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Thursday, 16 October 2025

भाजपा का हाल : पानी में मच्छरिया नौ नौ कुटिया बखरा की जंग | BJP's condition: paanee mein machchhariya nau nau kutiya bakhara ki jung

पटना के भाजपा कार्यालय में नंग-धड़ंग प्रदर्शन कर धरना देते रामसूरत राय के समर्थक

टिकट बंटवारे को लेकर जिस तरह के फोटो और वीडियो वायरल हो रहे हैं (The kind of photos and videos that are going viral regarding ticket distribution in BJP), वे लोकतंत्र के अच्छे सूचक हो सकते हैं। मगर, राजनीतिक दलों में बढ़ती अनुशासनहीनता का भी परिचायक है। बिहार में एक बड़ी अच्छी कहावत है पानी में मच्छरिया, नौ नौ कुटिया बखरा (fishes in water, nine cuts, Bakhra's war)। उस बखरे (हिस्से parts) के लिए भाजपा जो अपने को सबसे अनुशासित पार्टी बताती है, उसके नेताओं ने किस तरह गंध मचा रखा है? आइए उसकी ही चर्चा करते हैं। 

कमल के फूल के साथ दौड़ने को तैयार
 बिहार में चुनाव के लिए बिसात बिछ चुकी है। इस बार भाजपा सबसे पहले अपनी गोटी सेट कर ली है। अपने हिस्से के 101 प्रत्याशियों को मैदान में उतरने के लिए कमल का फूल थमा दिया है । इस बीच कई तरह के अटकलें लगते रहे, लेकिन भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ने सभी सीटों के लिए प्रत्याशी तय कर दिए हैं। इसके बाद भाजपा कार्यालय पटना से लेकर जिलों तक बवंडर मचा हुआ है । खासकर मुजफ्फरपुर शहर से सुरेश शर्मा और औराई के रामसूरत राय का टिकट काटना भाजपा में शूल की तरह उभर आया है । भाजपा को लग रहा है ये कांटे उनके गले में फंस चुके हैं । 

 दूध में गिरी मक्खी की तरह फेंका 

अपने पुत्र के साथ भाजपा के दिग्गज अश्विनी चौबे
भागलपुर (Bhagalpur) में भी आंतरिक लड़ाई अब सड़क पर लड़ी जा रही है । वहां से अश्विनी चौबे, जो भाजपा के दिग्गज नेता हुआ करते थे आज दूध में गिरी मक्खी (अत्यंत तुच्छ वस्तु) की तरह बाहर निकाल दिया गया है । वह लगातार प्रयास करते रहे की उनके सुपुत्र अर्जित शाश्वत चौबे को भागलपुर से उम्मीदवार बनाया जाए। 2015 के चुनाव में भाजपा ने अर्जित शाश्वत चौबे को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वह हार गए थे । 2020 में भागलपुर विधानसभा सीट के लिए रोहित पांडे को भाजपा ने टिकट दिया था उसे चुनाव में रोहित पांडे को कांग्रेस के उम्मीदवार अजीत शर्मा ने हराया था।भाजपा ने एक बार फिर वहां से रोहित पांडे को उम्मीदवार बनाया है। फिर भरोसा जताने के कारण रोहित पांडे पर जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई है। उन्हें वहां के वर्तमान विधायक का सामना तो करना ही पड़ेगा जो निकटतम प्रतिद्वंद्वी हैं। साथ ही अपनी पार्टी के बागी नेताओं को भी साधना पड़ेगा।
रोहित पांडेय

 2015 में भागलपुर में चौबे की हार में भाजपा के बागी उम्मीदवार की बड़ी भूमिका थी, जो 15 हजार से अधिक वोट काट लिए थे। क्या रोहित पांडे उन बागी उम्मीदवारों को साध पाएंगे? ऐसा नहीं लगता है क्योंकि इस बार बागी उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है। अश्वनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत चौबे के अलावा शिक्षाविद वीरकोदर प्रसाद के नाती प्रशांत विक्रम भी ताल ठोक रहे हैं।

2015 में बागी बने विजय साह भी मैदान में हैं। पिछली बार विजय साह निर्दलीय होकर भी 15000 से अधिक वोट प्राप्त किए थे। इस बार रोहित पांडे को भाजपा की प्रीति शेखर से भी सामना होगा। प्रीति शेखर भी पूरी तरह से चुनाव मैदान में उतरने का मन बना ली है। 

 नंग धड़ंग प्रदर्शन भी काम नहीं आया


 ऐसी ही स्थिति बिहार के दूसरे सबसे बड़े महानगर मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) की है। यहां रजग ने मुजफ्फरपुर, मीनापुर और सकरा विधानसभा के लिए नया चेहरा उतर दिया है। टिकट बंटवारे के कारण भाजपा और राजग के खेमे में भारी नाराजगी दिख रही है। भाजपा ने औराई विधानसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा है । अजय निषाद पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे। औराई में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ढंग से टिकट के दावेदार वहां के विधायक रामसूरत राय को माना जा रहा था । रामसूरत राय मुजफ्फरपुर में भाजपा के एक बड़े सिपाही थे। फिर भी भाजपा ने उनका टिकट काट दिया । इसके बाद जो बवाल मचा उससे पटना भाजपा प्रदेश कार्यालय से लेकर मुजफ्फरपुर जिले की राजनीतिक गर्मी भी चरम पर पहुंच गई । पटना में रामसूरत राय के समर्थकों ने नंग- धड़ंग ढोल- मजीरा के साथ प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए। इस तरह मुजफ्फरपुर शहर में भी भाजपा कार्यकर्ता रामसूरत राय के समर्थकों ने प्रदर्शन किया। रामसूरत राय ने एक दिन पहले ही घोषणा कर दिया था कि और दो दिनों तक पार्टी में बने रहेंगे । इसके बाद समर्थक उबल पड़े। उसका उबाल पटना में दिखा ही, मुजफ्फरपुर में भी उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया। यहां के बोचहा विधानसभा क्षेत्र में भी बवंडर मचा है। वहां भाजपा नेत्री बेबी कुमारी को सशक्त उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद उनके समर्थकों ने पटना में पार्टी कार्यालय के पास धरना प्रदर्शन किया ।

ऱंजन कुमार
 सबसे हैरानी तब हुई जब मुजफ्फरपुर शहर में भाजपा ने रंजन कुमार को टिकट दे दिया। यहां भाजपा के पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा की उम्मीदवारी मानी जा रही थी । उन्होंने पहले अपना विरोध जताया बाद में पार्टी का निर्णय कह कर मामले को शांत कर लिया, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं में अशांति बनी हुई है । वहीं वर्तमान विधायक विजेंद्र चौधरी कांग्रेस का टिकट लेकर फिर मैदान में उतरे हुए हैं। विजेंद्र चौधरी पुराने भाजपाई हैं, इसलिए मुजफ्फरपुर में भी भाजपा संकट में दिख रही है।

 बगावती तेवर को भी दिखाया रास्ता

 भाजपा ने आंतरिक अनुशासन के नाम पर बाढ़ के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू का टिकट काट दिया है। ज्ञानू ने मंत्री नहीं बनाए जाने पर संगठन एवं सत्ता विरोधी बयान दिए थे। इसी तरह मुख्यमंत्री के विश्वास प्रस्ताव के दौरान बगावत करने वाले दो विधायकों रामनगर सुरक्षित सीट की भागीरथी देवी और नरकटियागंज की रश्मि वर्मा का टिकट भी काट दिया है। देखना यह है कि ये बड़े नेता इस चुनाव में किस तरह के गुल खिलाएंगे? भाजपा कहीं न कहीं इन नेताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया है जबकि डर बागी उम्मीदवार बनने की भी है। 

बड़ा सवाल, बवंडर फूस होगा या बनेगा झंझावात 

 अब आगे क्या होता है इस पर आपके साथ हम भी नजर रखे हुए हैं। अब बड़ा प्बरश्वंन यह है कि बवंडर फूस होगा या झंझावात बन जाएगा? इतना तो सच है की टिकट बंटवारे से उठे बवाल में कुछ ना कुछ नया होगा। एनडीए में उठे ऐसे बवंडर को देखकर इंडी गठबंधन के खेमे में खुशी तो है, पर अपने परिणम को लेकर भी सशंकित हैं। धन्यवाद ।

:- तरुण कुमार कंचन

सभी फोटो सोशल मीडिया के साभार

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