आज हम उस व्यक्तित्व को नमन कर रहे हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और राम मंदिर आंदोलन को समर्पित कर दिया था।
आज जो अयोध्या में विशाल राममंदिर खड़ा है, उसकी नींव में पहली ईंट उन्होंने ही रखी थी।
जी हां, हम बात कर रहे हैं कामेश्वर चौपाल की, जिनका राममंदिर से गहरा लगाव था और हिंदुत्व उनकी पहचान थी।
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में पहली ईंट रखने वाले पूर्व एमएलसी कामेश्वर चौपाल पिछले सप्ताह शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उसका अंतिम संस्कार अपने पैतृक गांव बिहार में सुपौल जिले के मरौना प्रखंड स्थित कमरैल में हुआ। उनके पुत्र विद्यानंद चौपाल ने मुखाग्नि देकर पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया।
आज मौका है उनकी कृति की याद करने का
प्यारे दर्शकों, आपको बता दूं कि राम जन्मभूमि निर्माण के ट्रस्टी और बिहार के पूर्व एमएलसी कामेश्वर चौपाल का 68 साल की उम्र में गुरुवार की रात दिल्ली स्थित गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। कामेश्वर चौपाल का जन्म 24 अप्रैल 1956 में सुपौल जिले के मरौना प्रखंड के कमरैल गांव में हुआ था। 1976 में वे संघ के संपर्क में आए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने कार्य प्रारंभ किया। 1981 में विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन छोटा नागपुर प्रांत के सह संगठन मंत्री और बाद में बिहार के प्रांत संगठन मंत्री और वर्तमान में वे उत्तर बिहार प्रांत के माननीय अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे थे। वे विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष भी थे। पहली बार 2002 में वह विधान परिषद के सदस्य बने और 2014 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य बने रहे। फिर 2014 में उन्होंने सुपौल से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली।
अप्रत्याशित थी राममंदिर की नींव की पहली ईंट रखना
कामेश्वर चौपाल ने नौ नवम्बर 1989 को राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में पहली ईंट रखी थी, जिससे उनका नाम पूरे देश में चर्चित हो गया। वे उस समय विश्व हिंदू परिषद के बिहार के सह-संगठन मंत्री के रूप में अयोध्या में मौजूद थे। संतों ने पहले से ही तय किया था कि शिलान्यास की पहली ईंट किसी दलित व्यक्ति द्वारा रखवाई जाएगी, लेकिन कामेश्वर चौपाल को इस निर्णय की जानकारी नहीं थी। जब उन्हें यह सम्मान दिया गया तो यह उनके लिए भी अप्रत्याशित था।
आरआरएस का प्रथम कारसेवक
RRS first kar sevak
कामेश्वर चौपाल को आरएसएस ने उन्हें प्रथम कारसेवक का दर्जा भी दिया था। 2020 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उन्हें बिहार से प्रतिनिधित्व मिला। उस समय उन्होंने कहा था कि सरकार ने जिस तत्परता से ट्रस्ट बनाया है, अब हमारी जिम्मेवारी है कि उसी गति से भव्य व दिव्य राम मंदिर का निर्माण हो। उनका योगदान भारतीय राजनीति और सांस्कृतिक जागरण में महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में वे विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष व दक्षिण बिहार प्रांत के अध्यक्ष का कामकाज देख रहे थे। दलित पृष्ठभूमि से आने वाले कामेश्वर जी समाज के वंचित समुदायों के कल्याण के कार्यों के लिए भी हमेशा याद किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत नेताओं व समाजसेवियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
श्री कामेश्वर चौपाल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक संवेदना व्यक्त की और कहा कि श्री कामेश्वर चौपाल जी एक अनन्य रामभक्त थे, जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में बहुमूल्य योगदान दिया। इसके साथ एक कुशल राजनेता और समाजसेवी भी थे।
एक वर्ष पूर्व उन्हें गुर्दे की समस्या पैदा हुई तो दिल्ली स्थित गंगा राम अस्पताल में उनका गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ। उन्हें उनकी बेटी ने किडनी डोनेट किया था। वे ठीक भी हो गए थे किंतु, लगभग एक माह पूर्व उनको पुनः गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दुर्भाग्य से 6 फरवरी 2025 को रात्रि साढ़े 10 बजे वे इस नश्वर संसार से विदा हो ग़ए।
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