google.com, pub-9395330529861986, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Kanchanwani कंचनवाणी: कंचनवाणी विशेष रिपोर्ट: क्या बिहार के शांत गांव बन रहे हैं आतंक की नई प्रयोगशाला? मधुबनी में एटीएस की बड़ी कार्रवाई

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Monday, 15 June 2026

कंचनवाणी विशेष रिपोर्ट: क्या बिहार के शांत गांव बन रहे हैं आतंक की नई प्रयोगशाला? मधुबनी में एटीएस की बड़ी कार्रवाई

 


क्या बिहार के शांत गांव बन रहे हैं आतंक की नई प्रयोगशाला? मधुबनी में एटीएस (ATS) ने मौलाना इजहार को किया गिरफ्तार। जानिए फुलवारी शरीफ से लेकर दरभंगा ब्लास्ट तक, बिहार में पनपते आतंकी मॉड्यूल की पूरी इनसाइड स्टोरी कंचनवाणी पर।

कंचनवाणी रिपोर्टर

पटना। जहाँ एक ओर कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्रों में भारतीय सुरक्षा बल आतंकवाद की कमर तोड़ने में कामयाब रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार के शांत और ग्रामीण इलाकों से आ रही खबरें बेहद चिंताजनक हैं। आतंकवाद का यह मौन विस्तार बिहार के नागरिकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आखिर इसकी जड़ें सूबे में कितनी गहरी हो चुकी हैं।

इसी कड़ी में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने मधुबनी के भौआड़ा गोवा पोखर मोहल्ला स्थित एक मदरसे से मौलाना इजहार को गिरफ्तार किया है।

एटीएस की छापेमारी के बाद मोहल्ले में कानाफूसी


खुफिया इनपुट पर आधी रात को एक्शन

मिली जानकारी के अनुसार, एटीएस की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर बीती रात मदरसे में छापेमारी की और मौलाना इजहार को धर दबोचा। इसके तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसके पंडौल प्रखंड स्थित सरिसव पाही गांव के पैतृक घर पर भी छापेमारी की।

 देशविरोधी संगठनों से सांठगांठ

सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार इजहार के तार भारत विरोधी खतरनाक आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।

 गोपनीय पूछताछ जारी

इजहार से पूछताछ कर वापस आते एसपी


नगर थाना कैंपस में मौलाना इजहार को बेहद गोपनीय तरीके से रखकर पूछताछ की जा रही है। खुद मधुबनी एसपी योगेंद्र कुमार ने सोमवार दोपहर नगर थाना पहुंचकर उससे लंबी पूछताछ की।

 बड़ी साजिश का अंदेशा

हालांकि पुलिस अधिकारी अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो एटीएस की टीमें जिले के कई अन्य संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।

बिहार में पहले भी बेनकाब हो चुके हैं खतरनाक आतंकी मॉड्यूल

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में आतंकवाद के स्लीपर सेल या मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ है। पिछले कुछ सालों में बिहार देशविरोधी ताकतों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह और रिक्रूटमेंट ग्राउंड (भर्ती केंद्र) के रूप में उभर कर सामने आया है। आइए नजर डालते हैं बिहार के कुछ प्रमुख आतंकी नेटवर्क पर:

फुलवारीशरीफ 'गजवा-ए-हिंद' मॉड्यूल

साल 2022 में पटना के फुलवारी शरीफ में एक बेहद खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ था। प्रतिबंधित संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के इस मॉड्यूल का मकसद साल 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना और युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें 'गजवा-ए-हिंद' के लिए तैयार करना था। इस मामले में कई स्थानीय लोगों की गिरफ्तारियां हुई थीं और भारी मात्रा में देशविरोधी दस्तावेज बरामद किए गए थे।

 दरभंगा पार्सल ब्लास्ट 

जून 2021 में दरभंगा रेलवे स्टेशन पर हुए पार्सल ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए थे। जांच में सामने आया कि इसके पीछे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी थे, जिन्होंने सिकंदराबाद से आए एक कपड़े के पार्सल में आईईडी (IED) छुपाया था। इस मॉड्यूल का मकसद देश के रेल नेटवर्क को नुकसान पहुंचाना और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था।

 

बोधगया और गांधी मैदान सीरियल ब्लास्ट

 साल 2013 में पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में तत्कालीन प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली के दौरान सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे।

 इसी साल बौद्ध तीर्थ स्थल बोधगया के महाबोधि मंदिर को भी दहलाया गया था। इन दोनों ही बड़े हमलों के पीछे इंडियन मुजाहिदीन (IM) और सिमी (SIMI) का हाथ था, जिसके तार बिहार के कई जिलों (जैसे दरभंगा, समस्तीपुर, और गया) से जुड़े पाए गए थे।

 नेपाल सीमा और जाली नोटों का सिंडिकेट

बिहार की खुली भारत-नेपाल सीमा (विशेषकर रक्सौल, मधुबनी और जोगबनी) हमेशा से आतंकियों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एजेंटों के लिए एक सेफ पैसेज रही है। यहां से न सिर्फ आतंकियों की घुसपैठ होती रही है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने के लिए नकली नोटों (FICN) का बड़ा सिंडिकेट भी चलाया जाता रहा है।

 

कंचनवाणी का दृष्टिकोण

 अब सचेत होने का वक्त है - मधुबनी से मौलाना इजहार की गिरफ्तारी इस बात का साफ संकेत है कि आतंकी संगठन अब महानगरों को छोड़कर बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। यहां की सादगी, घनी आबादी और नेपाल सीमा से नजदीकी उनके लिए मददगार साबित होती है।

बड़ा सवाल: क्या हमारी स्थानीय खुफिया एजेंसियां (Local Intelligence) ग्रामीण इलाकों में पनप रहे इस खतरे को भांपने में नाकाम साबित हो रही हैं? अगर आज बिहार का आम नागरिक जागरूक नहीं हुआ, तो शांत दिखने वाले ये गांव कब बारूद के ढेर में तब्दील हो जाएंगे, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।



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