google.com, pub-9395330529861986, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Kanchanwani कंचनवाणी: New Labor Codes: प्राइवेट नौकरी वालों की बल्ले-बल्ले या संघर्ष की नई राह? एक विस्तृत विश्लेषण | A positive outcome for private employers, or a new path to struggle? A detailed analysis.

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Tuesday, 25 November 2025

New Labor Codes: प्राइवेट नौकरी वालों की बल्ले-बल्ले या संघर्ष की नई राह? एक विस्तृत विश्लेषण | A positive outcome for private employers, or a new path to struggle? A detailed analysis.

💥Tarun Kumar Kanchan

After Diwali, the Modi government at the center made several announcements and took numerous steps to make life easier for the Indian public. Especially the work being done to improve individuals' financial well-being is certainly significant.

नए श्रम सुधार : 'अमृतकाल' या नई चुनौतियां

दीवाली के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने भारतीय जनता के जीवन को आसान करने के लिए कई घोषणाएं और कई काम किये। खासकर व्यक्ति के आर्थिक मजबूती को लेकर जो काम हो रह हैं, वे अलबत्ता है। जीएसटी स्लैब में सुधार और टैक्स कटौती के बाद, जहां एक तरफ 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की सुगबुगाहट से सरकारी कर्मचारी आशान्वित हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र (Private Sector) और असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) के लिए ऐतिहासिक बदलावों की नींव रख दी है।

यह रिपोर्ट चार नए श्रम संहिताओं (Labor Codes) का सूक्ष्म विश्लेषण करती है, जो जल्द ही भारत में लागू होने जा रहे हैं।


1. पृष्ठभूमि: सुधारों की आवश्यकता क्यों पड़ी? (Context & Rationale)

भारत में अब तक 29 केंद्रीय श्रम कानून अस्तित्व में थे। इनमें से कई ब्रिटिश काल के थे, जो वर्तमान डिजिटल युग और Global Supply Chain की मांगों के अनुरूप नहीं थे।

·       जटिलता (Complexity): कानूनों का यह जाल उद्योगों के लिए 'अनुपालन बोझ' (Compliance Burden) और 'इंस्पेक्टर राज' का कारण बना हुआ था।

·       संरचनात्मक सुधार: सरकार ने इन 29 कानूनों को समाप्त कर 4 व्यापक संहिताओं में समाहित (Amalgamated) किया है।

PCS छात्रों के लिए नोट: यह कदम 'Ease of Doing Business' और 'Universal Social Security' के दोहरे लक्ष्यों को साधने का प्रयास है।

ये 4 स्तंभ हैं:

1.     वेतन संहिता (Code on Wages), 2019

2.     औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), 2020

3.     सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020

4.     व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशाएं संहिता (OSH Code), 2020

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, ये सुधार 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक 'उत्पादक कार्यबल' (Productive Workforce) तैयार करेंगे।


2. कर्मचारी केंद्रित विश्लेषण: क्या लाभ मिलेंगे? (Benefit Analysis)

ब्लॉग पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनकी 'टेक होम सैलरी' और 'बचत' पर क्या असर पड़ेगा।

A. वेतन और ग्रेच्युटी का नया गणित (Salary & Gratuity Dynamics)

·       ग्रेच्युटी (Gratuity): पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए एक ही संस्था में 5 साल की सेवा अनिवार्य थी। नई संहिता के तहत इसे घटाकर 1 साल कर दिया गया है।

o   विश्लेषण: आज के कॉर्पोरेट कल्चर में कर्मचारी (विशेषकर युवा) जल्दी जॉब बदलते हैं। यह नियम सुनिश्चित करेगा कि उन्हें उनकी सेवा का फल मिले और 'जबरन रुकने' की बाध्यता खत्म हो।

·       वेतन भुगतान: कंपनियों को अगले महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य होगा।

·       पूर्ण एवं अंतिम भुगतान (Full & Final Settlement): इस्तीफा देने या हटाए जाने के 2 दिनों के भीतर कंपनी को सारा हिसाब चुकता करना होगा।

B. कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance)

·       ओवरटाइम (Overtime): यदि कोई कर्मचारी तय घंटों से 15 मिनट भी अधिक काम करता है, तो उसे ओवरटाइम माना जाएगा और इसके लिए दोगुना भुगतान (Double Payment) करना होगा।

·       छुट्टी का नकदीकरण (Leave Encashment): साल के अंत में बची हुई छुट्टियों के बदले पैसा देना अनिवार्य होगा।


3. सामाजिक समावेशन: गिग और प्रवासी मजदूर (Gig Economy & Inclusion)

यह इन सुधारों का सबसे प्रगतिशील हिस्सा है।

·       गिग वर्कर्स (Gig Workers): पहली बार ओला, उबर, ज़ोमैटो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को 'कानूनी पहचान' मिली है।

o   लाभ: वे अब PF, पेंशन और इंश्योरेंस के दायरे में आएंगे।

o   प्रभाव: यह अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (Informal Economy) को औपचारिक (Formal) बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

·       प्रवासी मजदूर (Migrant Workers): राशन और अन्य सुविधाओं की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित की जाएगी।

·       Contract Workers: अनुबंध पर काम करने वालों को भी नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएँ देनी होंगी, यदि वे समान कार्य कर रहे हैं।


4. स्वास्थ्य और सुरक्षा: एक अधिकार (Health & Safety Paradigm)

·       निवारक स्वास्थ्य सेवा (Preventive Care): 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए सालाना मुफ्त हेल्थ चेकअप नियोक्ता (Employer) की जिम्मेदारी होगी।

·       जोखिमपूर्ण क्षेत्र (Hazardous Sectors): माइनिंग, केमिकल, कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टर्स में काम करने वालों के लिए 100% हेल्थ कवरेज (ESIC) अनिवार्य होगा।

·       महिला सशक्तिकरण: नया लेबर कोड लैंगिक समानता (Gender Equality) पर जोर देता है:

·       समान अवसर: महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन और काम के अवसर मिलेंगे।

·       नाइट शिफ्ट (Night Shift): महिलाएं अब रात की पाली (Night Shift) शाम से सुबह 6 में काम कर सकेंगी, लेकिन शर्त यह है कि नियोक्ता (Employer) को उनकी सुरक्षा, आने-जाने की सुविधा और सहमति (Consent) सुनिश्चित करनी होगी।

Labor Force Participation Rate (LFPR) में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाएगा।


5. प्रशासनिक प्रतिमान बदलाव (Administrative Shift)

पुराने सिस्टम में 'लेबर इंस्पेक्टर' का डर दिखाया जाता था। नए सिस्टम में "इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर" (Inspector-cum-Facilitator) की भूमिका तय की गई है।

·       तात्पर्य: इनका काम केवल चालान काटना नहीं, बल्कि नियोक्ताओं को कानून पालन करने में मार्गदर्शन (Guidance) देना होगा। वेब-आधारित निरीक्षण प्रणाली से पारदर्शिता आएगी।


6. संघर्ष का बिंदु: विरोध क्यों हो रहा है? (Critical Analysis of Protests)

एक संतुलित रिपोर्ट के लिए विरोध के कारणों को समझना आवश्यक है। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (INTUC, AITUC, CITU आदि) ने 26 नवंबर को देशव्यापी विरोध का आह्वान किया है।

विरोध के प्रमुख तर्क:

1.     Hire and Fire की नीति: यूनियनों का आरोप है कि नए नियमों के तहत 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनियों को सरकार की अनुमति के बिना कर्मचारियों को निकालने (Retrenchment) और यूनिट बंद करने की छूट मिल गई है (पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों की थी)।

2.     हड़ताल का अधिकार सीमित: हड़ताल पर जाने के लिए अब 14 से 60 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य कर दिया गया है, जो यूनियनों की 'सौदा करने की शक्ति' (Bargaining Power) को कमजोर करता है।

3.     नियोक्ता समर्थक (Pro-Employer): आरोप है कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के नाम पर श्रमिकों के अधिकारों से समझौता किया गया है।


निष्कर्ष (Conclusion)

नए श्रम संहिताएं निश्चित रूप से भारतीय श्रम बाजार के आधुनिकीकरण की दिशा में एक साहसिक कदम हैं। निजी कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान क्रांतिकारी हैं। हालांकि, इन सुधारों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार 'लचीलेपन' (Flexibility) और 'श्रमिक सुरक्षा' (Worker Security) के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है।

विरोध के स्वर यह संकेत देते हैं कि कार्यान्वयन (Implementation) से पहले सरकार को विश्वास बहाली के लिए और अधिक संवाद की आवश्यकता हो सकती है।


तुलनात्मक विश्लेषण: पुराने कानून vs. नई श्रम संहिता

(Comparative Analysis: Old Laws vs. New Labor Codes)

विषय / मानदंड (Parameter)

पुरानी व्यवस्था (Old System)

नई श्रम संहिता (New Labor Codes)

कानूनों की संख्या

29 अलग-अलग और जटिल कानून।

4 एकीकृत संहिताएं (Codes) - सरलीकृत।

ग्रेच्युटी (Gratuity)

एक ही कंपनी में लगातार 5 साल काम करने पर ही मिलती थी।

अब 1 साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी का प्रावधान (फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए विशेष लाभ)।

वेतन की तारीख

वेतन मिलने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं थी (अक्सर देरी होती थी)।

अगले महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य।

पूर्ण भुगतान (F&F Settlement)

नौकरी छोड़ने पर हिसाब चुकता करने में महीनों लग जाते थे।

इस्तीफा देने या हटाए जाने के 2 दिनों के भीतर पूरा हिसाब करना होगा।

गिग वर्कर्स (Gig Workers)

ओला, उबर, ज़ोमैटो वर्कर्स के लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं था।

पहली बार कानूनी पहचान मिली। PF, इंश्योरेंस और पेंशन जैसी सोशल सिक्योरिटी में शामिल।

महिला कर्मचारी (Women)

नाइट शिफ्ट (Night Shift) में काम करने पर कई प्रतिबंध थे।

सभी शिफ्ट्स (Night Shift सहित) में काम करने की अनुमति (सुरक्षा और सहमति की शर्त पर)।

ओवरटाइम (Overtime)

नियम स्पष्ट नहीं थे, अक्सर भुगतान नहीं होता था।

तय घंटों से 15-30 मिनट ज्यादा काम करने पर भी दोगुना (Double) वेतन का प्रावधान।

स्वास्थ्य जांच (Health Checkup)

ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं था।

40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों का सालाना फ्री हेल्थ चेकअप अनिवार्य।

इंस्पेक्शन (Inspection)

'इंस्पेक्टर राज' - दंडात्मक कार्रवाई पर जोर।

'इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर' - मार्गदर्शन और ऑनलाइन पारदर्शी सिस्टम।

छंटनी के नियम (Layoffs)

100 से कम कर्मचारी वाली कंपनी बिना अनुमति छंटनी कर सकती थी।

अब 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनी सरकार की अनुमति के बिना छंटनी कर सकती है (ट्रेड यूनियनों के विरोध का मुख्य कारण)।

हड़ताल (Strike)

हड़ताल पर जाना अपेक्षाकृत आसान था।

हड़ताल से पहले 14 से 60 दिन का नोटिस देना अनिवार्य (नियम सख्त)।

"संक्षेप में कहें तो, नई व्यवस्था का झुकाव कर्मचारियों को सुरक्षा (Social Security) देने और कंपनियों को काम करने की आज़ादी (Flexibility) देने के बीच संतुलन बनाने पर है।"

PCS/Civil Services मुख्य परीक्षा प्रश्न अभ्यास

1.      "भारत में श्रम सुधारों की आवश्यकता का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें। क्या नवीन श्रम संहिताएं समावेशी विकास और औद्योगिक लचीलेपन के बीच संतुलन साधने में सक्षम हैं?"

2.     नवीन श्रम संहिताओं के मुख्य प्रावधानों का वर्णन करते हुए चर्चा करें कि ये भारत में गिग इकोनॉमी और औद्योगिक संबंधों को कैसे पुनर्परिभाषित करेंगे?

इस तरह के प्रशन भी पूछे जा सकते हैं।

1.     Focus on the biggest benefit

प्राइवेट कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: अब 5 नहीं, सिर्फ 1 साल में मिलेगी ग्रेच्युटी! क्या है मोदी सरकार का सबसे बड़ा श्रम सुधार?

2.     Focus on the scale and conflict

श्रम कानून में महाबदलाव: 29 पुराने नियम खत्म, जानिए किसे मिला सोशल सिक्योरिटी और क्यों भड़कीं ट्रेड यूनियन्स?

3.     Focus on the exam relevance and specific benefit

PCS स्पेशल: 'गिग वर्कर्स' की कानूनी पहचान और 400 मिलियन श्रमिकों की सुरक्षा - नए लेबर कोड का A to Z एनालिसिस।

4.     Focus on immediate, tangible benefits

ओवरटाइम पर डबल सैलरी और 40+ उम्र वालों को फ्री चेकअप! नए श्रम नियम लागू होने से पहले जान लें अपने 10 बड़े अधिकार।

क्विज़: नए श्रम सुधार (Quiz: New Labor Reforms)

अपने ज्ञान को परखें! (Test Your Knowledge)

Q1. केंद्र सरकार ने कितने पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों (Central Labor Laws) को समाप्त कर 4 नई श्रम संहिताएं (Labor Codes) बनाई हैं? A) 44 B) 29 C) 15 D) 35

Q2. नए नियमों के अनुसार, 'फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों' (Fixed Term Employees) के लिए ग्रेच्युटी (Gratuity) पाने की न्यूनतम समय सीमा (Minimum Eligibility Period) क्या प्रस्तावित है? A) 5 साल (Years) B) 3 साल (Years) C) 1 साल (Year) D) 2.5 साल (Years)

Q3. नई 'सामाजिक सुरक्षा संहिता' (Code on Social Security) के तहत, पहली बार किन वर्कर्स को कानूनी रूप से सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लाया गया है? A) सरकारी कर्मचारी (Government Employees) B) गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (Gig & Platform Workers) C) केवल फैक्ट्री वर्कर्स (Only Factory Workers) D) कृषि मजदूर (Agricultural Laborers)

Q4. नए सिस्टम में 'लेबर इंस्पेक्टर' (Labor Inspector) की भूमिका को बदलकर अब क्या नया पदनाम (Designation) दिया गया है? A) चीफ विजिलेंस ऑफिसर (Chief Vigilance Officer) B) इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर (Inspector-cum-Facilitator) C) लेबर सुपरवाइजर (Labor Supervisor) D) इंडस्ट्रियल ऑडिटर (Industrial Auditor)


सही उत्तर (Correct Answers):

  1. B) 29 (29 पुराने कानूनों को 4 कोड्स में मिलाया गया है)
  2. C) 1 साल (Year) (पहले यह सीमा 5 साल थी)
  3. B) गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे Zomato, Swiggy, Uber के कर्मचारी)
  4. B) इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर (इनका काम अब सजा देने से ज्यादा गाइडेंस देना होगा)

निष्कर्ष और आपकी राय (Conclusion & Your Opinion)

ये नए श्रम सुधार (Labor Reforms) भारत के वर्कफोर्स की तस्वीर बदलने वाले हैं। एक तरफ जहाँ प्राइवेट कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और हेल्थ सिक्योरिटी का तोहफा मिला है, वहीं दूसरी तरफ ट्रेड यूनियन इसे अधिकारों पर हमला बता रहे हैं। चाहे आप कॉरपोरेट जगत (Corporate World) में हों या सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों, इन बदलावों से अपडेट रहना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत है।

अब आपकी बारी है! (Now It's Your Turn!)

  1. अपना स्कोर बताएं (Share Your Score): ऊपर दिए गए क्विज़ में आपने कितने सवालों के सही जवाब दिए? कमेंट बॉक्स में अपना स्कोर (जैसे: 3/4 या 4/4) जरूर लिखें। हम देखना चाहते हैं कि हमारे पाठक कितने जागरूक (Aware) हैं।

1.     चर्चा करें (Discuss): क्या आपको लगता है कि 'गिग वर्कर्स' को सोशल सिक्योरिटी देना सरकार का सबसे बेहतरीन कदम है? या फिर आप ट्रेड यूनियनों की इस बात से सहमत हैं कि 'हायर एंड फायर' (Hire and Fire) से नौकरी का खतरा बढ़ जाएगा? अपनी राय कमेंट में दें।

  1. PCS/UPSC छात्रों के लिए: इस रिपोर्ट को Bookmark कर लें। यह टॉपिक आगामी मुख्य परीक्षा (Mains Exam) में GS Paper-3 (Economy & Labor Issues) के लिए 'Hot Topic' रहने वाला है।

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तरुण कुमार कंचन

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