google.com, pub-9395330529861986, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Kanchanwani कंचनवाणी: Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव के दूसरे चरण का रण, किंग मेकर की चर्चा और बदलता सामाजिक समीकरण!

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Sunday, 9 November 2025

Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव के दूसरे चरण का रण, किंग मेकर की चर्चा और बदलता सामाजिक समीकरण!

 

बिहार के एक चुनावी सभा में जुटी भीड़

The battle for the second phase, the discussion of kingmakers and the changing social equations!

 ​दूसरे चरण के चुनाव प्रचार का शोर आज थम रहा है, और इसके साथ ही बिहार की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म है। The noise of the second phase of election campaign is coming to an end today, and with this the market of speculations is hot in Bihar politics. सरकार बनाने को लेकर कई तरह के कयास  #ElectionStrategy  #CasteCalculus लगाए जा रहे हैं, लेकिन क्या इन कयासों के पीछे कोई 'खेल' चल रहा है?

प्रशांत किशोर का रोड शो

अचानक बढ़ता शोर: प्रशांत किशोर और किंग मेकर की कहानी 
(Intriguing & Kingmaker-focused):

​हाल के दिनों में मीडिया में अचानक एक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है: बिहार में अधिक वोटिंग होने से प्रशांत किशोर (पीके) की पार्टी 'जन सुराज' की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पहले चरण के मतदान केंद्रों पर मतदाता इंडिया गठबंधन या एनडीए की बात कर रहे थे, लेकिन अचानक पीके को सुर्खियों में लाना कई आशंकाएं पैदा करता है।

​क्या यह सिर्फ दूसरे चरण के मतदान को प्रभावित करने की रणनीति है?

​पीके ने शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को लगातार उठाया है, जिसका लाभ उन्हें मिल सकता है?

​राजनीतिक पंडितों के अनुसार, जन सुराज सत्ता में दहाई अंक तक पहुंचकर 'किंग मेकर' की भूमिका निभा सकता है, लेकिन सत्ता में आने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति लगातार अंतर्द्वंद्व (internal conflict) और काम करने के दबाव वाली होगी।

Direct and Questioning: ​यूं किंग मेकर बनना जन सुराज की सबसे बड़ी भूमिका हो सकती है, इससे अधिक की उम्मीद कम है।


🗺️ बदलती राजनीति: 'माय' से 'बाप' तक का सफर (Caste Equation & Change-focused):

सभा को संबोधित करते तेजस्वी यादव

बिहार की राजनीति हमेशा से सामाजिक समीकरण साधने पर टिकी रही है। लेकिन 2025 के इस चुनाव में पुरानी धारणाओं को तोड़ने की कोशिश हो रही है।

​धुर जाति की राजनीति करने वाला एक दल, जिसका मुख्य समीकरण कभी 'माय' (मुस्लिम-यादव) था और जो कभी 'भूरा बाल साफ करो' का नारा देता था, उसने अब एक नया समीकरण गढ़ा है: 'बाप' (बहुजन, अगड़ा और पिछड़ा)।

​यह बदलाव दर्शाता है कि राजनीतिक दल पारंपरिक समीकरणों के दायरे से बाहर निकलकर नए सामाजिक ध्रुवीकरण की तलाश में हैं।

 

📊 आंकड़े में ूसरा चरण: महासंग्राम की पूरी तस्वीर

​दूसरा चरण 11 नवंबर को 20 जिलों के 122 विधानसभा क्षेत्रों में होने जा रहा है।

सीटें: 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति, और 2 अनुसूचित जनजाति।

कुल मतदाता: लगभग 3 करोड़ 70 लाख।

उम्मीदवार: कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में।

खास बात: 100 साल से अधिक उम्र वाले 6000 से अधिक मतदाता इस चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

सर्वाधिक उम्मीदवार: कैमूर का चैनपुर, रोहतास का सासाराम, और गया शहर (222 उम्मीदवार)।

सबसे कम उम्मीदवार: पश्चिम चंपारण का लोरिया, चनपटिया, पूर्वी चंपारण के रक्सौल, सुगौली, सुपौल के त्रिवेणीगंज और पूर्णिया का बनमनखी (सिर्फ 5-5 उम्मीदवार)।

🤝 जटिल सामाजिक समीकरण: कौन किसे साध रहा?

चुनावी सभा में प्रधानमंत्री मोदी 

दोनों गठबंधनों ने जातीय समीकरणों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन गठबंधनों की रणनीति कुछ इस प्रकार है, जिसे समझने की जरुरत है।

एनडीए : यादव प्रत्याशी मैदान में उतारे; लव-कुश (कोइरी-कुर्मी) को साधने में जदयू और रालोमो (उपेंद्र कुशवाहा); चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों में सक्रिय; भाजपा स्वर्ण और वैश्य समाज पर फोकस। औवेसी का हस्तक्षेप, जिससे मुस्लिम वोटर बंटने की उम्मीद।

महागठबंधन (इंडिया) : तेजस्वी यादव ने प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के साथ अति पिछड़ा बहुल क्षेत्रों में पैठ बढ़ाई; अब्दुलबारी सिद्दीकी मुस्लिम वोटरों को प्रभावित करने में जुटे; कांग्रेस ने अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, पवन खेड़ा, और जिग्नेश मेवानी को उतारकर सामाजिक संतुलन का ध्यान रखा।

वीआईपी मुकेश सहनी मल्लाह (निषाद) जाति को गोलबंद कर रहे हैं।

समीकरण की हकीकत में सेंध

यादव वोट: एनडीए को उम्मीद है कि विकास और सनातन के नाम पर यादव मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा नीतीश और भाजपा से जुड़ा है।

मल्लाह जाति: मुकेश सहनी पर उनकी अपनी जाति के 25-30% लोगों को भरोसा नहीं है, क्योंकि वे 'अवसर की राजनीति' करते हैं।

पासवान वोट: चिराग पासवान पर सवाल उठ रहे हैं कि 'फर्स्ट बिहार, फर्स्ट बिहारी' का वादा कहां गया। अनुसूचित जातियों में बड़ा वोट शेयर अभी भी राजद के साथ माना जा रहा है।

एनडीए को 2020 की तुलना में चिराग और उपेंद्र कुशवाहा के साथ होने से वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

मुस्लिम मतदाता : बिहार मे सबसे बड़ी जनसंख्या मुस्लिम मतादाओं की है। उसे हर दल ने साधने की कोशिश की है। मुस्लिम मतदाताओं का सर्वाधिक झुकाव राष्ट्रीय जनता दल के साथ है। हालांकि जदयू का दावा है कि मुस्लिमों का सबसे ज्यादा विकास नीतीश कुमार के शासन काल में हुआ है। उन्हें इसका लाभ मिलेगा। भाजपा नेता कहना है कि हमने विकास की हर योजना में मुस्लमानों को बराबर की भागीदार बनाया है। दूसरे दल लगातार यह प्रशन उठाता रहा है कि भाजपा ने किसी मुस्लिम के उम्मीदवार नहीं बनाया है। सबसे बड़ी बात इस बार प्रचार में भी मुस्लिम नेताओं की भागीदारी भी नगण्य रही है। इसमें लोगों का कहना है कि भाजपा खुलकर हिन्दूवादी पार्टी होने का दावा कर रहा है ताकि हिन्दुओ को गोलबंद किया जा सके।   

👵 'आधी आबादी' का रुख: नीतीश पर निढाल महिला वोटर #WomenVoters #NitishKumar

नीतीश कुमार की एक मुद्रा

​इस चुनाव में 255 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। बसपा (26) और जन सुराज (25) ने सबसे अधिक महिलाओं को टिकट दिया है।

महिलाओं का रुख: महिला सशक्तिकरण के लाभ (Women Voters & Enthusiasm-focused) के कारण जदयू का पलड़ा भारी है।

​एक रोचक वाकया सामने आया, जहां एक पत्रकार के सामने एक महिला ने अपने पति (जो लालटेन को वोट देने की बात कर रहा था) को टोकते हुए कहा: "इनका कहने से क्या होगा? हम वोट नीतीश को ही देंगे। उन्होंने हमें ₹10,000 दिए और रोजगार के लिए बड़ा कर्ज दिया, हम आज अपने बल पर परिवार चला रहे हैं।"

​यह घटना दर्शाती है कि एनडीए ने यादव वोटरों में भी सेंध लगाई है, क्योंकि महिलाएं विकास और योजनाओं के नाम पर नीतीश कुमार के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

​युवाओं को तेजस्वी के सरकारी नौकरी के वादे और मोदी के 5 साल में 1 करोड़ रोजगार के रोडमैप ने भी प्रभावित किया है।

🎤 चुनाव प्रचार: कौन कितना बोला?

​यह चुनाव बड़े नेताओं की रैलियों का गवाह रहा:

​तेजस्वी यादव: 155 चुनावी सभाएं (सर्वाधिक)।

​नीतीश कुमार: 67 सभाएं।

​नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी: 14-14 सभाएं।

​अन्य दिग्गज: अमित शाह (33), राजनाथ सिंह (21), प्रियंका गांधी (13), योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव भी मैदान में दिखे।

​प्रशांत किशोर ने सभी सीटों पर रोड शो किया, जहां जनता ने दिलचस्पी दिखाई।

​भीड़ सब जगह थी, लेकिन वोट को कौन कितना प्रभावित कर पाया, यह 14 नवंबर को ही पता चलेगा।

🎲 चुनावी खेल और परिणाम का अंदेशा

​बिहार विधानसभा चुनाव में एक बड़ा 'खेल' चल रहा है, जिसे सत्ता के खिलाफ गोलबंदी का नाम दिया जा रहा है। अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं:

​महागठबंधन: पहले चरण में 80+ सीटें।

​एनडीए: पहले चरण में 100 के आसपास सीटें।

​मीडिया का अनुमान: राजद 80 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी, भाजपा को 65-70, जदयू को 40-42, और जन सुराज 25-30 सीटें जीतकर किंग मेकर बनेगा।

​विश्लेषण का अंदेशा: यह विश्लेषण दूसरे चरण के मतदान को प्रभावित करने के लिए दिया जा रहा है। हालांकि, बिहार के मतदाता समझदार हैं और अपने पत्ते नहीं खोलते।

#ElectionResult #Bihar ऊँट किस करवट बैठेगा, यह 14 नवंबर को स्पष्ट होगा।

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- तरुण कुमार कंचन

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