google.com, pub-9395330529861986, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Kanchanwani कंचनवाणी: चीख़ती ख़ामोशी : पत्नी की याद, पिता का फंदा और तीन मासूमों समते चार की मौत का सवाल! वीडियो देखें

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Monday, 15 December 2025

चीख़ती ख़ामोशी : पत्नी की याद, पिता का फंदा और तीन मासूमों समते चार की मौत का सवाल! वीडियो देखें

 

चमत्कारिक रूप से मौत के मुंह से निकले दोनों मासूम बच्चे

🛑 मुजफ्फरपुर सामूहिक आत्महत्या: पत्नी की याद या कर्ज़ का फंदा? 3 मासूम बेटियों सहित 4 की मौत, 2 बेटों ने ऐसे जीती ज़िंदगी


Tarun Kumar Kanchan

Muzaffarpur mass suicide: Missing wife or trapped by debt? Four dead, including three innocent daughters. Two sons lived their lives like this.

What happened on the morning of Monday, December 15, 2025, in the Sakra police station area of ​​Muzaffarpur district, Bihar, wasn't just news, but an incident that strikes terror into every parent's heart. A family from Navalpur Mishraulia village was left in eternal silence.

 

सोमवार, 15 दिसंबर 2025, की सुबह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र में जो हुआ, वह केवल एक ख़बर नहीं, बल्कि हर माँ-बाप के दिल में दहशत पैदा करने वाली घटना है। नवलपुर मिश्रौलिया गाँव का एक परिवार हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।

बच्चों के पिता

एक ही घर के भीतर, पिता अमरनाथ राम (40) और उनकी तीन मासूम बेटियों— राधा (11), राधिका (9), और शिवानी (7)के शव फंदे से लटके मिले। यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है जिसने पूरे इलाके में सनसनी (Breaking News) फैला दी है।



💔 पिता ने ट्रंक 'स्टील के बक्से' पर चढ़ाया, माँ की साड़ी का फंदा...


इस भयानक त्रासदी के बीच
, पिता के दो छोटे बेटे— शिवम कुमार (6) और चंदन (4)किसी चमत्कार से ज़िंदा बच गए। उनकी आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

छह साल के मासूम शिवम ने पुलिस और ग्रामीणों को बताया कि रात में खाना खाने के बाद सब सो गए थे। फिर सुबह करीब 4 बजे, उनके पिता अमरनाथ ने सबको उठाया।

"पिता ने माँ की साड़ी से फंदा बनाया और सबको एक-एक करके गले में बाँधा। हम सभी को घर में रखे एक बड़े 'ट्रंक' (स्टील के बक्से) पर चढ़ाया और कूदने के लिए कहा।"

शिवम ने बताया कि जब वे नीचे कूदे तो उनके गले में दर्द हुआ। जैसे-तैसे उसने फंदे को ढीला किया और गर्दन से निकाला। फिर उसने अपने छोटे भाई चंदन के गले से भी फंदा निकाला। ट्रंक को पकड़कर वे दोनों मौत के मुँह से वापस लौट आए। उनकी चीख-पुकार सुनकर जब तक गाँव वाले पहुँचे, तब तक अमरनाथ और तीनों बेटियाँ दम तोड़ चुकी थीं।

कल्पना कीजिए उस क्षण की जहाँ एक पिता बच्चों को गोद में लेता है, वहाँ उसने बच्चों को मौत के मुँह में धकेला। इन नन्हे-मुन्नों के सामने उनकी बहनें और पिता हमेशा के लिए शांत हो गए। शिवम और चंदन की चीख़ें जब बाहर आई, तब तक चारों की मौत हो चुकी थी।

🔎 सामूहिक आत्महत्या के पीछे क्या है असली वजह?


सकरा पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जाँच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों और परिजनों के बयानों के आधार पर, इस खौफनाक कदम के पीछे तीन मुख्य संभावित कारण सामने आ रहे हैं:

संभावित कारण (Theories)

गाँव वालों का बयान

1. गहरा वियोग

पत्नी की मौत के बाद अमरनाथ बहुत दुखी रहता था। पत्नी की याद उसे परेशान कर रही थी।

2. आर्थिक तंगी

अमरनाथ लंबे समय से कर्ज़ और पैसों की कमी से जूझ रहा था। वह काम नहीं करना चाहता था।

3. नशे की लत

कुछ पड़ोसियों के अनुसार, अमरनाथ शराब पीने का आदी था, जिसने उसकी मानसिक स्थिति को और ख़राब कर दिया।

ये कारण एक तरफ, लेकिन इस जघन्य कृत्य ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक पिता इतना बेबस हो सकता है कि वह अपने पाँच बच्चों को साथ लेकर मरना चाहे? तीन मासूम बेटियां, जिनके खेलने-कूदने की उम्र थी, आज फंदे से लटकी मिलीं।

पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और बचे हुए दोनों बच्चों—शिवम और चंदन को अपनी सुरक्षा में रखा है। इस घटना के बाद पूरे गाँव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।

🛑 समाज पर सवाल: कौन देगा इन बचे हुए बच्चों को सहारा?


यह घटना केवल एक आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने पर एक सवाल है। जिस पिता को बच्चों का रक्षक होना चाहिए था, उसने ही उनका जीवन छीनने की कोशिश की।

शिवम और चंदन, ये दो मासूम, अब पुलिस की देखरेख में हैं। उनके सामने का भविष्य एक बड़ी चुनौती है। उन्हें अब उस दुनिया में जीना होगा, जहाँ उनकी सबसे दर्दनाक याद उनके पिता से जुड़ी होगी।

आप क्या सोचते हैं? क्या कर्ज और वियोग इतना गहरा हो सकता है कि एक पिता अपने बच्चों का गला घोंट दे?


🫂 भावनात्मक समर्थन और सहायता के लिए अपील

इस भयानक त्रासदी के बाद, 6 साल के शिवम और 4 साल के चंदन ने न केवल अपने पिता और बहनों को खोया है, बल्कि उस रात के खौफनाक मंज़र को भी सहा है। ये दोनों मासूम अब एक ऐसी दुनिया में अकेले हैं, जहाँ उनके जीवन की सबसे दर्दनाक याद उनके पिता से जुड़ी है।

हम सभी से भावुक अपील करते हैं कि:

1.     संवेदनशीलता बनाए रखें: इन बच्चों के बारे में बात करते समय अधिकतम संवेदनशीलता और गोपनीयता बनाए रखें।

2.     मानसिक स्वास्थ्य समर्थन: हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि इन बच्चों को दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक परामर्श (Psychological Counselling) और सहायता मिले, ताकि वे इस सदमे से उबर सकें।

3.     कानूनी/संरक्षक सहायता: स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों को आगे आकर इनकी सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

आइए, इन मासूमों के लिए आवाज़ उठाएँ, ताकि उन्हें न्याय और एक सुरक्षित भविष्य मिल सके।

यह केवल एक ख़बर नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर एक गहरा दाग है। इन मासूमों की मौत पर सवाल पूछना ज़रूरी है।

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1 comment:

  1. बच्चों को संरक्षण प्रदान करें

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