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Monday, 3 November 2025

Bihar Election 2025 : बिहार में चुनाव प्रचार का 'धुआंधार तमाशा' फोटो के साथ देखें | The 'smashing spectacle' of election campaign with photos

 





The first phase of the Bihar Assembly elections, scheduled for November 6, has reached its peak of drama, populism and political rhetoric in the final phase of campaigning.

  बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण, जिसका मतदान 6 नवंबर को होना है, अपने प्रचार के अंतिम दौर में नाटकीयता, लोकलुभावनवाद और राजनीतिक जुमलों की चरम सीमा तक पहुँच गया है। 24 घंटे में चुनाव प्रचार भी बंद होने वाला है। प्रमुख राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, और इस दौरान नेताओं के बयानों और हरकतों ने चुनाव को एक 'धुआंधार तमाशे' (dhuandhar Tamasha) में बदल दिया है। इस चरण में, पारंपरिक रैलियों के साथ-साथ नेताओं का असामान्य व्यवहार भी चर्चा का विषय बना रहा, जिसने चुनावी माहौल को गरमा दिया है।

 केंद्रीय नेतृत्व का मेगा शो: मोदी और शाह की आक्रामकता


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में चुनावी अभियान को धार दी। पटना में उनका भव्य रोड शो केंद्र में रहा। यह रोड शो न केवल शक्ति प्रदर्शन था, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश थी कि भाजपा और एनडीए गठबंधन राज्य की सत्ता में वापसी के लिए प्रतिबद्ध हैं। रोड शो में उमड़ी भीड़ ने यह दर्शाया कि मोदी का करिश्मा अभी भी बरकरार है। उनकी रैलियों में विकास, परिवारवाद पर हमला, और जंगलराज की वापसी के डर जैसे मुद्दे हावी रहे।

रविवार को देर शाम पटना में रोड शो के दौरान सड़क
 पर भव्य स्वागत और लोक लुभावन सड़क की सजावट


पटना में रोड शो के दौरान उत्साहित लोग, जो यह बता रहा है कि मोदी का जादू अब भी जनता के सिर पर चढ़ा हुआ है। इस उत्साह को देखकर पटना के सारे एनडीए उम्मीदवार मुस्कुरा रहे हैं।

बिहार के वैशाली में सभा को संबोधित
 करते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह



वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी रैलियों में आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने एनडीए सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और विपक्ष पर भ्रष्टाचार तथा जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। केंद्रीय नेताओं का यह मेगा शो एनडीए के लिए मतदाताओं को लामबंद करने का अंतिम प्रयास था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों को भी क्षेत्रीय समीकरणों के साथ जोड़ने की कोशिश की।




राहुल गांधी का 'मछली मारो' अभियान: लोक-संपर्क की नई शैली

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार में एक बिल्कुल ही अलग और अप्रत्याशित शैली अपनाई। उनका एक स्थानीय तालाब में कूदकर मछली पकड़ना या 'मछली मारना' एक ऐसा वीडियो बना, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। यह कृत्य, चाहे सहज हो या नियोजित, आम आदमी से जुड़ने और अपनी छवि को "सूट-बूट की सरकार" के विपरीत स्थापित करने का प्रयास था। राहुल गांधी की रैलियों का मुख्य फोकस बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर रहा। उन्होंने केंद्र और राज्य की एनडीए सरकारों को इन्हीं मुद्दों पर घेरा। उनकी 'मछली मारो' वाली छवि ने युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश की, जो कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक से बाहर के हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी रविवार को बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र के परना स्थित सोना चिमनी में आयोजित चुनावी सभा में भाषण के बाद राहुल गांधी ने स्थानीय युवाओं की गुजारिश पर पोखर में मछली पालन देखने का आग्रह स्वीकार किया। आम जन से सहज रूप में घुलते-मिलते हुए वे सड़क मार्ग से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित तालाब तक पहुंचे और लगभग 40 मिनट तक वहां समय बिताया। 


तालाब में उन्होंने नौकायन का आनंद लिया। मछलियां पकड़ीं और तैराकी करते भी नजर आए। उनका यह आम जनता वाला रूप देखकर मौके पर मौजूद ग्रामीण और युवा उत्साहित रहे।

 तेजप्रताप यादव का 'महाभारत': पौराणिक संदर्भों में सियासी जंग

राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप
 यादव अपने प्रत्याशी के समर्थन में सभा
 को संबोधित करते। इस दौरान उन्होंने जनता
 से श्रीकृष्ण के संदर्भों का उल्लेख किया।  

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव हमेशा की तरह अपने अनोखे अंदाज़ में नज़र आए। उन्होंने अपने भाषणों में अक्सर चुनावी लड़ाई को
'महाभारत' का रूप दिया। उनके पौराणिक कथाओं और पात्रों के संदर्भ, विशेषकर खुद को अर्जुन या अन्य शक्तिशाली पात्रों के रूप में पेश करना, उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।


एक फैशन शो के दौरान
 तेजप्रताप यादव

तेजप्रताप का यह आध्यात्मिक-सह-राजनीतिक ड्रामा आरजेडी के युवा समर्थकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने और उन्हें उत्साहित करने का एक तरीका था। हालांकि
, उनके बयान अक्सर विवादों में भी रहे, जिसने पार्टी के लिए मीडिया कवरेज तो सुनिश्चित की, लेकिन चुनावी गंभीरता पर भी सवाल खड़े किए।




 तेजस्वी यादव का 'शपथ ग्रहण' ऐलान: अति-आत्मविश्वास या चुनावी चाल?

लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव, 
जिन्होंने गत लोकसभा चुनाव के दौरान
 नवरात्रि पर हिन्दू वोटरों को मछली
 खाकर दिखाया था।
 


महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी यादव ने प्रचार को एक नया आयाम दिया। उन्होंने न सिर्फ अपने पक्ष में मतदान की अपील की
, बल्कि खुलकर मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण की तिथि घोषित करके एक अति-आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। यह घोषणा एक चुनावी चाल के तौर पर देखी जा रही है, जिसका उद्देश्य महागठबंधन के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनाना और उनके समर्थकों में उत्साह भरना है।

तेजस्वी का प्रचार अभियान मुख्यतः 'नौकरी, नौकरी, नौकरी' के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने बिहार के युवाओं को सरकारी नौकरियों का वादा करके एक बड़ा दांव खेला। उनकी रैलियों में उमड़ रही भीड़ ने महागठबंधन को एक मजबूत चुनौती के रूप में स्थापित किया है। उनके बयानों ने युवाओं और दलित-पिछड़े वर्ग को मुख्य रूप से आकर्षित किया है।


तेजस्वी यादव एक चुनावी सभा में प्रत्याशी के साथ। उन्होंने अपने चुनावी क्षेत्र राघोपुर में कहा
था कि आप विधायक नहीं मुख्यमंत्री चुन रहे हैं। 20 नवंबर को मुख्यमंत्री शपथ लेगा। फिर
 दारोगा साहब आपके सामनेकुर्सी छोड़ देंगे।

 

कुल मिलाकर: मुद्दों से ज़्यादा 'तमाशा'

पहले चरण का चुनाव प्रचार इस बात का गवाह है कि जनता के वास्तविक मुद्दों (बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा) के साथ-साथ नेताओं के निजी अंदाज़ और नाटकीयता ने भी एक बड़ी भूमिका निभाई है। एनडीए ने विकास, स्थिरता और राष्ट्रीय गौरव को अपनी पिच बनाया। महागठबंधन ने बदलाव, नौकरी और सामाजिक न्याय को अपना हथियार बनाया। लेकिन, रोड शो की चमक, तालाब में मछली पकड़ने का ड्रामा, महाभारत की कथाएँ और शपथ ग्रहण की तारीख़ों का ऐलान - इन सबने मिलकर इस चुनाव प्रचार को एक ऐसा 'तमाशा' बना दिया है, जिसमें दर्शक (मतदाता) अपनी-अपनी पसंद के नेता को देखने आए हैं, और अब निर्णायक घड़ी नज़दीक है।

6 नवंबर को तमाशे का परिणाम ईवीएम में कैद होगा

यह चुनाव प्रचार एक हाई-वोल्टेज ड्रामा था, जिसने बिहार की राजनीति को एक बार फिर देश के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब 6 नवंबर को मतदाता इस 'तमाशे' का परिणाम ईवीएम में कैद करेंगे।

- तरुण कुमार कंचन

सभी फोटो सोशल मीडिया से

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Saturday, 1 November 2025

Bihar Election 2025 : दुलारचंद यादव की हत्याकांड में बाहुबली अनंत सिंह गिरफ्तार | Bahubali Anant Singh arrested in Dularchand Yadav murder case


Former MLA Anant Singh, a powerful figure in the Dularchand Yadav murder case, was arrested late Saturday night. He is the JDU candidate from the Mokama constituency.

तीन दिनों से बिहार चुनाव प्रचार के दौरान सर्वाधिक चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह को शनिवार की देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। बाहुबली अनंत सिंह मोकामा सीट से जदयू के प्रत्याशी हैं। मोकामा के जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद हत्याकांड में अनंत सिंह के खिलाफ भदौर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मालूम हो कि दुलारचंद यादव का टाल इलाके में काफी दबदबा था।

बताया गया कि अनंत सिंह ने शनिवार को मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार किया था। इसके बाद वह बाढ़ में कारगिल बाजार स्थित अपने आवास पर चले गये थे। आधी रात में करीब पौने एक बजे पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा भारी पुलिस बल के साथ उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सोते हुए गिरफ्तार अनंत सिंह गिरफ्तार  
बताया गया कि जब पुलिस बल अनंत सिंह के घर पर दबिश दी तब वह सो रहे थे। समर्थकों के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें जगाया और साथ में चलने को कहा। इसके बाद अनंत सिंह तुरंत तैयार होकर पुलिस टीम के साथ चल दिये। सूचना है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें पटना लाया गया। वहां शुक्रवार को संभवत: उनसे पूछताछ की जायेगी। इसके बाद पुलिस न्यायिक हिरासत में भेजने पर विचार करेगी।

नामजद आरोपी हैं अनंत सिंह
दुलारचंद यादव की हत्या गुरुवार को तब कर दी गई थी, जब वे जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे। उसी दौरान अनंत सिंह का काफिला गुजर रहा था। इस दौरान दोनों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। हत्याकांड को लेकर तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक प्राथमिकी दुलारचंद के पोते नीरज ने दर्ज कराई है। उसमें अनंत सिंह, उनके दो भतीजे और दो अन्य समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया गया है। दूसरी प्राथमिकी अनंत सिंह के समर्थक जीतेंद्र कुमार ने दर्ज कराई है। एक प्राथमिकी पुलिस ने अज्ञात पर दर्ज की है। अनंत सिंह को गिरफ्तारी के लिए पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा खुद बाढ़ पहुंचे थे।

दुलारचंद यादव की प्रचार के दाैरान गुरुवार को मार डाला

मालूम हो कि मोकामा विधानसभा क्षेत्र के टाल इलाके में गुरुवार को चुनाव प्रचार के दौरान जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह और जनसुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों  के बीच हिंसक झड़प हो गई। घटना भदौर थाना क्षेत्र के खुशहाल चक के निकट हुई। इसमें जनसुराज पार्टी के समर्थक 65 वर्षीय दुलारचंद यादव (तारतर, घोसवरी) की मौत हो गई। उसी दिन देर रात दुलारचंद के पोते के बयान पर अनंत सिंह, उनके दो भतीजों रणवीर और कर्मवीर समेत पांच पर हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि अनंत सिंह के लोगों ने पहले गोली मारी और फिर गाड़ी चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी।
 
 पहले गोली मारी और फिर गाड़ी चढ़ाकर हत्या 
दुलारचंद के घर के बाहर जमा भीड़

स्थानीय लोगों ने बताया कि खुशहाल चक के निकट पीयूष गुरुवार दोपहर बाद करीब 3:30 बजे अपने सैकड़ों समर्थकों और दुलारचंद यादव के साथ प्रचार कर रहे थे। उसी रास्ते से अनंत सिंह का काफिला गुजर रहा था।  बताया जाता है कि दोनों पार्टी के समर्थकों के बीच गाली गलौज शुरू हो गई। बात बढ़ने पर ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया। बाद में गोली भी चली। लोगों के मुताबिक 10 से ज्यादा गोलियां चलाई गईं। एक गोली दुलारचंद यादव के पैर में लगी। बाद में उनपर कार चढ़ा दी गई जिससे उनकी मौत हो गई। पथराव में कई गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। मृतक के भतीजे रवि कुमार ने आरोप लगाया कि अनंत सिंह द्वारा पहले ही उन्हें धमकी दी जा रही थी। अनंत सिंह के 15-20 लोगों ने मिलकर पहले उनके चाचा को गोली मारी और फिर गाड़ी चढ़ाकर हत्या कर दी।

दुलारचंद पूर्व में अपराधी रहे
उस दिन एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने कहा था कि मोकामा के तारतर गांव के पास दो पक्षों के बीच मारपीट हुई। वहां दो से तीन चार चक्का वाहन खड़ी पाई गई। उस वाहन का शीशा टूटा हुआ था। इसमें से एक वाहन में दुलारचंद यादव का शव पाया गया। दुलारचंद इस क्षेत्र के पूर्व में अपराधी रहे हैं। उन पर हत्या और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं।

अनंत सिंह का आरोप, राजद नेता सूरजभान की साजिश
जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह ने कहा था, जब चुनाव प्रचार कर लौट रहे थे तो हम आगे निकल गए। पीछे रह गई गाड़ियों को जनसुराज समर्थकों ने घेर लिया और ईंट पत्थर से हमला कर दिया था। अनंत सिंह ने इसे राजद नेता सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। हालांकि सूरजभान सिंह ने अनंत सिंह के आरोप पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया था।

तरुण कुमार कंचन 


Friday, 31 October 2025

Bihar Election 2025 | राजग का घोषणा पत्र जारी, राजद ने कहा विकास में शून्य | NDA's manifesto released, RJD says there is zero development

 



The NDA has promised 10 million jobs in its manifesto. Women will receive financial assistance of up to 2 lakh rupees. Furthermore, the goal is to make 10 million women Lakhpati Didi. Free education for the poor has also been promised. Sita's birthplace will be developed as Sitapuram. Metro services will be launched in four cities.

 बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) के लिए एनडीए ने शुक्रवार सुबह अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया। इसके पहले मंगलवार को ही इंडिया महागठबंधन ने बिहार का तेजस्वी प्रण के नाम से घोषणा पत्र जारी किया था। अब दोनों खेमों के महारथी अपने अस्त्र - शस्त्र के मैदान में कूद पड़े हैं। जनता के लिए जाल भी फेंका जा चुका है। दोनों के घोषणा पत्र अपने अपने तरीके से लोगों को लुभा रहे हैं।

आज पटना स्थित एक होटल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए NDA) का घोषणा पत्र जारी करने के दौरान  केंद्रीय मंत्री भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार,  केंद्रीय मंत्री हम (एस) के संरक्षक जीतन राम मांझी,  लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान, आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा मौजूद थे। बाद में घोषणा पत्र को बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पढ़कर पत्रकारों से बात की।  इसमें भाजपा, जदयू, लाजपा (रामविलास),  हम और आरएलएम के शीर्ष नेताओं ने साझा रूप से अपने चुनावी वादों का ऐलान कर दिया। इसमें विकासशील बिहार का एक रोडमैप तैयार किया गया है। इस घोषणापत्र में युवा, महिला, किसान, पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग और गरीब जनता के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस किया गया है, मगर सरकारी कर्मियों, उनके पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के तहत वृद्धावस्था पेंशन को लेकर को उल्लेखनीय बात नहीं की गई है। हालांकि जनता की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है।

1. युवा के लिए घोषणाएं

एनडीए के घोषणा पत्र में कहा गया है एक करोड़ सरकारी नौकरी और रोजगार दिया जाएगा। बिहार के युवाओं को दक्ष बनाया जाएगा। इसके लिए कौशल जनगणना करके उनके कौशल आधारित रोजगार प्रदान किए जाएंगे। युवा को कौशल बनाने के लिए बिहार के हर जिले में मेगा स्किल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे बिहार को ग्लोबल स्केलिंग सेंटर के रूप में स्थापित किया जाएगा।

 2. महिला को समृद्ध बनाने की दिशा में काम

राजग यानी एनडीए का घोषणा पत्र में बिहार की आधी आबादी पर विशेष ध्यान दिया गया है। पिछले चुनाव में यही वोट बैंक एनडीए का मार्ग प्रशस्त किया था। उसका पूरा ख्याल रखा गया है। घोषणा पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दो लाख रुपए तक की सहायता राशि दी जाएगी। महिला मिशन करोड़पति के माध्यम से चिह्नित महिला उद्यमियों को करोड़पति बनने की दिशा में काम किया जाएगा।  एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जाएगा।

 

 3. पिछड़ों और अति पिछड़ों पर नजर

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने पाने घोषणा पत्र  में ऐलान किया है कि साथ अति पिछड़ा वर्ग के विभिन्न व्यावसायिक समूहों को 10 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। इसके साथ सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा,  जो अति पिछड़ा वर्ग की विभिन्न जातियों के सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करके उनके सशक्तिकरण के लिए न्यायोचित कदम उठाने हेतु सरकार को सुझाव देगी। उस पर सरकार काम करेगी।

 4. किसानों के लिए योजनाएं

बिहार के हर किसान का सम्मान और हर फसल का सही दाम के नारे के साथ को लुभाने की कोशिश की गई है। घोषणा पत्र में कहा गया है कि कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि की शुरुआत की जाएगी।  इसके तहत किसानों को प्रतिवर्ष तीन हजार रुपए और  साल भर में ₹9000 दिया जाएगा। इसी तरह एग्रो इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास के लिए एक लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह हुई कि पंचायत स्तर पर ही सभी प्रमुख फसलों जैसे धान, गेहूं, दलहन, मक्का आदि की एमएसपी पर खरीद की जाएगी । मत्स्य-दुग्ध मिशन योजना से प्रत्येक मत्स्य पालक को लाभ दिया जाएगा। बिहार दुग्ध मिशन की शुरुआत करके हर प्रखंड स्तर पर चिलिंग की व्यवस्था  की जाएगी। फूड प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किया जाएंगे।  बिहार में कुल पांच मेगा फूड पार्क स्थापित किए जाएंगे और कृषि निर्यात को दोगुना किया जाएगा। एनडीए के घोषणा पत्र  में 2030 तक दलहन उत्पादन में बिहार आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तय किया गया है।

  5. इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

New Ganga Bridge Begusarai
बिहार में 7 एक्सप्रेस- वे बनाए जाने की घोषणा की गई है। कुछ ऐसी घोषणाएं भी समाहित की गई है जो केंद्र के स्तर से संभव हो सकता है।कहा गया है कि बिहार में 36 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक का आधुनिकीकरण किया जाएगा।अमृत भारत एक्सप्रेस एवं नमो रैपिड रेल सेवा का विस्तार किया जाएगा। बिहार के चार नए शहरों में मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी । साथ ही एक ऐसी घोषणा की गई है जिसकी बात हमेशा होती है। आधुनिक शहरी विकास एवं कनेक्टिविटी उत्तरोत्तर उच्च किया जाएगा। न्यू पटना में ग्रीन फील्ड शहर और प्रमुख शहरों में सैटलाइट टाउनशिप विकसित की जाएगी। 

6. सीतापुरम की स्थापना

मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी सीतापुरम के रूप में विकसित किया जाएगा। मां जानकी के मंदिर को अगले 5 सालों में पूरा किया जाएगा। पटना के समीप ग्रीन फील्ड अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। बिहार के 10 नए शहरों से घरेलू उड़ाने शुरू की जाएगी ।

 


7. औद्योगिक विकास के सपने

एनडीए के घोषणा पत्र में औद्योगिक क्रांति की गारंटी को लेकर न्यू एज इकोनामी के रूप में विकसित किया जाएगा ।  यह बताया गया कि न्यू एज इकोनॉमी के तहत 50 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित किया जाएगा। विकसित बिहार औद्योगिक मिशन के अंतर्गत एक लाख करोड़ के निवेश से औद्योगिक क्रांति लाने की बात कही गई है। इसके लिए विकसित बिहार इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट प्लान बनाया जाएगा। प्रत्येक जिले में  मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और 10 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे । 

 8. रोटी व मकान के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा का वादा

 

बिहार के गरीबों को मुक्त राशन की सुविधा मिलती रहेगी। हर परिवार को 125 यूनिट मुक्त बिजली की सुविधा जारी मिलती रहेगी। बिहार के लोगों को 5 लाख तक का मुफ्त  इलाज होगा और 50 लाख नए पक्के मकान बनाए जाएंगे। प्राथमिक से लेकर उच्चतर शिक्षा मुफ्त में मिलेगी।

 मनोज झा ने विकास को शून्य अंक दिया

घोषणा पत्र जारी होने के साथ एनडीए और इंडिया महागठबंधन के नेताओं की प्रतिक्रिया भी आने लगी। एनडीए के संयुक्त घोषणा पत्र पर राजद के नेता मनोज कुमार झा ने कहा, यह दबाव जारी घोषणा पत्र है। हमने (इंडिया महागठबंधन) समय से पहले घोषणा पत्र जारी कर दिया। लोगों में इसका आकर्षण दिखा है। बिहार की जनता तेजस्वी यादव को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं । रोजगार के मोर्चे पर प्रधानमंत्री और उनकी टीम का रिकॉर्ड शून्य है ।

 वहीं भाजपा के सांसद मनोज तिवारी ने कहा की एनडीए विकास का ही नाम है और मेरा मानना है कि बिहार के लोगों को एनडीए के घोषणा पत्र को ध्यान से पढ़ना चाहिए। भाजपा जो कहती है,  एनडीए जो कहती है उसे जरूर करती है।  नीतीश के नेतृत्व में बिहार में प्रगति हुई है।

तरुण कुमार कंचन

Wednesday, 29 October 2025

Bihar Election 2025 : बिहार का तेजस्वी प्रण पर भाजपा का विज्ञापन वार | BJP's advertisement war on Bihar's Tejashwi's pledge


 

The BJP has launched an advertising attack on Tejashwi's pledge to form Bihar. Releasing the India Mahagathbandhan (INDIA Alliance) manifesto, Tejashwi said, "We will not only build a government, we will build a new Bihar. We don't make broken promises; we will fulfill what we have promised."

बिहार का तेजस्वी प्रण (Bihar ka Tejaswi Pran) पर भाजपा ने विज्ञापन वार किया है ।तेजस्वी ने इंडिया महागठबंधन का घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा- हम सरकार ही नहीं, नया बिहार बनाएंगे। हम टूटे-फूटे वादे नहीं करते, जो कहा है उसे पूरा करेंगे। कल यानी मंगलवार को इंडिया गठबंधन की ओर से घोषणा पत्र जारी किया गया। इस घोषणा पत्र को अक्षरशः लागू किया जाए, तो वास्तव में रामराज आ जाएगा। महागठबंधन के इन लोक लुभावने वादों से पूरा एनडीए खेमा  ही बिल- बिला गया है।

तेजस्वी ने दिखाया अच्छे दिनों के मानचित्र

इंडिया महागठबंधन का घोषणापत्र जारी करते
राजद नेता तेजस्वी यादव, माले के दीपंकर

इंडिया गठबंधन की ओर से राजद के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने इंडिया महागठबंधन का घोषणा पत्र जारी कर ऐसी सुविधा बिहार के आवाम को देने की घोषणा की कि एक बार लगने लगा अब बिहारवासियों के अच्छे दिन आ रहे हैं ।  घोषणा पत्र में कहां गया कि हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देंगे। एक दिसंबर से महिलाओं को हर महीने ढाई हजार रुपए मिलेंगे। मालूम हो कि सरकार बनने के एक पखवाड़े में ही इतना बड़ा फैसला लेने की घोषणा की है, जो आधी आबादी है। इस वोट बैंक पर अब तक नीतीश कुमार का राज है।

सबके हाथ में अशर्फी की आस

 इंडिया महागठबंधन की ओर से  घोषणाओं का ऐसा पिटारा खुला कि सब के हाथ में अशर्फी आने की उम्मीद बढ़ गई है। संविदाकर्मी और जीविका समन्वयक खुशी से झूम उठे। संविदाकर्मी और जीविका समन्वयक को स्थाई करने का वादा किया। इसके साथ हर परिवार को 200 यूनिट तक मुक्त बिजली की सुविधा देने की बात कही। ऐसा लग रहा है कि हर घर चमचमा उठा है। अभी चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले ही नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बिहार के हर परिवार को 125 यूनिट बिजली फ्री में दे दी है। इसी को तेजस्वी यादव 200 यूनिट करने की बात कही।

बिहार में बहार के सपने

अभी चुनाव की जो घोषणा हुई उससे ऐसा लग रहा है कि वास्तव में  बिहार में बहार आने वाली है।  इसके सपने नीतीश कुमार ने दिखाए थे। अब नीतीश कुमार घूम घूम कर बहार का नजारा दिखा रहे है। मुख्यमंत्री नीतीश अपने किए हुए कार्यों का पिटारा लोगों को दिखा रहे हैं और बिहार की जनता को सावधान कर  रहे हैं कि इंडिया गठबंधन के भ्रामक घोषणाओं से सतर्क रहें । इस दौरान आगे काम करने के की सूची भी अपने भाषण में लोगों को थमा रहे हैं । उनकी मुख्य घोषणा है, अगले 5 साल में बिहार में एक करोड़ नौकरी - रोजगार देंगे। वह यह बात करना भूल नहीं रहे हैं कि पिछले 5 साल में 10 लाख युवाओं को नौकरी और 40 लाख लोगों को रोजगार दिया जा चुका है।

2005 से पहले कुछ हुआ था जी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
हर संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता को 2005 से पहले के बिहार की याद दिलाना नहीं भूलते हैं । वह कहते हैं, 1990 से 2005 के बीच बिहार में कुछ हुआ था जी। अशिक्षा और पलायन हमारी नीति बन गई थी। बिहार में जंगलराज था। उसके बाद कोर्ट में चल रहे जॉब के बदले जमीन का मामला भी उठते रहते हैं । नीतीश कुमार ने तेजस्वी के घोषणा पत्र के बाद कहा कि उनके माता-पिता 15 वर्षों तक बिहार में राज किया था । तब क्या हुआ था? हमेशा प्रश्न के लहजे में बात करते हैं और सवाल उठाते हैं । या यह कहें कि लालू- राबड़ी राज के काल को याद करा कर बिहार की जनता को डरा कर अपने पक्ष में मतदान करने की मांग कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से पहले बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों में ही रोजगार ढूंढना पड़ता था।  उन्हें बिहार के नाम पर अपमान झेलना पड़ता था। नौकरियों के लिए वैकेंसी ना के बराबर निकलती थी।  कुछ पदों पर बहाली निकलते भी थे तो सत्ता के संरक्षण में नौकरी का सौदा होता था। इसके बाद फिर जनता से करते हैं, क्या जी आज ऐसा होता है क्या?

व्यक्तिगत टारगेट पर तेजस्वी

इसी तरह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इंडिया महागठबंधन के घोषणा पत्र पर वार किया । उन्होंने तेजस्वी को सपने बेचने की कोशिश करने की बात कही। उन्होंने कहा बिहार के लोग जंगलराज के नायक को नहीं भूले हैं। उनसे बिहार की जनता को सावधान रहना है । इसी तरह केंद्रीय मंत्री लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में जंगलराज को लौटने नहीं देंगे । यह बात उन्होंने बख्तियारपुर में पार्टी के उम्मीदवार अरुण कुमार के प्रचार काफिले पर हमले के संदर्भ में कही थी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के साथ-साथ महागठबंधन पर निशाना साधते हैं। उन्होंने कहा, संभावित हार को देखते हुए तेजस्वी यादव घबराहट में हैं।

 तेजस्वी से उम्मीद

इंडिया महागठबंधन के समर्थकों का कहना है कि हम तेजस्वी के उपमुख्यमंत्री काल को देख रहे हैं । उन्होंने 17 महीने में रोजगार देने के लिए जितने कदम उठाए थे, वह हमें सुंदर भविष्य की ओर ले जाने के लिए काफी है। आज बुधवार सुबह की बात है। एमआईटी ग्राउंड में कुछ लोग टहल रहे थे और इंडिया महागठबंधन के घोषणा पत्र की चर्चा कर रहे थे। उनकी चर्चाओं में जो मुख्य मुद्दा थे, उस पर हम थोड़ी बात कर लेते हैं।  वे कह रहे थे कि सरकारी कर्मचारी,  बुजुर्ग के अलावा सोशल इंजीनियरिंग पर भी घोषणा पत्र में  फोकस किया गया है। सबसे बड़ी बात यह रही की इंडिया महागठबंधन की घोषणा पत्र में मूल रूप से बिहारी को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात कही गई है। इसमें उन्होंने सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन देने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹1500 करने के साथ हर साल उसमें ₹200 की वृद्धि करने का भी वादा किया गया है। राज्य में विधि व्यवस्था ठीक हो इसके लिए एसपी और थानेदार का कार्यकाल भी तय करने का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने सबसे बड़ा गेम वक्फ बोर्ड संशोधन कानून को लेकर खेला है। उन्होंने कहा वक्फ संशोधन विधेयक पर रोक लगाई जाएगी। इसका मुस्लिम कम्युनिटी से सीधे ताल्लुक है। खासकर मुसलमान की भावना को जोड़ने के लिए इस बात को उद्धृत किया गया है । तेजस्वी ने कहा कि मजदूर श्रमिकों की गणना होगी और प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार में एक समर्पित विभाग होगा । इसी तरह पंचायत प्रतिनिधियों का भत्ता दोगुना करने और पूर्व सदस्यों को पेंशन की सुविधा देने का वादा किया।

निचले तबकों की आर्थिक तरक्की

बिहार में निचले तबकों में रहने वाले नाई, कुम्हार,  बढ़ाई, लोहार,  मोची और  माली को 5 साल के लिए 5 लाख रुपए देने की बात कही।  दिव्यांगों के लिए भी विकास कार्यक्रम को लागू करने का ऐलान किया। भूमिहीनों को ग्रामीण क्षेत्र में पांच और शहरी इलाके में तीन डिसमिल जमीन देने का भी वादा किया।

एनडीए ने लिया विज्ञापन का सहारा

निश्चित रूप से इंडिया गठबंधन  का घोषणा पत्र बिहार में रामराज लागू होने जैसी स्थिति पैदा करने वाले घोषणाओं को देखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए ) में घबराहट पड़ा हो गई और आनन फानन में विज्ञापन से पलटवार किया है। उसने अपने विज्ञापन में अखबारों की सुर्खियों को कोलाज के रूप में प्रस्तुत किया है। उनमें कुछ कांग्रेस शासित राज्यों की सुर्खियां हां तो कुछ बिहार की पुरानी सुर्खियां।

हिमाचल और कर्नाटक की बात को रखा है, जिसमें कांग्रेस के वादे और कार्य की एक झलक दिखती है। हिमाचल में हजारों कर्मचारियों को सुक्खू सरकार ने दिया झटका , 10 से 20 K तक कम हो सकता है वेतन। उसी जगह दूसरी बात भी कही गई है कि हिमाचल में वेतन और पेंशन पर भी संकट आ गया है । कर्नाटक पर विज्ञापन में कहा गया है कि कर्नाटक सरकार ने चुनाव में किए थे 59 वादे 1 साल में केवल दो पूरे कर पाए ।

बिहार की सुर्खियों की झलक

एनडीए के इस विज्ञापन में बिहार में जंगल राज को दर्शाया गया है। उनमें जहानाबाद में उग्रवादियों ने 100 लोगों को भून डाला। बिहार में अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार 75 की हत्या । सिवान में एक ही परिवार के 12 लोगों को गोलियों से भूना । बारा गांव में 37 लोगों की सामूहिक हत्या।  हिंसा- लूट और बम के धमाकों के बीच चौथे चरण का पंचायत चुनाव संपन्न। समस्तीपुर में तीन व्यापारियों समेत चार का अपहरण,  पैसा दो डॉक्टरी की डिग्री लो। इस तरह बिहार के अपराधी के इतिहास और भ्रष्टाचार के हाल को बयान करते हुए दिखाया गया है । विज्ञापन में कोर्ट की टिप्पणी को भी रखा गया है जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था बिहार जंगलराज से भी बदतर। राज्य में 14 साल से प्राथमिक शिक्षा ध्वस्त।  सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि इस विज्ञापन कोलाज में गौतम - शिल्पी हत्याकांड का जिक्र नहीं है,  जो एक माह पहले तक जोर - शोर से उठाया जा रहा था। जब से जनसुराज का सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस मामले में भाजपा नेता और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम घसीटा है, तब से  एनडीए नेताओं के मुंह ताले लग गए हैं।

चाचा - भतीजा के बीच तलवारबाजी

दोनों खेमों के कर्ताधर्ता अपने तीर - तलवार लेकर मैदान में रंग जमा रहे हैं। चाचा - भतीजा का तमाशा जारी है। मदारी की  डुगडुगी बज रही है।  बिहार की पब्लिक न्यारी है। सबको बरोबर मौका दे रही है। सबको सुन रही है, पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है।  अब देखना है वार पलटवार में कौन जनता को अपने पक्ष में कर पाता है। इतना तो सच है कि इंडिया महागठबंधन को लालू-राबड़ी काल के कारनामे परेशान कर रहा है और सशंकित हैं, वहीं एनडीए को बिहार का तेजस्वी प्रण परेशानी में डाल रखा है।

धन्यवाद।

तरुण कुमार कंचन

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