भारत पर अडिग है। Amazon
और Microsoft जैसे दिग्गजों ने भारत में कुल मिलाकर 50
अरब डॉलर से अधिक के निवेश का खाका तैयार किया है।
आने वाले साल भारत के लिए 'AI क्रांति' के वर्ष होने वाले हैं। विशेषज्ञों और सरकारी रिपोर्टों के
अनुसार, भविष्य की कुछ मुख्य संभावनाएं इस प्रकार
हैं:
- 10 लाख नौकरियों की मांग: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, साल 2026 तक भारत को 10 लाख AI प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। यह युवाओं के लिए
रोजगार के नए द्वार खोलेगा।
- सॉवरेन AI (Sovereign AI): भारत अपनी खुद की 'सॉवरेन AI' क्षमता विकसित करने पर काम कर रहा
है। इसका उद्देश्य भारत की क्षेत्रीय भाषाओं (Non-English data) पर आधारित AI मॉडल बनाना है, ताकि तकनीक गांव-गांव तक पहुंच सके।
- अर्थव्यवस्था को बूस्ट: अनुमान है कि 2035 तक AI भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.7 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त मूल्य जोड़ सकता है।
- ग्लोबल समिट 2026: फरवरी 2026 में भारत एक बड़े 'ग्लोबल एआई समिट' की मेजबानी करने जा रहा है, जहाँ दुनिया भर के दिग्गज भारत की
तकनीकी ताकत का लोहा मानेंगे।
हमारा संदेश :
"21.59 का स्कोर यह नहीं कहता कि हम कमजोर हैं,
यह कहता है कि अभी बहुत कुछ करना बाकी
है। 10 लाख युवाओं की फौज और
सही दिशा में किया गया एक ईमानदार प्रयास भारत को AI की दुनिया का 'विश्वगुरु' बना सकता है।"
अब समय है 'एक्शन' लेने का
रैंकिंग के आंकड़ों में उलझने के बजाय,
अब समय है 'एक्शन' लेने का। सरकार, कॉर्पोरेट और युवाओं को मिलकर एक ऐसा
ईकोसिस्टम बनाना होगा जहाँ भारत केवल AI का उपभोक्ता न रहे, बल्कि दुनिया को AI दिशा दिखाए। भारत के पास 'नंबर 3' से 'नंबर 1' बनने का मौका है, बशर्ते हम केवल एआई के इस्तेमाल (Usage)
तक सीमित न रहें, बल्कि इसके विकास (Research) में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाएं।
हकीकत का आईना
- GPU की भारी कमी : AI चलाने के लिए जिन शक्तिशाली चिप्स (GPUs) की जरूरत होती है, भारत उनके लिए पूरी तरह अमेरिका (Nvidia) पर निर्भर है। जब तक हमारे पास अपना
हार्डवेयर नहीं होगा, हम 21.59 के स्कोर से ऊपर नहीं उठ पाएंगे।
- ब्रेन ड्रेन (Brain Drain) : भारत के बेहतरीन AI दिमाग पढ़ाई के बाद अमेरिका या यूरोप चले जाते हैं। हम
टैलेंट पैदा तो कर रहे हैं, लेकिन उसका फायदा अमेरिका उठा रहा है, जिससे उसका स्कोर 79% पहुंच गया है।
- केवल 'सॉफ्टवेयर' पर निर्भरता : भारत की ताकत सर्विस सेक्टर है, लेकिन AI की असली जंग 'डीप टेक' और 'हार्डवेयर' में है, जहाँ फिलहाल कोई ठोस सोल्यूशन नजर नहीं आता।
"अगर भारत को केवल एक बड़ा बाजार (Market) बनकर रहना है, तो 21.59 का अंक काफी है। लेकिन अगर हमें 'पावरहाउस' बनना है, तो हमें 10 लाख प्रोफेशनल्स
को सिर्फ नौकरी देने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को
टक्कर देने वाले 'इंडियन एआई' बनाने के लिए तैयार करना होगा। वरना, रैंकिंग में तीसरा स्थान सिर्फ एक सांत्वना पुरस्कार बनकर
रह जाएगा।"
सीधा सवाल
"क्या आपको लगता है कि
भारत केवल विदेशी कंपनियों के लिए 'वर्कफोर्स'
बनकर रह जाएगा, या हम वाकई अपना खुद का Google या OpenAI जैसा कुछ बना पाएंगे? "
"10 लाख AI प्रोफेशनल्स की मांग! क्या हमारा
एजुकेशन सिस्टम इस रेस के लिए तैयार है? अगर आप एक छात्र हैं, तो क्या आपको लगता है कि आपको सही ट्रेनिंग मिल रही है?
"
अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
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