The first phase of the acid test! Will the "Modi-Nitish duo" be a hit, or will the slogan "Yadav Rangdar Banato" prove to be the undoing?
छह नवंबर, गुरुवार को 121 विधानसभा सीटों पर होने वाला मतदान यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में जाएगी। (Voting for 121 assembly seats on Thursday, November 6, will decide the direction in which Bihar's politics will go.) यह चरण न केवल पहले दौर की वोटिंग है, बल्कि यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के विकास केंद्रित नारे 'जोड़ी मोदी और नीतीश के हिट होई' और महागठबंधन के सामाजिक न्याय के आह्वान 'यादव रंगदार बनतो' के बीच सीधा मुकाबला है।
पहला चरण - राजनीतिक मिजाज समझने की कुंजी
मतदान से पहले के ओपिनियन पोल और 2020 के परिणामों के विश्लेषण कर हम जनता के मूड को समझने की कोशिश करते हैं। 10 अक्टूबर को नामांकन के साथ बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर गहमा-गहमी शुरू हो गई थी। मंगलवार को शाम में पहले चरण के प्रचार का शोर भी खत्म हो गया। बिहार के 18 जिलों के 121 विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को वोट पड़ेंगे। ये क्षेत्र मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, वैशाली, गोपालगंज, सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, नालंदा, शेखपुरा, बेगूसराय, लखीसराय, सहरसा, खगड़िया और मधेपुरा जिले में हैं। करीब पौने चार करोड़ से अधिक मतदाता इस चरण में 1314 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम में कैद करेंगे। इनमें कई दिग्गज राजनेता तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय और तेजप्रताप यादव भी हैं। इसलिए 121 सीटों पर मतदान का परिणाम ही राज्य के राजनीतिक मिजाज को समझने की पहली कुंजी बनेगा।
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| बिहार में एक बूथ पर लाइन लगे मतदाता ( फाइल फोटो-सोशल मीडिया से) |
2020 का मुकाबला: कांटे की टक्कर थी
2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में, ये 121 सीटें NDA और महागठबंधन के बीच बराबर बंटी थीं, जो इस चरण के निर्णायक महत्व को दर्शाता है:
गठबंधन 2020 में जीती गई सीटें (121 में से) प्रमुख घटक दलों का प्रदर्शन
NDA 59 BJP: 32, JDU: 23, VIP: 4
महागठबंधन 61 RJD: 42, Congress: 8, CPI(M-L): 7, CPI(M): 2, CPI: 2
मुख्य अंतर: पिछली बार लोजपा (रामविलास) एनडीए से बाहर थी और एक सीट जीती थी। इस बार लोजपा प्रमुख चिराग पासवान एनडीए के साथ हैं, जिसका लाभ गठबंधन को मिलने की उम्मीद है। इसी तरह वीआईपी के मुकेश सहनी राजग से अलग होकर इस बार राजद मे शामिल हो गए हैं। इसका कितना असर नीतीश कुमार की सेहत पर पड़ेगा, यह परिणाम में दिखेगा।
बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य
2020 के चुनाव के बाद का राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल चुका है।
• NDA की रणनीति : नीतीश कुमार अपनी 'सुशासन' वाली साफ छवि, लव-कुश (कुर्मी-कोयरी) के सामाजिक आधार और पीएम मोदी की लोकप्रियता के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। चिराग पासवान के शामिल होने से दुसाध वोटों का समर्थन भी मिलने की उम्मीद है, जिससे एनडीए का आधार मजबूत हो रहा है।
• महागठबंधन का आधार: राजद 'MY-BAP' (मुस्लिम-यादव, बहुजन, अगड़ा और पिछड़ा) समीकरण के साथ सामाजिक न्याय की पिच पर मजबूती से खड़ा है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पार्टी 'रोजगार' और 'युवा' मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है। यह देखना है कि लालू-राबड़ी काल में हुए घोटाले और जंगलराज का नैरेटिव किस तरह अब भी छाया है।
• जन सुराज फैक्टर: प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' का सूत्र वाक्य 'नया बिहार चाहते हैं' मतदाताओं को कितना प्रभावित कर पाया है, इसका आकलन जल्दबाजी होगा, पर यह एक नया विमर्श जरूर खड़ा कर रहा है।
ओपिनियन पोल: बहुमत की ओर NDA का रुझान?
मतदान से पहले जारी किए गए कई ओपिनियन पोल (जैसे C-Voter/MATRIZE) पूरे 243 सीटों पर NDA को बहुमत मिलने का अनुमान लगा रहे हैं। पोल ट्रैकर / अन्य महागठबंधन को फायदा कुछ शुरुआती सर्वे में एनडीए को
नुकसान और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बढ़त मिलने का अनुमान लगाया
गया था।
रुझान - MATRIZE-IANS के अनुसार NDA को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है।
वोट प्रतिशत - कई पोल NDA के वोट शेयर में वृद्धि का संकेत दे रहे हैं, जिसका श्रेय सीधा पीएम मोदी की लोकप्रियता को दिया जा रहा है।
सीएम की पसंद - सीटों की संख्या चाहे जो भी हो, अधिकांश मतदाताओं की मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद नीतीश कुमार बने हुए हैं।
पहले चरण के गढ़ और किले
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| जब नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एक थे। |
121 सीटों का यह चरण दोनों गठबंधनों के लिए 'करो या मरो' की स्थिति है। 'जोड़ी मोदी और नीतीश के हिट होई' का क्षेत्र: दरभंगा और तिरहुत क्षेत्र की शहरी और अर्ध-शहरी सीटें जहां विकास और मोदी फैक्टर प्रभावी है, वहां NDA (खासकर BJP) को पिछली बार बढ़त मिली थी। नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा समेत JDU की कई सीटें इसी चरण में हैं।
'यादव रंगदार बनतो' का क्षेत्र: मगध और कोसी क्षेत्र की ग्रामीण सीटें, जहाँ यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां राजद को मजबूत बढ़त मिलने की उम्मीद है। तेजस्वी यादव (राघोपुर) और तेज प्रताप यादव (महुआ) की सीटें भी इसी चरण में हैं, जिसे महागठबंधन के लिए यह एक मजबूत गढ़ माना जाता है। हालांकि लालू प्रसाद के दोनों बेटे एक-दूसरे पर खूब वार किये हैं। तेजप्रताप सनातनी समृद्धि के साथ आगे बढ़ रहे हैं जबकि तेजस्वी यादव अपनी जाति और मुस्लिम वोट पर एकाधिकार समझ रहे हैं।
आधी आबादी का झुकाव
इस बार चुनाव में नीतीश कुमार के कार्यों की भी खूब चर्चा हो रही है। नीतीश कुमार ने जिस तरह से जीविका दीदी के साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में लोगों को लाभ पहुंचाया है। इसका लाभ उन्हें चुनाव में मिलने की उम्मीद है । चुनाव की घोषणा से ठीक पहले गरीब महिलाओं को 10- 10 हजार रुपए अकाउंट में भेजे गए ताकि महिला अपना स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि यदि महिला यह पैसा जमा नहीं कर पाएंगी तो सरकार पैसा जमा कर देगी। इससे विपक्ष भी डरा हुआ है। चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने इन रुपयों को रिश्वत के रूप में रेखांकित करने की कोशिश की है । अब देखना है कि नीतीश कुमार की यह चाल कितना प्रतिशत वोट में तब्दील होता है।
निष्कर्ष: सत्ता की राह यहीं से खुलेगी। गुरुवार को होने वाला यह पहला चरण एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए निर्णायक है।
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| अब चाचा-भतीजा का संबंध ऐसा है। |
• NDA की जीत : यदि NDA 2020 के प्रदर्शन को दोहराता है या उसमें सुधार करता है यानी 65 से अधिक सीटें मिलती हैं, तो यह 'जोड़ी मोदी और नीतीश के हिट होई' के नारे को बल मिलेगा और सत्ता में वापसी की राह आसान होगी।
• महागठबंधन की चुनौती : यदि महागठबंधन बड़ा उलटफेर करते हुए इन 121 सीटों में निर्णायक बढ़त (जैसे 80+ सीटें) हासिल करता है, तो यह 'यादव रंगदार बनतो' के आह्वान को सिद्ध करेगा और सत्ता की लड़ाई को महागठबंधन के पक्ष में झुका देगा।
अब 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा कि केकर सरकार बनतो।
- तरुण कुमार कंचन
प्लीज आप सब अपना विचार जरूर रखें
ReplyDeleteबढ़िया 👌
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