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Thursday, 20 November 2025

Bihar Politics : नई सरकार के लिए 'बीमार' कहे जा रहे नीतीश की 10वीं शपथ: यह ताज नहीं, काँटों की सेज है! Nitish Kumar, who is being called 'sick', takes his 10th oath for the new government: This is not a crown, but a bed of thorns!

 


💥Tarun Kumar Kanchan
चुनौतियों का पहाड़ और काँटों भरा ताज 
A mountain of challenges and a crown of thorns

 Nitish Kumar's swearing-in as Chief Minister of Bihar for the 10th time is not just a political event, it's a litmus test for him. This swearing-in ceremony hints at a "crown of thorns," beneath which a mountain of challenges awaits.

 

आज 20 नवंबर को थोड़ी देर में नीतीश कुमार ऐतिहासिक गांधी मैदान में 10वी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के अलावा देश के कई मुख्यमंत्री और बड़े नेता शामिल हो रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि बिहार की तीन लाख जनता भी इस मौके पर साक्षी होंगे। नीतीश कुमार का 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं है, यह उनके लिए अग्निपरीक्षा है। यह शपथ ग्रहण समारोह एक ऐसे 'काँटों भरे ताज' की ओर इशारा करता है, जिसके नीचे चुनौतियों का पहाड़ इंतज़ार कर रहा है।


74 वर्षीय मुख्यमंत्री को अब केवल शासन नहीं करना है, बल्कि खाली खजाने, ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक के रिकॉर्ड कर्ज, और 'एक करोड़ नौकरी' जैसे विशाल चुनावी वादों के बीच संतुलन साधना है। विपक्ष द्वारा उनकी नेतृत्व क्षमता पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब उन्हें अपने काम से देना होगा। वित्तीय संकट से जूझते, सबसे कम GSDP वाले और सर्वाधिक गरीबी वाले बिहार में, क्या नीतीश कुमार जनता के भरोसे को अटूट विश्वास में बदलकर अपने आलोचकों को चुप करा पाएंगे?

🎯 जनता का भरोसा और घोषणा पत्र के वादे

नई सरकार के सामने सबसे पहली और सबसे बड़ी चुनौती है जनता के भरोसे को विश्वास में बदलना है। NDA गठबंधन पर बिहार की जनता ने जो भरोसा जताया है, उसे ठोस नीतियों और त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से सिद्ध करना होगा।

रोजगार और 'एक करोड़ नौकरी' का वादा

चुनावी घोषणा पत्र में किया गया 'एक करोड़ लोगों को नौकरी' देने का वादा सरकार की प्राथमिकता में शीर्ष पर है। यह वादा न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

चुनौती: वर्तमान में, बिहार में संगठित और असंगठित क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या सीमित है। सरकारी अनुमानों के अनुसार भी, बड़े पैमाने पर नई नौकरियों का सृजन करना एक दुष्कर कार्य है।

उदाहरण: एक करोड़ नौकरियों के लिए अगले पाँच वर्षों में प्रति वर्ष 20 लाख नई नौकरियों का सृजन करना होगा, जिसके लिए उद्योगों में भारी निवेश, आधारभूत संरचना का विकास और कौशल विकास कार्यक्रमों की बड़े पैमाने पर आवश्यकता होगी। केवल सरकारी नौकरियों के बूते यह लक्ष्य हासिल करना असंभव है।

💰 वित्तीय मोर्चे पर बड़ी मुश्किलें: कर्ज और देनदारियाँ

बिहार की नई सरकार को एक खाली खजाने और रिकॉर्ड स्तर के कर्ज के साथ शुरुआत करनी पड़ रही है। वित्तीय मोर्चे पर कुशल प्रबंधन एक बड़ी परीक्षा होगी।

बिहार सरकार पर रिकॉर्ड कर्ज

विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार पर कुल कर्ज रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच चुका है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 37% है।

कर्ज का बोझ: बिहार सरकार पर कर्ज की राशि लगभग ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक हो गई है (विभिन्न संस्थानों और बाज़ार से लिया गया कर्ज)। एक सूचना के मुताबिक हर बिहारी पर 27 लाख का कर्ज है।

कर्ज का वहन: इस विशाल कर्ज पर ब्याज का भुगतान और मूलधन चुकाने के लिए एक कुशल वित्तीय प्रबंधन योजना की तुरंत आवश्यकता है। ब्याज भुगतान पर होने वाला खर्च विकास कार्यों के लिए उपलब्ध राशि को कम कर देता है।

 बिहार सरकार की देनदारियाँ और खाली खजाना

चुनावी वादे—जैसे मुफ्त बिजली, महिलाओं को आर्थिक सहायता आदि—को पूरा करने के लिए बड़े वित्तीय आवंटन की आवश्यकता होगी।

वित्तीय संकट: रिकॉर्ड कर्ज के बीच, सरकार के खजाने में बची हुई राशि बहुत कम है, जो इन देनदारियों को पूरा करने की राह में एक कठिन आर्थिक चुनौती है।

GSDP (प्रति व्यक्ति)

बिहार की स्थिति: यह सबसे निचले राज्यों में से एक है।

राष्ट्रीय औसत का लगभग एक-तिहाई है। इसका मतलब यदि राष्ट्रीय औसत प्रति व्यक्ति आय ₹100 है, तो बिहार की प्रति व्यक्ति आय केवल लगभग ₹33 ही है। यह बिहार में निम्न आर्थिक उत्पादकता और आय को दर्शाता है।

गरीबी दर

बिहार की स्थिति: यह सर्वाधिक है (लगभग 33.7%) जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 21.9% है। इसका मतलब बिहार की लगभग एक-तिहाई आबादी (33.7%) गरीब है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या लगभग पाँच में से एक (21.9%) है। यह उच्च निर्धनता को इंगित करता है।  एलएलएम

 मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI)

बिहार की स्थिति: यह निचले पायदान पर है।

 इसका मतलब,  स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर (मानव विकास के मुख्य मापदंड) के मामले में बिहार अन्य राज्यों और राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे है। यह मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण अंतराल को दर्शाता है।

 यह डेटा दर्शाता है कि बिहार आर्थिक उत्पादन, गरीबी उन्मूलन और मानव विकास के मानकों पर भारत के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है। बिहार के लोगों का जीवन स्तर (Life Standard) अन्य प्रमुख राज्यों की तुलना में काफी नीचे है। GSDP कम होने के कारण विकास कार्यों और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च करने की क्षमता सीमित हो जाती है। नई सरकार को समावेशी विकास दर बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

🏥 स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर तत्काल ध्यान

 स्वास्थ्य सुविधा की स्थिति

बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति (Healthy facilities) चिंताजनक बनी हुई है।

चुनौतियाँ: डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और जिला अस्पतालों में सुविधाओं और उपकरणों की भारी कमी है। महामारी की स्थिति में यह कमी और भी उजागर हो जाती है।

अपराध पर काबू पाना और 'जंगल राज' की धारणा

कानून व्यवस्था को मजबूत करना और अपराध दर को नियंत्रित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए 'जंगल राज' की धारणा को खत्म करने के लिए सख्त उपाय आवश्यक हैं।

उदाहरण: विधानसभा चुनाव में बाहुबली कहे जाने वाले अनंत सिंह और ओसामा जैसे लोगों का विधानसभा में पहुँचना, और हाल ही में दुलारचंद यादव की हत्या के बाद फैली सनसनी, यह दर्शाती है कि कानून व्यवस्था को लेकर अभी भी जनता में चिंता का माहौल है। सरकार को पुलिस तंत्र में सुधार और त्वरित न्याय सुनिश्चित करना होगा।

🤝 सामाजिक चुनौतियाँ: जाति और आर्थिक विषमता

जाति/समुदाय की बढ़ती खाई

जातिगत समीकरणों को साधते हुए विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच बढ़ती खाई को पाटना और सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रखना महत्वपूर्ण है।

जाति विद्वेष और सामुदायिक विवाद: हाल-फिलहाल में बिहार में जाति विद्वेष और सामुदायिक विवाद के कई छोटे-बड़े मामले रिपोर्ट किए गए हैं, जो सामाजिक एकता के लिए खतरा हैं।

उदाहरण: सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर जातिगत तनाव के मामले, जैसे कि भूमि विवाद से जुड़े अंतर-जातीय संघर्ष, अक्सर सामने आते रहे हैं। नई सरकार को सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करना होगा।

 

आर्थिक विषमता और गरीबी रेखा

क्षेत्रीय असमानताएँ और गरीबी एक बड़ा मुद्दा है।

गरीबी रेखा के नीचे: बिहार में 33.7% लोग अभी भी गरीबी रेखा (BPL) के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में, सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएँ चलाई हैं, जिससे गरीबों को कुछ लाभ मिला है, लेकिन गरीबी का प्रतिशत अभी भी बहुत अधिक बना हुआ है। सरकार को आर्थिक विकास के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुँचाना होगा ताकि गरीबी का यह प्रतिशत तेजी से कम हो सके।

नीतीश कुमार की 10वीं बार की यह पारी आसान नहीं है। यह 'काँटों से भरा ताज' है। उन्हें न केवल अपने विरोधियों को अपनी कार्यक्षमता से चुप कराना होगा, बल्कि खाली खजाने, भारी कर्ज, और जनता की उम्मीदों के बीच संतुलन भी बनाना होगा। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए नई सरकार को पहले 100 दिनों में ही ठोस आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की शुरुआत करनी होगी।



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Thursday, 6 November 2025

Bihar Assembly Elections 2025: : तस्वीरों के साथ देखें प्रथम चरण के मतदान के दौरान उत्साहपूर्ण माहौल की रपट | First Phase Voting – Watch the exciting report with pictures

  

तारापुर में मध्य विद्यालय माधोडीह, गनैली के मतदान केंद्र संख्या 155 में वोटर आई कार्ड दिखाते हुए लाइन  में लगे मतदाता।

Voting for a total of 121 assembly seats in the first phase of Bihar Assembly Elections 2025 began in a peaceful and enthusiastic atmosphere.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। सुबह से ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं, जिनमें महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी विशेष रूप से उत्साहजनक रही। कई जिलों में मतदान को लेकर भारी जोश देखने को मिला।

🌟 मतदाताओं का जोश और उत्साह

 

मुजफ्फरपुर में पारू विधानसभा क्षेत्र के 

पोखरैरा का विभिन्न मतदान केंद्र


* लंबी कतारें: सीवान, छपरा (सारण), लखीसराय (माहीसोना बूथ), सहरसा, मुंगेर (धरहरा), और दरभंगा (गौड़ाबौराम) सहित कई जिलों में सुबह से ही बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें लग गईं।

 * महिलाओं की भागीदारी: मुजफ्फरपुर हो या पटना, बक्सर हो या दरभंगा, छपरा (सारण) और गोपालगंज हो या मुंगेर सभी जगह महिलाओं में मतदान के प्मेंरति काफी उत्साह देखा गया।  कई जगह मतदान केंद्र पर महिलाओं में खास उत्साह दिखा। उनकी कतारें पुरुषों के मुकाबले अधिक लंबी थीं।

जमालपुर में 104 वर्षीय बजरंगी सिंह और उनकी
 
95 वर्षीय पत्नी पार्वती देवी।


 * बुजुर्गों की मिसाल: मुंगेर के जमालपुर विधानसभा क्षेत्र में 1 अग्रहण पंचायत की बूथ संख्या 321 पर 04 वर्षीय बजरंगी सिंह और उनकी 95 वर्षीय पत्नी पार्वती देवी ने मतदान कर लोकतंत्र के पर्व में भागीदारी की मिसाल पेश की। धरहरा में भी बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 * शांतिपूर्ण मतदान: प्रशासनिक व्यवस्था के कारण अधिकांश जगहों पर मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है।


⚙️ तकनीकी व्यवधान और प्रशासनिक कार्रवाई

मतदान की शुरुआत में कुछ स्थानों पर ईवीएम (EVM) में तकनीकी गड़बड़ी की सूचना मिली, जिस पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।

 * मुजफ्फरपुर: जिला निर्वाचन प्राधिकारी के अनुसार, मतदान शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ, लेकिन कुढ़नी, पारु एवं साहेबगंज में 18 स्थानों पर ईवीएम रिप्लेसमेंट करनी पड़ी।

 * मुंगेर: सुबह 7 बजे तीन स्थानों (बूथ संख्या 198, 172 और 282) पर बीवी पैट और वॉलेट यूनिट खराबी के कारण तुरंत बदले गए।

 * वैशाली: भगवानपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय रहसा पश्चिमी में बूथ नंबर 335 पर मशीन खराब होने के कारण 8:30 बजे तक मतदान शुरू नहीं हुआ, जिससे लोगों ने हंगामा भी किया।

इन शिकायतों पर नियंत्रण कक्षों से डीएम और एसपी लगातार निगरानी कर रहे हैं और सेक्टर मजिस्ट्रेटों द्वारा तुरंत मशीनों को बदला गया।

   मुजफ्फरपुर में बूथ नंबर 161 एवं 162 पर पसरा सन्नाटा। यहाँ वोट का बहिष्कार किया गया।

📊 प्रारंभिक मतदान प्रतिशत (सुबह 11.00 बजे तक)

प्रारंभिक घंटों में कई क्षेत्रों में अच्छा मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। मुजफ्फरपुर में 11 बजे तक 29.56 फीसदी मतदान हो गया जबकि दरभंगा में 26.07 प्रतिशत और मधेपुरा में 28.46 प्रतिशत तक मतदान हुआ। शुरुआत की स्थिति इस प्रकार है।

 * सर्वाधिक: गोपालगंज के हथुआ (संख्या 104) में 16 प्रतिशत से अधिक का मतदान हुआ।

 * सबसे कम: सुबह नौ बजे तक मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र में शुरुआती 2 घंटे में 11.89% के साथ सबसे कम मतदान हुआ। पूरे जिले में 14.41 प्रतिशत मतदान की सूचना है।

 * सीवान में 2908 मतदान केंद्रों पर 24 लाख 47 हजार 147 मतदाता वोट डाल रहे हैं, जिसमें 27 मॉडल मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

पढ़ें रुझान

फोटो और वीडियो देखें

🗣️ प्रमुख हस्तियों के बयान और घटनाएँ

पावर स्टार पवन

* भोजपुर के बड़हरा विधानसभा क्षेत्र में भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह अपने गांव जोकहरी में वोट डाला

 * केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (भाजपा): लखीसराय के बड़हिया में मतदान के बाद उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर महागठबंधन को घेरा और उन पर "जंगलराज" वापस लाने का आरोप लगाया।

 * विजय कुमार सिन्हा (भाजपा प्रत्याशी, लखीसराय): उन्होंने मतदान को लोकतंत्र की मजबूती के लिए संविधान के सम्मान का पर्व बताया और बिहारियों को कलंकित करने वालों को जवाब देने का आह्वान किया।

* बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने जगदीशपुर विधानसभा के बूथ नंबर 304 पर मतदान किया

 * पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा (भाजपा प्रत्याशी, बक्सर सदर): उन्होंने भी मतदान के बाद स्याही का निशान दिखाया।

* दरभंगा सदर विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 186, प्राथमिक विद्यालय बंगलागढ़ फकीराना में दरभंगा से भाजपा प्रत्याशी संजय सरावगी ने मतदान किया।

 * पोस्टल बैलेट की शिकायत: मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा स्थित बूथ संख्या 284 पर एक व्यक्ति ने शिकायत की कि उनका वोट सरकारी कर्मचारी न होने के बावजूद पोस्टल बैलेट से पहले ही डाल दिया गया है।

प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं और सभी मतदान केंद्रों पर वेब कास्टिंग और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि मतदान सुचारू रूप से चलता रहे।

- तरुण कुमार कंचन

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Wednesday, 29 October 2025

Bihar Election 2025 : बिहार का तेजस्वी प्रण पर भाजपा का विज्ञापन वार | BJP's advertisement war on Bihar's Tejashwi's pledge


 

The BJP has launched an advertising attack on Tejashwi's pledge to form Bihar. Releasing the India Mahagathbandhan (INDIA Alliance) manifesto, Tejashwi said, "We will not only build a government, we will build a new Bihar. We don't make broken promises; we will fulfill what we have promised."

बिहार का तेजस्वी प्रण (Bihar ka Tejaswi Pran) पर भाजपा ने विज्ञापन वार किया है ।तेजस्वी ने इंडिया महागठबंधन का घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा- हम सरकार ही नहीं, नया बिहार बनाएंगे। हम टूटे-फूटे वादे नहीं करते, जो कहा है उसे पूरा करेंगे। कल यानी मंगलवार को इंडिया गठबंधन की ओर से घोषणा पत्र जारी किया गया। इस घोषणा पत्र को अक्षरशः लागू किया जाए, तो वास्तव में रामराज आ जाएगा। महागठबंधन के इन लोक लुभावने वादों से पूरा एनडीए खेमा  ही बिल- बिला गया है।

तेजस्वी ने दिखाया अच्छे दिनों के मानचित्र

इंडिया महागठबंधन का घोषणापत्र जारी करते
राजद नेता तेजस्वी यादव, माले के दीपंकर

इंडिया गठबंधन की ओर से राजद के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने इंडिया महागठबंधन का घोषणा पत्र जारी कर ऐसी सुविधा बिहार के आवाम को देने की घोषणा की कि एक बार लगने लगा अब बिहारवासियों के अच्छे दिन आ रहे हैं ।  घोषणा पत्र में कहां गया कि हर परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी देंगे। एक दिसंबर से महिलाओं को हर महीने ढाई हजार रुपए मिलेंगे। मालूम हो कि सरकार बनने के एक पखवाड़े में ही इतना बड़ा फैसला लेने की घोषणा की है, जो आधी आबादी है। इस वोट बैंक पर अब तक नीतीश कुमार का राज है।

सबके हाथ में अशर्फी की आस

 इंडिया महागठबंधन की ओर से  घोषणाओं का ऐसा पिटारा खुला कि सब के हाथ में अशर्फी आने की उम्मीद बढ़ गई है। संविदाकर्मी और जीविका समन्वयक खुशी से झूम उठे। संविदाकर्मी और जीविका समन्वयक को स्थाई करने का वादा किया। इसके साथ हर परिवार को 200 यूनिट तक मुक्त बिजली की सुविधा देने की बात कही। ऐसा लग रहा है कि हर घर चमचमा उठा है। अभी चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले ही नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बिहार के हर परिवार को 125 यूनिट बिजली फ्री में दे दी है। इसी को तेजस्वी यादव 200 यूनिट करने की बात कही।

बिहार में बहार के सपने

अभी चुनाव की जो घोषणा हुई उससे ऐसा लग रहा है कि वास्तव में  बिहार में बहार आने वाली है।  इसके सपने नीतीश कुमार ने दिखाए थे। अब नीतीश कुमार घूम घूम कर बहार का नजारा दिखा रहे है। मुख्यमंत्री नीतीश अपने किए हुए कार्यों का पिटारा लोगों को दिखा रहे हैं और बिहार की जनता को सावधान कर  रहे हैं कि इंडिया गठबंधन के भ्रामक घोषणाओं से सतर्क रहें । इस दौरान आगे काम करने के की सूची भी अपने भाषण में लोगों को थमा रहे हैं । उनकी मुख्य घोषणा है, अगले 5 साल में बिहार में एक करोड़ नौकरी - रोजगार देंगे। वह यह बात करना भूल नहीं रहे हैं कि पिछले 5 साल में 10 लाख युवाओं को नौकरी और 40 लाख लोगों को रोजगार दिया जा चुका है।

2005 से पहले कुछ हुआ था जी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
हर संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता को 2005 से पहले के बिहार की याद दिलाना नहीं भूलते हैं । वह कहते हैं, 1990 से 2005 के बीच बिहार में कुछ हुआ था जी। अशिक्षा और पलायन हमारी नीति बन गई थी। बिहार में जंगलराज था। उसके बाद कोर्ट में चल रहे जॉब के बदले जमीन का मामला भी उठते रहते हैं । नीतीश कुमार ने तेजस्वी के घोषणा पत्र के बाद कहा कि उनके माता-पिता 15 वर्षों तक बिहार में राज किया था । तब क्या हुआ था? हमेशा प्रश्न के लहजे में बात करते हैं और सवाल उठाते हैं । या यह कहें कि लालू- राबड़ी राज के काल को याद करा कर बिहार की जनता को डरा कर अपने पक्ष में मतदान करने की मांग कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से पहले बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों में ही रोजगार ढूंढना पड़ता था।  उन्हें बिहार के नाम पर अपमान झेलना पड़ता था। नौकरियों के लिए वैकेंसी ना के बराबर निकलती थी।  कुछ पदों पर बहाली निकलते भी थे तो सत्ता के संरक्षण में नौकरी का सौदा होता था। इसके बाद फिर जनता से करते हैं, क्या जी आज ऐसा होता है क्या?

व्यक्तिगत टारगेट पर तेजस्वी

इसी तरह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इंडिया महागठबंधन के घोषणा पत्र पर वार किया । उन्होंने तेजस्वी को सपने बेचने की कोशिश करने की बात कही। उन्होंने कहा बिहार के लोग जंगलराज के नायक को नहीं भूले हैं। उनसे बिहार की जनता को सावधान रहना है । इसी तरह केंद्रीय मंत्री लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में जंगलराज को लौटने नहीं देंगे । यह बात उन्होंने बख्तियारपुर में पार्टी के उम्मीदवार अरुण कुमार के प्रचार काफिले पर हमले के संदर्भ में कही थी। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के साथ-साथ महागठबंधन पर निशाना साधते हैं। उन्होंने कहा, संभावित हार को देखते हुए तेजस्वी यादव घबराहट में हैं।

 तेजस्वी से उम्मीद

इंडिया महागठबंधन के समर्थकों का कहना है कि हम तेजस्वी के उपमुख्यमंत्री काल को देख रहे हैं । उन्होंने 17 महीने में रोजगार देने के लिए जितने कदम उठाए थे, वह हमें सुंदर भविष्य की ओर ले जाने के लिए काफी है। आज बुधवार सुबह की बात है। एमआईटी ग्राउंड में कुछ लोग टहल रहे थे और इंडिया महागठबंधन के घोषणा पत्र की चर्चा कर रहे थे। उनकी चर्चाओं में जो मुख्य मुद्दा थे, उस पर हम थोड़ी बात कर लेते हैं।  वे कह रहे थे कि सरकारी कर्मचारी,  बुजुर्ग के अलावा सोशल इंजीनियरिंग पर भी घोषणा पत्र में  फोकस किया गया है। सबसे बड़ी बात यह रही की इंडिया महागठबंधन की घोषणा पत्र में मूल रूप से बिहारी को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात कही गई है। इसमें उन्होंने सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन देने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹1500 करने के साथ हर साल उसमें ₹200 की वृद्धि करने का भी वादा किया गया है। राज्य में विधि व्यवस्था ठीक हो इसके लिए एसपी और थानेदार का कार्यकाल भी तय करने का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने सबसे बड़ा गेम वक्फ बोर्ड संशोधन कानून को लेकर खेला है। उन्होंने कहा वक्फ संशोधन विधेयक पर रोक लगाई जाएगी। इसका मुस्लिम कम्युनिटी से सीधे ताल्लुक है। खासकर मुसलमान की भावना को जोड़ने के लिए इस बात को उद्धृत किया गया है । तेजस्वी ने कहा कि मजदूर श्रमिकों की गणना होगी और प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार में एक समर्पित विभाग होगा । इसी तरह पंचायत प्रतिनिधियों का भत्ता दोगुना करने और पूर्व सदस्यों को पेंशन की सुविधा देने का वादा किया।

निचले तबकों की आर्थिक तरक्की

बिहार में निचले तबकों में रहने वाले नाई, कुम्हार,  बढ़ाई, लोहार,  मोची और  माली को 5 साल के लिए 5 लाख रुपए देने की बात कही।  दिव्यांगों के लिए भी विकास कार्यक्रम को लागू करने का ऐलान किया। भूमिहीनों को ग्रामीण क्षेत्र में पांच और शहरी इलाके में तीन डिसमिल जमीन देने का भी वादा किया।

एनडीए ने लिया विज्ञापन का सहारा

निश्चित रूप से इंडिया गठबंधन  का घोषणा पत्र बिहार में रामराज लागू होने जैसी स्थिति पैदा करने वाले घोषणाओं को देखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए ) में घबराहट पड़ा हो गई और आनन फानन में विज्ञापन से पलटवार किया है। उसने अपने विज्ञापन में अखबारों की सुर्खियों को कोलाज के रूप में प्रस्तुत किया है। उनमें कुछ कांग्रेस शासित राज्यों की सुर्खियां हां तो कुछ बिहार की पुरानी सुर्खियां।

हिमाचल और कर्नाटक की बात को रखा है, जिसमें कांग्रेस के वादे और कार्य की एक झलक दिखती है। हिमाचल में हजारों कर्मचारियों को सुक्खू सरकार ने दिया झटका , 10 से 20 K तक कम हो सकता है वेतन। उसी जगह दूसरी बात भी कही गई है कि हिमाचल में वेतन और पेंशन पर भी संकट आ गया है । कर्नाटक पर विज्ञापन में कहा गया है कि कर्नाटक सरकार ने चुनाव में किए थे 59 वादे 1 साल में केवल दो पूरे कर पाए ।

बिहार की सुर्खियों की झलक

एनडीए के इस विज्ञापन में बिहार में जंगल राज को दर्शाया गया है। उनमें जहानाबाद में उग्रवादियों ने 100 लोगों को भून डाला। बिहार में अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार 75 की हत्या । सिवान में एक ही परिवार के 12 लोगों को गोलियों से भूना । बारा गांव में 37 लोगों की सामूहिक हत्या।  हिंसा- लूट और बम के धमाकों के बीच चौथे चरण का पंचायत चुनाव संपन्न। समस्तीपुर में तीन व्यापारियों समेत चार का अपहरण,  पैसा दो डॉक्टरी की डिग्री लो। इस तरह बिहार के अपराधी के इतिहास और भ्रष्टाचार के हाल को बयान करते हुए दिखाया गया है । विज्ञापन में कोर्ट की टिप्पणी को भी रखा गया है जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था बिहार जंगलराज से भी बदतर। राज्य में 14 साल से प्राथमिक शिक्षा ध्वस्त।  सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि इस विज्ञापन कोलाज में गौतम - शिल्पी हत्याकांड का जिक्र नहीं है,  जो एक माह पहले तक जोर - शोर से उठाया जा रहा था। जब से जनसुराज का सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस मामले में भाजपा नेता और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम घसीटा है, तब से  एनडीए नेताओं के मुंह ताले लग गए हैं।

चाचा - भतीजा के बीच तलवारबाजी

दोनों खेमों के कर्ताधर्ता अपने तीर - तलवार लेकर मैदान में रंग जमा रहे हैं। चाचा - भतीजा का तमाशा जारी है। मदारी की  डुगडुगी बज रही है।  बिहार की पब्लिक न्यारी है। सबको बरोबर मौका दे रही है। सबको सुन रही है, पर प्रतिक्रिया नहीं दे रही है।  अब देखना है वार पलटवार में कौन जनता को अपने पक्ष में कर पाता है। इतना तो सच है कि इंडिया महागठबंधन को लालू-राबड़ी काल के कारनामे परेशान कर रहा है और सशंकित हैं, वहीं एनडीए को बिहार का तेजस्वी प्रण परेशानी में डाल रखा है।

धन्यवाद।

तरुण कुमार कंचन

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