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Wednesday, 17 December 2025

कंधे पर बच्चा और जान हथेली पर : पटना के गांधी सेतु के गायघाट पर हर दिन एक जंग | देखें वीडियो


Tarun Kumar Kanchan

 Mahatma Gandhi Setu: ₹1,742 crore makeover, yet commuters forced to risk their lives at Gaighat. The reconstruction of Mahatma Gandhi Setu may have been technically successful, but an administrative lapse has turned the journey of thousands of passengers into a 'dangerous mission'.

महात्मा गांधी सेतु: ₹1742 करोड़ का कायाकल्प, फिर भी गायघाट पर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर यात्री को मजबूर यात्री

बिहार की 'लाइफलाइन' कहे जाने वाले महात्मा गांधी सेतु का पुनर्निर्माण भले ही तकनीकी रूप से सफल रहा हो, लेकिन एक प्रशासनिक चूक ने हज़ारों यात्रियों के सफर को 'खतरनाक मिशन' बना दिया है। पुल के पटना छोर यानी गायघाट पर उतरने-चढ़ने वाली सीढ़ियों के ध्वस्त होने से उत्तर बिहार और पटना सिटी के बीच यात्रा करने वाले लोग हर दिन हादसों को दावत दे रहे हैं।

 प्रशासनिक विफलता: सीढ़ियाँ टूटीं, संपर्क छूटा

ऐसे होती है यात्रा


2017 से 2021 के बीच चले पुनर्निर्माण कार्य के दौरान स्टील सुपरस्ट्रक्चर तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन पुराने ढांचे को हटाते समय यात्रियों के लिए बनी महत्वपूर्ण सीढ़ियाँ भी ढहा दी गईं।

·       अधूरी योजना: मंत्रालय (MoRTH) के अधिकारियों के अनुसार, मुख्य पुल पर तो ध्यान दिया गया, लेकिन पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते की योजना कागजों से बाहर नहीं निकल पाई।

·       प्रभावित वर्ग: ये सीढ़ियाँ उन हज़ारों लोगों के लिए एकमात्र सहारा थीं जो पटना सिटी (अशोक राजपथ) या महेंद्रू जाने के लिए पुल से उतरते थे। अब बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खतरनाक ढलानों और ऊँचाई से जान जोखिम में डालकर उतरना पड़ता है।

"सरकार ने करोड़ों की लागत से पुल तो बना दिया, लेकिन हमारे उतरने का रास्ता बंद कर दिया। बच्चों को कंधे पर लादकर ऊँचाई से उतरना किसी पहाड़ चढ़ने से कम नहीं है।" — एक स्थानीय यात्री, गायघाट


 नए पुल की उम्मीद, पर इंतजार लंबा



गांधी सेतु के समानांतर बन रहे नए 4-लेन पुल से बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन यहाँ भी 'तारीख पर तारीख' का सिलसिला जारी है।

विवरण

जानकारी

परियोजना लागत

लगभग ₹1794.37 करोड़

एजेंसी

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)

नई समय-सीमा

सितंबर 2026 (पहले 2024 थी)

देरी का कारण: NHAI के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की बाधाओं और कोविड-19 के चलते काम की गति धीमी हुई थी। हालांकि अब निर्माण में तेजी का दावा किया जा रहा है, लेकिन जनता को राहत मिलने में अभी कम से कम एक साल का समय और लगेगा।

 समाधान की मांग: मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और नितिन गडकरी से अपील

@nitin_gadkari @NitishKumar @MoRTHIndia @yadavtejashwi


जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक गायघाट के इस मानवीय संकट को नजरअंदाज करना किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण देना है। जनता की मांग है कि:

1.     तत्काल अस्थायी सीढ़ियाँ: गायघाट पर यात्रियों के लिए तुरंत सुरक्षित रैंप या स्थायी सीढ़ियों का निर्माण शुरू हो।

2.     पैदल यात्रियों की सुरक्षा: NHAI और बिहार राज्य सड़क विकास निगम (BSRDC) केवल वाहनों के दबाव पर नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें।

निष्कर्ष: यह केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट है। प्रशासन की एक छोटी सी पहल हज़ारों जिंदगियों को सुरक्षित कर सकती है।

कुछ प्रश्न और मन की पीड़ा

1.     स्टील का सुपरस्ट्रक्चर तो बन गया, पर आम आदमी की 'सीढ़ियां' कहाँ गईं?

2.     गांधी सेतु: लाइफलाइन पर जानलेवा सफर, गायघाट में 'माउंट एवरेस्ट' चढ़ रहे यात्री!

3.     प्रशासन की फाइल में पुल तैयार, गायघाट की ढलान पर जनता बेहाल।

4.     बुजुर्गों के लिए सजा बना गांधी सेतु का सफर; साहब! पुल तो बना दिया, राह क्यों छीन ली?

5.     हादसे का इंतजार या प्रशासनिक नींद? गायघाट की ध्वस्त सीढ़ियां बयां कर रही हैं लापरवाही की दास्तां।

6.     सावधान! गांधी सेतु पर सफर कर रहे हैं तो संभल कर उतरें, यहाँ मौत का रास्ता है।

7.     नया पुल 2026 में, तब तक क्या मरती रहेगी जनता? गायघाट पर तुरंत बने वैकल्पिक मार्ग!

8.     मिशन 2026 का इंतज़ार भारी, गांधी सेतु के पैदल यात्रियों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे।

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1 comment:

  1. बहुत ही खतरनाक स्थिति है।

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