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Monday, 19 January 2026

राजद में 'ऑपरेशन क्लीन' या परिवार में वर्चस्व की जंग? 25 जनवरी की बैठक और तेजस्वी के 'एकछत्र राज' की इनसाइड स्टोरी



क्या राजद में 'ऑपरेशन क्लीन' के बहाने तेजस्वी यादव अपने ही भाई-बहनों को पार्टी से बेदखल कर रहे हैं? जानिए 25 जनवरी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का असली एजेंडा, रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोप और लालू यादव को 'संरक्षक' बनाकर किनारे करने की इनसाइड स्टोरी। बिहार की राजनीति में मचे इस घमासान की पूरी रिपोर्ट।

Tarun Kumar Kanchan

What is brewing within the Rashtriya Janata Dal (RJD) is not just an assessment of the electoral defeat, but also hints at a major 'change of guard' and 'family feud' within the party.

बिहार की राजनीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बीच सियासी पारा सातवें आसमान पर है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर जो कुछ भी पक रहा है, वह सिर्फ चुनावमें मिली हार की समीक्षा नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर एक बड़े 'सत्ता परिवर्तन' और 'पारिवारिक घमासान' का संकेत दे रहा है। 25 जनवरी को होने वाली राजद की महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। क्या तेजस्वी यादव वाकई पार्टी को नए सिरे से खड़ा कर रहे हैं, या यह अपने ही भाई-बहनों को किनारे लगानेकी एक सोची-समझी रणनीति है?

​तेजस्वी का 'एकछत्र राज' और अपनों से किनारा?

​राजद के गलियारों में चर्चा है कि 25 जनवरी की बैठक का असली एजेंडा संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के हाथ में पार्टी की कमान और वीटो पावर सौंपना है। खबर है कि इस बैठक में लालू प्रसाद यादव को 'संरक्षक' की भूमिका में सीमित किया जा सकता है, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास सभी निर्णायक शक्तियां होंगी।

​लेकिन इस शक्ति प्रदर्शन के पीछे एक और कड़वी सच्चाई छिपी है—परिवार का आंतरिक कलह। हाल के दिनों में जिस तरह से रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव के साथ तेजस्वी के रिश्तों में खटास आई है, उसने पार्टी कार्यकर्ताओं को हैरत में डाल दिया है।

​रोहिणी आचार्य के आरोपों ने हिला दी थी चूलें

​कुछ समय पहले रोहिणी आचार्य ने अपने ही छोटे भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सहयोगी संजय यादव पर जो गंभीर आरोप लगाए थे, उसने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं। रोहिणी ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि तेजस्वी ने उन पर चप्पल उठाई। यह विवाद इतना गहरा गया कि रोहिणी को न केवल घर और राज्य, बल्कि देश छोड़कर अपने पति के पास सिंगापुर वापस जाना पड़ा। इस घटना के बाद तेजस्वी यादव कई दिनों तक सार्वजनिक जीवन से गायब रहे, जिसे उनकी नैतिक हार के रूप में देखा गया।

​मकर संक्रांति: दही-चूड़ा भोज और बढ़ती दूरियां

​मकर संक्रांति के मौके पर राजद के भीतर की दरार साफ नजर आई। एक तरफ लालू प्रसाद यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के आवास पर जाकर दही-चूड़ा खाया और उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव इस भोज से पूरी तरह नदारद रहे।

​तेज प्रताप का दर्द: पिता का प्यार पाकर तेज प्रताप गदगद तो थे, लेकिन छोटे भाई की बेरुखी ने उन्हें आहत किया। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि वे 'जयचंदों' से घिरे हुए हैं।

​तेजस्वी की रणनीति: तेजस्वी का न आना यह साफ संकेत था कि वे पार्टी में अब किसी दूसरे 'पावर सेंटर' को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

​'ऑपरेशन क्लीन': 300 बागियों पर गिरेगी गाज

​विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तेजस्वी यादव अब 'एक्शन मोड' में हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर 'सफाई अभियान' शुरू करने का फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने बागियों की एक लंबी लिस्ट तेजस्वी को सौंपी है।

​इस 'क्लीन स्वीप' के मुख्य बिंदु:

​कमेटियां भंग: प्रदेश से लेकर प्रखंड स्तर तक की सभी कमेटियां भंग की जाएंगी।

​300 नेताओं की छुट्टी: चुनाव में पार्टी विरोधी काम करने वाले लगभग 300 पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

​सोशल मीडिया पर नजर: तीन दर्जन ऐसे नेताओं को चिह्नित किया गया है जो सोशल मीडिया पर दल विरोधी पोस्ट करते थे।

​अनुशासन का हंटर: पार्टी कार्यालय में बेवजह बैठने वाले और अनुशासन तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

​"विधानसभा चुनाव में हार से हमने सबक लिया है। अब संगठन में सिर्फ निष्ठावान और ऊर्जावान लोगों की जगह होगी। जाति विशेष की राजनीति के बजाय हम सभी धर्मों और वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।" 

               - तेजस्वी यादव

​क्या लालू यादव को 'रिटायर' करने की तैयारी है?

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 25 जनवरी की बैठक में 'स्वास्थ्य' का हवाला देकर लालू प्रसाद यादव को सक्रिय राजनीति के फैसलों से दूर किया जा सकता है। तेजस्वी खुद को पार्टी के एकमात्र चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

​नया प्रदेश अध्यक्ष: जगदानंद सिंह और वर्तमान अध्यक्ष के स्वास्थ्य को देखते हुए किसी 'ऊर्जावान' और युवा नेता को कमान सौंपी जा सकती है।

​सीधी पहुंच: तेजस्वी पर अक्सर आरोप लगते थे कि वे आम कार्यकर्ताओं को उपलब्ध नहीं होते। अब उन्होंने तय किया है कि वे नियमित रूप से प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे और जनता से मिलेंगे।

​बिहार की जनता और राजद का भविष्य

​बिहार की जनता ने महागठबंधन को 1 करोड़ 90 लाख से अधिक वोट दिए हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन सवाल वही है—क्या संगठन की यह 'ओवरहॉलिंग' पार्टी को मजबूत करेगी या परिवार के भीतर की आग राजद के कोर वोट बैंक (MY समीकरण) को छिटका देगी?

​25 जनवरी की बैठक राजद के इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यदि तेजस्वी यादव अपने भाई-बहनों को दरकिनार कर पूरी शक्ति अपने हाथ में लेते हैं, तो पार्टी के भीतर एक बड़ा विद्रोह भी हो सकता है। फिलहाल, तेजस्वी 'सड़क से सदन तक' आक्रामक रुख अपनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा घर के भीतर के 'विपक्ष' को संभालने की है।

राजद का भविष्य: जनता की राय (Opinion Poll)
"क्या आपको लगता है कि बिना लालू जी के सक्रिय नेतृत्व और परिवार की एकजुटता के तेजस्वी यादव 2026 में राजद की नैया पार लगा पाएंगे? अपनी राय नीचे पोल में दें और कमेंट में कारण बताएं!"
प्रश्न: राजद में होने वाला 'ऑपरेशन क्लीन' और 25 जनवरी की बैठक को आप किस नजरिए से देखते हैं?
 A: यह पार्टी को नई ऊर्जा दे आयुने और हार से उबरने का सही कदम है।
 B: यह सिर्फ तेजस्वी यादव का पार्टी पर 'एकछत्र राज' स्थापित करने का तरीका है।
C: परिवार (रोहिणी और तेज प्रताप) को दरकिनार करना राजद के लिए भविष्य में भारी पड़ेगा।
D: लालू प्रसाद यादव को 'संरक्षक' बनाना पार्टी के अंत की शुरुआत है।

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Friday, 9 January 2026

ज़मीन के बदले नौकरी: CBI की चार्जशीट में क्या है? वो 5 बड़े खुलासे जिन्होंने लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ाईं | जानें किस पर क्या आरोप हैं

Lalu Yadav CBI Charge Sheet Land for Job Scam


जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर आरोप तय। कोर्ट ने कहा- लालू ने रेलवे को निजी जागीर बनाया। पढ़ें पूरी खबर और कोर्ट की टिप्पणी। 

Tarun Kumar Kanchan

Charges have been framed against Lalu Prasad Yadav and his family in the job-for-land case. The court ruled that the Railways had turned the country into a private fiefdom. Read the full report and the court's comments.

जमीन के बदले नौकरी घोटाले (Land for Job Scam) में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सहित अन्य मुख्य आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने इस दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए रेल मंत्रालय को अपनी 'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल किया।

कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां : 'अपराधिक सिंडिकेट' की तरह हुआ काम

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि सरकारी नौकरियों को जमीन हड़पने के लिए एक 'बार्गेनिंग चिप' (सौदेबाजी के हथियार) के रूप में इस्तेमाल किया गया।

अदालत ने कहा :

·       संगठित साजिश : कोर्ट के अनुसार, यह घोटाला एक सुनियोजित और संगठित आपराधिक साजिश थी।

·       पारिवारिक लाभ : लालू यादव, उनके परिवार और करीबियों ने मिलकर एक 'आपराधिक सिंडिकेट' की तरह काम किया ताकि परिवार के सदस्यों (पत्नी, बेटों और बेटियों) के नाम पर अचल संपत्ति बनाई जा सके।

·       पद का दुरुपयोग : रेल मंत्रालय के निर्णयों का दुरुपयोग किया गया और गरीब अभ्यर्थियों को बिना विज्ञापन जारी किए नौकरियां दी गईं, ताकि बदले में उनसे जमीन लिखवाई जा सके।

तेजस्वी, तेज प्रताप और मीसा भारती पर भी आरोप

अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव और मीसा भारती के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया है।

हालांकि, इस मामले में एक बड़ी राहत उन 52 आरोपियों को मिली है जिन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया है। इनमें रेलवे के कई अधिकारी और सीपीओ शामिल हैं। सीबीआई ने कुल 103 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

क्या है 'जमीन के बदले नौकरी' (Land for Job)  का पूरा मामला?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे।

बिना किसी विज्ञापन के 'बैकडोर एंट्री'

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे के ग्रुप-डी (खलासी/सब्स्टीट्यूट) पदों पर भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक नोटिस या विज्ञापन जारी नहीं किया गया था। चयिनत उम्मीदवार ज्यादातर पटना के ही रहने वाले थे।

आवेदन से पहले ही मिल गई थी नौकरी?

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई मामलों में उम्मीदवारों को आवेदन करने या उनके दस्तावेज़ प्रोसेस होने से पहले ही नौकरी पर रख लिया गया था। बाद में कागज़ी खानापूर्ति की गई ताकि इसे वैध दिखाया जा सके।

ज़मीन के हस्तांतरण का 'पैटर्न'

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि ज़मीन लेने का एक तय तरीका (Modus Operandi) था:

·       सीधे नाम पर नहीं: पहले ज़मीन को लालू परिवार के करीबियों (जैसे भोला यादव या अन्य सहयोगियों) के नाम कराया गया।

·       उपहार (Gift Deeds): कई उम्मीदवारों ने अपनी ज़मीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों को 'गिफ्ट' कर दीं।

·       सर्किल रेट से कम कीमत: जिन जमीनों को खरीदा गया, उनकी कीमत उस समय के सर्किल रेट से बहुत कम दिखाई गई।

 शेल कंपनियों का इस्तेमाल

घोटाले की परतों को छिपाने के लिए 'एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड' जैसी कंपनियों का उपयोग किया गया। आरोप है कि इस कंपनी के पास करोड़ों की ज़मीनें थीं और बाद में इस पूरी कंपनी के शेयर ही लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों को मामूली कीमत पर ट्रांसफर कर दिए गए। इससे ज़मीनें सीधे उनके पास आ गईं बिना किसी रजिस्ट्री के।

अयोग्य उम्मीदवारों का चयन

सीबीआई ने दलील दी कि नौकरी पाने वाले कई अभ्यर्थी इतने अयोग्य थे कि वे अपना नाम तक ठीक से नहीं लिख सकते थे। उनके पास मौजूद शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी फर्जी संस्थानों के पाए गए।

लैंड फॉर जॉब स्कैम: लालू परिवार के सदस्यों की विशिष्ट भूमिका (CBI चार्जशीट के अनुसार)

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में केवल लालू प्रसाद यादव को ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों को भी इस 'आपराधिक सिंडिकेट' का मुख्य लाभार्थी और हिस्सेदार माना है। विशेष सीबीआई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यक्ति का भ्रष्टाचार नहीं था, बल्कि एक 'पारिवारिक तंत्र' था। जहां पिता (लालू यादव) ने पद का प्रभाव इस्तेमाल किया, वहीं परिवार के अन्य सदस्यों ने उन पदों के बदले मिली संपत्तियों को अपने नाम पर संचित किया।

यहाँ जानें किस पर क्या आरोप हैं:

तेजस्वी यादव (पूर्व उपमुख्यमंत्री, बिहार)

सीबीआई की पूरक चार्जशीट में तेजस्वी यादव का नाम प्रमुखता से शामिल है।

·       मुख्य आरोप: तेजस्वी यादव उस कंपनी (AK Infosystems Pvt Ltd) के मुख्य शेयरधारक और निदेशक रहे हैं, जिसके पास उम्मीदवारों से ली गई जमीनें ट्रांसफर की गई थीं।

·       लाभार्थी: जांच एजेंसी का दावा है कि भले ही नियुक्तियों के समय तेजस्वी की उम्र कम थी, लेकिन बाद में उन्होंने इन संपत्तियों और कंपनियों का मालिकाना हक हासिल किया, जो सीधे तौर पर घोटाले की आय (Proceeds of Crime) से जुड़ी थीं।

 राबड़ी देवी (पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार)

लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी पर जमीनें सीधे अपने नाम करवाने का आरोप है।

·       सीधी खरीद/गिफ्ट: चार्जशीट के मुताबिक, कई उम्मीदवारों ने राबड़ी देवी के नाम पर सीधे जमीन की रजिस्ट्री की या उन्हें पावर ऑफ अटॉर्नी दी।

·       साजिश में भागीदारी: कोर्ट ने माना है कि रेल मंत्री की पत्नी होने के नाते वे इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा थीं और उनके नाम पर पटना में कई कीमती भूखंड बेहद कम दामों पर ट्रांसफर किए गए।

मीसा भारती (सांसद, राज्यसभा)

लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती पर भी इस घोटाले के लाभ को संभालने के आरोप हैं।

·       संपत्ति का प्रबंधन: सीबीआई के अनुसार, मीसा भारती और उनके पति के स्वामित्व वाली फर्मों का इस्तेमाल घोटाले से अर्जित धन और जमीनों को 'सफेद' करने या निवेश करने के लिए किया गया।

·       सीधी हिस्सेदारी: कई प्लॉट और संपत्तियों के सेल डीड में मीसा भारती का नाम बतौर खरीदार या लाभार्थी दर्ज है।

हेमा यादव और अन्य सदस्य

लालू यादव की अन्य बेटियों, जैसे हेमा यादव का नाम भी लाभार्थियों की सूची में है। उन पर आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों ने अपनी जमीन उन्हें 'उपहार' के रूप में दी थी, जबकि उनका उन उम्मीदवारों से कोई पारिवारिक संबंध नहीं था।

कोर्ट में बचाव पक्ष की दलील और कानूनी स्थिति

जहाँ एक ओर सीबीआई ने इसे 'आपराधिक सिंडिकेट' बताया, वहीं लालू यादव के वकीलों का कहना है कि:

·       यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध (Political Vendetta) से प्रेरित है।

·       ज़मीनें बाज़ार मूल्य पर खरीदी गई थीं और इनके वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं।

·       रेलवे की नियुक्तियों में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।

Conclusion :

जमीन के बदले नौकरी घोटाला न केवल बिहार की राजनीति बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास के बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। कोर्ट की हालिया टिप्पणी और लालू परिवार पर आरोप तय होना आरजेडी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब सबकी नजरें 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

FAQs  - जमीन के बदले नौकरी घोटाला

प्रश्न 1: जमीन के बदले नौकरी (Land for Job Scam) मामला क्या है?

 उत्तर: यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों और उनके परिवारों से कम कीमत पर जमीनें अपने परिवार के सदस्यों के नाम करवाई थीं।

प्रश्न 2: राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ क्या टिप्पणी की?

उत्तर: कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी 'निजी जागीर' की तरह इस्तेमाल किया और उनके परिवार ने एक 'आपराधिक सिंडिकेट' के रूप में काम करते हुए सार्वजनिक रोजगार को जमीन हड़पने का जरिया बनाया।

प्रश्न 3: इस मामले में कौन-कौन से मुख्य आरोपी शामिल हैं?

 उत्तर: मुख्य आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, और बेटी मीसा भारती व हेमा यादव शामिल हैं। सीबीआई ने कुल 103 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

प्रश्न 4: कोर्ट ने किन धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है?

 उत्तर: अदालत ने आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है।

प्रश्न 5: क्या इस मामले में किसी को राहत भी मिली है?

 उत्तर: हाँ, विशेष सीबीआई अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में रेलवे के अधिकारियों और सीपीओ सहित 52 आरोपियों को बरी (Discharge) कर दिया है।

प्रश्न 6: 'आरोप तय होने' (Charge Framing) का कानूनी मतलब क्या है?

उत्तर: आरोप तय होने का अर्थ है कि अदालत ने प्रथम दृष्टया माना है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसके बाद मामले का औपचारिक 'ट्रायल' शुरू होता है, जहाँ गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं।

प्रश्न 7: इस मामले की अगली सुनवाई कब है?

उत्तर: कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी, 2026 की तारीख तय की है, जिसमें आरोपियों से औपचारिक रूप से पूछा जाएगा कि वे अपना अपराध स्वीकार करते हैं या ट्रायल का सामना करेंगे।

भाजपा का हमला: "कानून ने आखिरकार पकड़ ही लिया"

वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लालू यादव ने सार्वजनिक पदों का इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने के लिए किया। उन्होंने कहा, "आप कितने भी घोटाले करें, कानून अंततः पकड़ ही लेगा। कोर्ट की 'सिंडिकेट' वाली टिप्पणी लालू परिवार के भ्रष्टाचार की गवाह है।"


 Keyword: Land for Job Scam, Lalu Prasad Yadav, राउज एवेन्यू कोर्ट, जमीन के बदले नौकरी घोटाला।

·       Tags: Lalu Yadav News, Tejashwi Yadav, CBI Court, Railway Scam, Bihar Politics, Hindi News.


क्या आपको लगता है कि इस फैसले का असर आने वाले बिहार चुनावों पर पड़ेगा? अपनी राय नीचे कमेंट में बताएं।


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Sunday, 16 November 2025

Bihar Politics : परिवार में सत्ता संघर्ष और धृतराष्ट्र बने लालू प्रसाद की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण | A detailed analysis of the power struggle within the family and the situation of Lalu Prasad Yadav who became Dhritarashtra.

 


💥Tarun Kumar Kanchan

What is the real reason behind Rohini Acharya's disillusionment? Who is responsible? Tejaswi's core team or something else?

After the Rashtriya Janata Dal (RJD) failed to perform as expected in the Bihar Assembly elections, the internal strife in Lalu Prasad Yadav's family has now taken an explosive turn.

रोहिणी आचार्य के 'मोह-भंग' की असली वजह क्या? जिम्मेदार कौन? तेजस्वी की कोर टीम या कुछ और

मुजफ्फरपुर। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के बाद, लालू प्रसाद यादव के परिवार में आंतरिक कलह अब विस्फोटक रूप ले चुकी है। बेटी रोहिणी आचार्य के हालिया बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने न केवल राजनीतिक गलियारों में खलबली मचाई है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि लालू परिवार और RJD के भीतर सत्ता के केंद्र को लेकर एक गहरा युद्ध छिड़ा हुआ है।

पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में रोहिणी आचार्य ने सीधे तौर पर दो मुख्य बातों की ओर इशारा किया, जो उनके 'मोह-भंग' की वजह बनी:

 * तेजस्वी पर जिम्मेदारी और टीम पर निर्भरता: उन्होंने कहा कि परिवार में महाभारत छिड़ा हुआ है, और हर बड़े फैसले के लिए सिर्फ तेजस्वी यादव जिम्मेदार हैं, क्योंकि वह अपनी "टीम" के भरोसे चल रहे हैं।

 * राजनीति और परिवार से नाता तोड़ना: उन्होंने सीधे तौर पर ऐलान किया कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हैं, जिसके लिए उन्होंने तेजस्वी के दो करीबी सलाहकारों, संजय यादव और रमीज का नाम लेते हुए कहा कि यह कदम उन्होंने उन्हीं की सलाह पर उठाया है।

👥 कौन हैं तेजस्वी के 'आँख और कान' संजय यादव और रमीज?

रोहिणी आचार्य के निशाने पर आए संजय यादव और रमीज (रमीज नेमत) तेजस्वी यादव की कोर टीम के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य हैं, जिन्हें पार्टी की हार के बावजूद सत्ता का केंद्र माना जा रहा है। इन दोनों का उदय तेजस्वी के व्यक्तिगत दोस्ती और उन पर अत्यधिक भरोसे के कारण हुआ।

 


 संजय यादव |  मुख्य रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद |

           * संपर्क: 2010 के आस-पास दिल्ली में क्रिकेट के दिनों में मुलाकात।

           * पृष्ठभूमि: हरियाणा के महेंद्रगढ़ के, कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स।

           * RJD में: 2013 से सक्रिय। 2015 के चुनाव से रणनीति बनाने में मुख्य भूमिका।

           * वर्तमान: 2024 में RJD से राज्यसभा सांसद बनाए गए। 



रमीज नेमत | कैंपेन और 'वार रूम' इंचार्ज |

          * संपर्क: स्कूल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट के दिनों के दोस्त।

          * पृष्ठभूमि: UP के बलरामपुर के, जामिया से MBA।

           * RJD में: सोशल मीडिया, कैंपेन प्लानिंग और 'वार रूम' की जिम्मेदारी।    

            * विवाद: UP में हत्या और गैंगस्टर एक्ट सहित 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। |


तेजस्वी यादव का इन दोनों से संपर्क उनके राजनीतिक करियर से पहले, क्रिकेट और स्कूल के दिनों में हुआ था। लालू प्रसाद के जेल जाने के बाद, तेजस्वी ने इन गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले दोस्तों पर सबसे अधिक भरोसा किया, जिसने इन्हें RJD के भीतर अपार शक्ति प्रदान की।


💥 लालू परिवार में 'महाभारत' और तेज प्रताप का मामला

रोहिणी का 'मोह-भंग' परिवार में चल रहे गहरे कलह का नवीनतम और सबसे गंभीर प्रकटीकरण है।


 * विरासत को लेकर कलह: लालू प्रसाद के जेल जाने और तेजस्वी यादव को पार्टी की कमान सौंपे जाने के बाद परिवार में राजनीतिक विरासत को लेकर कलह शुरू हुई।

 * तेज प्रताप यादव का विद्रोह: बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी के फैसलों और संजय यादव की बढ़ती ताकत पर लगातार नाराजगी जताई। तेजप्रताप ने संजय यादव को 'जयचंद' तक कहा और आरोप लगाया कि उनके कारण ही उन्हें पार्टी और परिवार से दरकिनार किया गया।

 * तेजस्वी बनाम 'बाहरी': रोहिणी के बयान में तेजस्वी पर 'बाहरी' सलाहकारों पर अत्यधिक निर्भरता का आरोप है, जिसके कारण परिवार के सदस्यों को उपेक्षा झेलनी पड़ी। उनके बयान कि उन्हें 'घर से निकाला गया' और 'चप्पलों से पीटने की बात कही' (सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार), परिवार के भीतर चल रहे गहरे भावनात्मक और सम्मान से जुड़े विवाद को सार्वजनिक करते हैं।

 * लालू यादव की स्थिति: 'धृतराष्ट्र' की मुहर: रोहिणी के बयानों से यह स्पष्ट है कि लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक और संगठनात्मक पकड़ अब कमजोर हो चुकी है। उनकी स्थिति परिवार के भीतर अब सिर्फ एक पारिवारिक हेड की 'मुहर' तक सीमित हो गई है, जहाँ महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय तेजस्वी और उनकी टीम ले रही है।

😥 लालू प्रसाद: क्यों बने 'धृतराष्ट्र'?


लालू प्रसाद यादव परिवार को एकजुट क्यों नहीं कर पा रहे हैं, इस सवाल का उत्तर उनकी खराब सेहत और पुत्र मोह में छिपा है:

 * स्वास्थ्य संबंधी परेशानी: किडनी ट्रांसप्लांट सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने लालू प्रसाद की राजनीतिक सक्रियता और परिवार पर नियंत्रण काफी कम कर दिया है। शारीरिक अक्षमता के कारण वह शायद परिवार के आंतरिक झगड़ों में प्रभावी हस्तक्षेप करने में सक्षम नहीं हैं।

 * विरासत और पुत्र मोह: उन्होंने सार्वजनिक रूप से तेजस्वी यादव को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। तेजस्वी की नेतृत्व को स्थापित करने के मोह में, वह शायद उनके सलाहकारों या उनकी कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख नहीं अपना पा रहे हैं, जिसके कारण परिवार के अन्य सदस्यों (जैसे तेज प्रताप और रोहिणी) को अन्याय या उपेक्षा महसूस हो रही है। उनकी यह विवशता ही उन्हें वर्तमान परिस्थितियों में 'धृतराष्ट्र' के समान बनाती है।

✈️ रोहिणी का निर्णायक कदम: सिंगापुर लौटने की कथा


बिहार विधानसभा चुनाव में हार, परिवार के भीतर उपेक्षा, और तेजस्वी की कोर टीम द्वारा खुद को दरकिनार किए जाने की भावना ने रोहिणी आचार्य को यह निर्णायक कदम उठाने पर मजबूर किया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से राजनीति और परिवार से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया।

पटना में पत्रकारों से बिलखते हुए बात करने के बाद रोहिणी आचार्य ने अपना आत्मसम्मान सर्वोपरि बताया। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने लालू-राबड़ी आवास से दिल्ली के लिए प्रस्थान किया और अब वह अपने पति और बच्चों के पास सिंगापुर लौटने की तैयारी में हैं, जहाँ वह किडनी दान करने के बाद काफी समय से रह रही थीं।

उनका सिंगापुर लौट जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उन्होंने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं, आंतरिक कलह और परिवार की खींचतान से पूरी तरह मोह-भंग कर लिया है। रोहिणी का यह निर्णय लालू परिवार में चल रहे 'महाभारत' के एक दर्दनाक अध्याय है, जहाँ उन्होंने निजी शांति और आत्मसम्मान को राजनीतिक विरासत पर तरजीह दी है।

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-तरुण कुमार कंचन