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| अपने एक पेंटिंग के साथ एमएफ हुसैन |
Tarun Kumar kanchan
Famous painter M. F. Husain, who has been at the centre of controversies and debates, is back with a new debate as a museum named Lauh-o-Kalam has recently been inaugurated in his name in Doha, the capital of Qatar.
कतर के दोहा में खुले M.F.
Husain के नए म्यूज़ियम की
विस्तृत रिपोर्ट। कला, विवाद,
विवादित पेंटिंग्स, माधुरी दीक्षित कनेक्शन और उनकी पूरी
विरासत का विश्लेषण।
ऑडियो सुनें दो भागों में
इस मौके पर इस बात को भुलाया नहीं जा सकता कि
मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन को भारत ने वह सभी सम्मान दिया, जो अच्छे नागरिक को
दिया जा सकता है। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च भारतीय नागरिक सम्मान भी प्राप्त थे, जो उनके कला क्षेत्र में दिए गए योगदान का प्रमाण है, जिसे कला जगत हमेशा सम्मान देता रहा। फिर ऐसी कौन-सी पीड़ा थी जो भारत के
ही बहुसंख्यक आबादी हिन्दू की देवी-देवताओं को टारगेट करके अश्लील चित्र बना गया
था। हम आज एक बार फिर से उनकी मानसिकता का अवलोकन करेंगे, जो उनके जैसे सम्मानित
नागरिक के लिए अक्ष्यम था। पहले जानते हैं कि लौह-ओ-कलम क्या है?
लौह-ओ-कलम “Lauh-o-Kalam” म्यूज़ियम
हुसैन की दुनिया : बताया गया कि यह पारंपरिक म्यूजियम जैसा नहीं है। इसमें हर गैलरी हुसैन के एक उद्धरण से शुरू होती है। लंबे गलियारे, रंगीन दीवारें और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन हैं। ऐसा महसूस होता है कि आप खुद हुसैन की दुनिया में चल रहे हों। उनकी पुरानी चीजें जैसे पुराना भारतीय पासपोर्ट भी प्रदर्शित हैं। डिजाइनर मार्तंड खोसला ने हुसैन के स्केच को एक विचार माना और उससे एक पूरा नया आर्किटेक्चरल भाषा विकसित की। उन्होंने अरब इतिहास, इस्लामी संस्कृति और पुराने वैज्ञानिकों पर बड़े प्रोजेक्ट बनाए। गल्फ की धरती से प्रेरित होकर उन्होंने कतर की पेंटिंगें गर्म, मिट्टी जैसे रंगों में बनाई थी। वो भी यहां रखी गई हैं।
अलग-अलग गैलरी : म्यूजियम
में उनसे जुड़ी अलग-अगल गैलरी बनाई गई हैं। उनके जीवन से जुड़ी निजी कहानियां,
उनके ड्राइवर और दोस्तों से
इंटरव्यू और घोड़े व धार्मिक-ऐतिहासिक पेंटिंगें भी यहां देखने को मिलेंगी। पहली
मंजिल पर हुसैन के करीबी और महत्वपूर्ण फोटोग्राफर हबीब रहमान और पार्थिव शाह जैसे
कलाकारों की बड़ी-बड़ी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें लगी हैं।
सबसे मुख्य आकर्षण : हुसैन
ने घोड़ों और दूसरे चार-पैर वाले जानवरों को तेज, टूटे-फूटे और उर्जावान शैली
में कई पेंटिंग में दिखाया था। ऐसी ही एक पेंटिंग 'बैटल ऑफ बद्र'
भी है। अब इस पेंटिंग को भी
यहां लगाया गया है।
Lauh-o-Kalam
में विवादित चित्रों प्रदर्शन
एम.एफ. हुसैन (M.F. Husain) के कतर की राजधानी दोहा में खुले Lauh-o-Kalam नए म्यूजियम में, उन विवादित चित्रों को प्रदर्शित नहीं किया गया है जिनके कारण उन्हें भारत छोड़ना पड़ा था। यह म्यूजियम में मुख्य रूप से हुसैन के बाद के करियर और भारतीय सभ्यता पर उनके काम पर केंद्रित है, लेकिन इसमें उन विशिष्ट विवादास्पद पेंटिंग्स को शामिल नहीं किया गया है। म्यूजियम में 150 से अधिक कृतियाँ और वस्तुएँ हैं, जिन्हें दो मुख्य संग्रहों में बाँटा गया है।
1. भारत
से संबंधित कार्य: उनके जीवन के शुरुआती दशकों के दौरान भारत में
बनाए गए कला के काम।
2. अरब सभ्यता (Arab Civilisation) और अंतिम कार्य: उनके अंतिम वर्षों के दौरान दोहा में बनाए गए कार्य, जिसमें उनकी अधूरी 99 कृतियों की अरब सभ्यता श्रृंखला की 35 पेंटिंग शामिल हैं।
MF Husain विवाद: धर्म, अभिव्यक्ति और सामाजिक नाराज़गी
2025 में “Lauh-o-Kalam” म्यूज़ियम का उद्घाटन — जो
हुसैन की विरासत को पुनर्जीवित करता है।यह म्यूज़ियम एक प्रतीक है कि कैसे एक
विवादास्पद कलाकार का दृष्टिकोण और उसकी कलाकृतियाँ समय के साथ पुनर्मूल्यांकन (re-evaluation)
का विषय बन जाते हैं। हालांकि इससे भारत में भी बहस होगी — क्या
कलाकारों को उनकी “पूर्व विवादित” रचनाओं के लिए फिर से सम्मानित किया जाना चाहिए,
या उन आरोपों को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए?
यह सच है कि हिन्दूवादी इसे घोर पाप मानते हैं और उसे भूलाया नहीं जा सकता है।
आरोप लगाया कि हुसैन ने
देवी-देवताओं को sexual intercourse या जानवरों के साथ यौन सम्बन्ध में दर्शाया गया। उनके विवादित कार्यों के
बारे में थोड़ी सी बात होनी चाहिए।
भारत माता “Bharat Mata” (Mother India) — untitled painting
इस काम को आज आमतौर पर “Bharat Mata” (Mother India) कहा जाता है। कला-विश्लेषकों और नीलामी- रिपोर्टों के अनुसार यह 2004–2005 के आस-पास बना माना जाता है; हुसैन ने इसे 2004 में एक निजी कलेक्टर को बेचा था।
विवाद उजागर (campaign that triggered protests): इस
पेंटिंग का एक प्रचार/ऑनलाइन-नीलामी-आधारित विज्ञापन 2006
में दिखाई दिया, और उसके बाद व्यापक विरोध और कानूनी
शिकायतें दर्ज हों।
हुसैन के नग्न देवी-देवताओं
की पहली-सीरियस सार्वजनिक विरोध-घटनाओं में से एक 1996 के आसपास की है। उदाहरण के लिये उनकी नग्न सरस्वती छवियों
पर तब भी प्रतिक्रिया आई थी। यह विवाद 1990 के दशक में शुरू
हुईं संवेदनाओं का हिस्सा थी, जो 2000 में
और तीव्र हुईं।
महिला-घोड़े/जानवरों के साथ
जुड़ीं छवियाँ

हुसैन और माधुरी दीक्षित MF Husain and Madhuri Dixi
एम.एफ.
हुसैन और माधुरी दीक्षित के बीच का संबंध पर एक बड़ा मामला आया था जिसे प्रशंसक
की दीवानगी (Admiration) और कलात्मक प्रेरणा (Artistic
Inspiration) कहा गया था। इसे एक सकारात्मक और रचनात्मक
जुनून के रूप में देखा जाता है।
माधुरी दीक्षित विवाद से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
· प्रेरणा
(Muse): एम.एफ. हुसैन माधुरी दीक्षित की सुंदरता, नृत्य और अभिनय से बहुत प्रभावित थे और उन्हें अपनी प्रेरणा मानते
थे।
· पेंटिंग
और सीरीज : उन्होंने माधुरी दीक्षित पर केंद्रित पेंटिंग्स की एक पूरी सीरीज
बनाई। वे अपनी इन कृतियों पर "फ़िदा" (devoted) के रूप में हस्ताक्षर करते थे, जो उनके गहरे लगाव को दर्शाता था। हालांकि इस मामले पर विवाद भी हुआ था।
· फिल्म
देखना: हुसैन माधुरी की फिल्म 'हम आपके हैं कौन'
(1994) से इस कदर प्रभावित थे कि उन्होंने इस फिल्म को कथित
तौर पर 74 बार देखा था।
· फिल्म
निर्माण: माधुरी दीक्षित के प्रति अपने इसी जुनून को व्यक्त करने के लिए, हुसैन ने 85 साल की उम्र में वर्ष 2000 में 'गजगामिनी' नामक एक
फीचर फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया। यह फिल्म माधुरी को समर्पित एक सिनेमाई
श्रद्धांजलि थी, जिसमें माधुरी ने एक विचार (Idea)
के रूप में, विभिन्न ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक
किरदारों को निभाया था।
· व्यक्तिगत
मुलाक़ात: माधुरी के विवाह के बाद जब वह डेनवर में थीं, हुसैन उनसे मिलने भी गए थे, जहाँ उन्होंने माधुरी को
माँ के रूप में चित्रित करने की इच्छा व्यक्त की थी।
हुसैन पर आरोप था कि उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं को नग्न या प्रयोगात्मक शैली में चित्रित किया, जिससे कई धार्मिक समूहों की भावनाएँ आहत हुईं।
वर्षों तक वैधानिक मुकदमे, धमकियाँ, सार्वजनिक
विरोध और सुरक्षितता की चुनौतियों के कारण उन्होंने भारत छोड़ने का निर्णय लिया और
अंततः उन्हें आत्म-निर्वासन (self-exile) चुनना पड़ा। एम.एफ़. हुसैन
को भारत को 2006 में
छोड़ना पड़ा। क़तर में उन्हें नागरिकता दी गई, और अब वह वहीं
सम्मान के साथ स्मरण किए जाने लगे हैं। लेकिन पिछला विवाद पीछा नहीं छोड़ रहा है।
हिंदूवादी संगठनों का विरोध
एमएफ हुसैन की विवादित पेंटिंग्स पर सबसे मुखर विरोध करने वाले संगठनों में शिवसेना का नाम प्रमुखता से आता है, खासकर 1996 में विवाद बढ़ने के बाद।
- प्रमुख संगठन और
व्यक्ति:
- शिवसेना: शिवसेना ने इसका
सबसे अधिक विरोध किया, जिसके कारण हुसैन को धमकियाँ मिलीं
और बाद में उन्हें देश छोड़ना पड़ा।
- आर्य समाज और इसके कार्यकर्ता
ने भी कड़ा विरोध किया।
- तेजपाल सिंह धामा: आर्य समाज के एक कार्यकर्ता
और हैदराबाद के हिंदी दैनिक 'स्वतंत्र वार्ता' के पत्रकार।
- अमिता सचदेवा: हाल के मामलों में, दिल्ली
हाईकोर्ट की वकील अमिता सचदेवा ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई कि हुसैन की
पेंटिंग में हिंदू देवी-देवताओं का अपमानजनक/अश्लील चित्रण किया गया
है।
- विरोध का सार:
- विरोध करने वालों का
मुख्य कथन यह रहा है कि हुसैन ने हिंदू देवी-देवताओं (जैसे
हनुमान, गणेश, दुर्गा) और भारत
माता की ऐसी तस्वीरें बनाईं, जिनमें उन्हें आपत्तिजनक
या अश्लील तरीके से दर्शाया गया था।
- यह कृत्य धार्मिक
भावनाओं को आहत करने और हिंदू विरोधी होने का जानबूझकर किया गया प्रयास
है।
- अमिता सचदेवा की ओर
से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट मकरंद अडकर ने अदालत के सामने
कहा, "पेंटिंग में सनातन धर्म के सबसे पूजनीय देवता हनुमान और गणेश का
अपमान किया गया है। यह अश्लीलता है। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का
जानबूझकर प्रयास किया गया है।"
सुप्रीम कोर्ट का वर्जन
एमएफ हुसैन से जुड़े कई
कानूनी मामले भारत की विभिन्न अदालतों में चले।
- मुख्य मामला (2008):
- वर्ष 2008 में,
सुप्रीम कोर्ट ने हुसैन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के
आरोपों से जुड़े कई मामलों को खारिज कर दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा
था कि एक कलाकार को अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने की स्वतंत्रता है और
कला की अभिव्यक्ति को समाज के सबसे सहिष्णु (Tolerant) सदस्यों की नज़र से देखा जाना चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट के
जस्टिस एसबी सिन्हा और डीके जैन की पीठ ने कहा था कि कला की आलोचना, विरोध
और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन होना चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट का कथन
:
"पेंटिंग एक कलाकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा
है, और इसे उदारतापूर्वक देखा जाना चाहिए। केवल इसलिए कि कुछ
लोग आहत महसूस करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि अभिव्यक्ति
अवैध हो जाती है।"
- अन्य अदालती मामले:
- विभिन्न निचली
अदालतों में और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट में भी हुसैन की पेंटिंग्स से जुड़े
एफआईआर (FIR) की मांग को खारिज किया गया है, यह मानते हुए
कि आगे जांच की आवश्यकता नहीं है या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न है।
(हालांकि, हाल के कुछ मामलों में दिल्ली की निचली
अदालतों ने कुछ पेंटिंग्स को जब्त करने का आदेश दिया है)।
कलाप्रेमियों का
समर्थन
कला जगत और कला समीक्षकों
ने एम.एफ. हुसैन को ज़बरदस्त समर्थन दिया और विरोध को कला की स्वतंत्रता पर
हमला बताया।
- समर्थन का आधार:
- हुसैन एक विश्व-प्रसिद्ध
कलाकार थे और उन्हें "भारत का पिकासो" कहा जाता था।
- कलाप्रेमियों का
मानना था कि हुसैन ने अपनी पेंटिंग्स में भारतीय संस्कृति और पौराणिक
कथाओं को अपनी अनूठी शैली में चित्रित किया था, जिसमें
कोई दुर्भावना नहीं थी।
- उनके समर्थक मानते थे
कि कला को धार्मिक कट्टरता से बचाना चाहिए।
- हुसैन की घोषित मंशा भारत की ग्रामीण और
शहरी जीवन, उसकी विविधता और समावेशिता (Diversity and Inclusiveness) को अपनी कला के माध्यम से गौरवान्वित करना था। उन्होंने हिंदू धर्म
के त्यौहारी भावना से ओत-प्रोत होकर कलाकृतियाँ बनाईं।
- हुसैन हिंदू पौराणिक
कथाओं से परिचित थे—उनका जन्म पंढरपुर (एक तीर्थस्थल) में हुआ था। नग्न या
अर्ध-नग्न आकृतियाँ बनाना भारतीय कला और मूर्तिकला, जैसे कि मंदिरों की प्राचीन मूर्तियों
(उदाहरण के लिए खजुराहो) की एक लंबी परंपरा रही है। हुसैन ने इस परंपरा में
काम किया।
- कलाप्रेमी/बुद्धिजीवी
वर्ग का कथन :
"एम.एफ. हुसैन भारत की कलात्मक विरासत के प्रतीक थे। उनकी
कला को समझना होगा, न कि उस पर धार्मिक संकीर्णता थोपनी
होगी। विरोध और हमले, कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर
सीधा हमला हैं।"
"कला एक कलाकार की व्यक्तिगत दृष्टि है। उसे एक संकीर्ण
धार्मिक लेंस से नहीं देखा जाना चाहिए।"
MF Husain biography
एम.एफ. हुसैन, जिन्हें मकबूल फिदा हुसैन के नाम से जाना जाता है, 20वीं सदी के भारत के सबसे प्रसिद्ध और विवादित कलाकारों में से एक थे। उन्हें "भारत का पिकासो" भी कहा जाता है। हुसैन का परिवार इस्माइली शिया बोहरा समुदाय से था। उनका जन्म 17 सितंबर, 1915 को हुआ था। वह छह बच्चों में सबसे छोटे थे। उनकी माँ, ज़ुबैदा, का देहांत तब हो गया जब हुसैन केवल डेढ़ वर्ष के थे। इसके बाद उनके पिता, फिदा हुसैन, ने दोबारा शादी कर ली। माँ की मृत्यु के बाद, वह इंदौर चले गए जहाँ उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया। इंदौर में ही उन्होंने कला की शिक्षा ली। उन्होंने बॉम्बे (मुंबई) में स्थित जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में कला की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की।
कला करियर और सम्मान
· शुरुआत: करियर
की शुरुआत में उन्होंने मुंबई में फिल्मों के पोस्टर पेंट करके और खिलौने
बनाकर जीवन यापन किया।
· कला
समूह: 1947 में, वे प्रोग्रेसिव
आर्टिस्ट्स ग्रुप (Progressive Artists' Group - PAG) के संस्थापक सदस्यों में से एक बने, जिसने भारतीय
कला को आधुनिक दिशा दी।
· कला
शैली: उनकी कला भारतीय संस्कृति, इतिहास, और पौराणिक कथाओं (जैसे महाभारत और रामायण) से प्रेरित थी, जिसे उन्होंने आधुनिक और बोल्ड कैनवास पर प्रस्तुत किया।
· पुरस्कार: उन्हें
भारत सरकार द्वारा कई सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाज़ा गया:
o पद्म श्री (1966) o पद्म भूषण (1973) o पद्म विभूषण (1991)
अंतिम वर्ष और मृत्यु
· विवाद
और निर्वासन: 1990 के दशक के बाद, उनकी कुछ
पेंटिंग्स (विशेष रूप से हिंदू देवी-देवताओं और 'भारत माता'
का चित्रण) को लेकर हिंदूवादी संगठनों से कड़ा विरोध हुआ।
उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए।
· देश
छोड़ना: लगातार धमकियों और कानूनी झंझटों के कारण, हुसैन ने वर्ष 2006 के आसपास स्व-निर्वासन
(Self-exile) चुन लिया और भारत छोड़ दिया।
· नागरिकता: उन्होंने
कतर की नागरिकता स्वीकार कर ली, लेकिन हमेशा भारत
वापस आने की इच्छा व्यक्त की।
o
मृत्यु: तारीख: 9 जून, 2011
o
स्थान: लंदन, यूनाइटेड किंगडम
o
कारण: बीमारी के
कारण।
पारिवारिक
जीवन (विवाह और संतान)
· पत्नी: हुसैन
ने फाज़िला नामक महिला से विवाह किया।
· संतान: उनके
कई बच्चे हैं, जिनमें उनके पुत्र शमशाद हुसैन भी एक
जाने-माने कलाकार हैं, और पुत्री रईसा हुसैन हैं।
उनकी कला की विरासत उनके बच्चों और पोते-पोतियों ने भी आगे बढ़ाई है।
MF Husain controversy : सम्मान या विवादित विरासत?
·
“Lauh-o-Kalam” लौह-ओ-कलम म्यूज़ियम के उद्घाटन ने कई बहसें फिर से शुरू कर दी हैं।
· कलात्मक आज़ादी बनाम (vs) धार्मिक संवेदना — समर्थक कहते हैं कि हुसैन आधुनिक कला में सांस्कृतिक संवाद की कोशिश कर रहे थे, जबकि विरोधी इसे धार्मिक अपमान मानते थे।
· MF Husain Museum Doha · MF Husain controversy · MF Husain paintings · MF Husain Bharat Mata · Lauh-o-Kalam Museum · MF Husain Madhuri Dixit · MF Husain Arab Civilization Series · Doha art museum India · MF Husain biography · MF Husain legacy
संदर्भ
· Qatar
Museums official website
· Supreme
Court of India verdict (news sources)
· Indian
Modern Art background (Wikipedia/Art History pages)
सभा तस्वीर सोशल मीडिया से








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