आज मैं पत्रकारिता से संन्यास ले रहा हूँ।" 'हिन्दुस्तान' अखबार के अपने लंबे सफर, मीडिया की बदलती दुनिया और इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी सच्चाई जानिए सोशल मीडिया के इस खास और बेहद भावुक आलेख में।
तरुण कुमार कंचन
मुजफ्फरपुर। आज मन के एक कोने में एक अजीब सी खामोशी है, और आंखों के कोरों में यादों का पूरा समंदर उमड़ आया है। आज जीवन के 35 वर्षों की उस अनवरत दौड़ पर एक पूर्णविराम लग गया, जिसे दुनिया 'सार्वजनिक पत्रकारिता' कहती है। हां, आज मैंने खबरों के इस वृहद संसार से, इसके हर रोज के तनाव से औपचारिक रूप से संन्यास ले लिया। अब मुझे रोज की उस 'सिंगल-डीसी' Deadlines/Daily Copy की रस्साकशी से नहीं जूझना होगा। खेल अब बंद हुआ, पर यादों का कारवां हमेशा के लिए जेहन में दर्ज हो गया।
सफर की शुरुआत
सफर की शुरुआत याद आती है, तो पैर ठिठक जाते हैं। ग्रेजुएशन के बाद, साल 1992-93 का वह दौर जब आँखों में कुछ कर गुजरने के सपने थे। 'सच्चिदानंद सिन्हा पत्रकारिता संस्थान, पटना' में बी.जे. (बैचलर ऑफ जर्नलिज्म) में दाखिला लिया और वहीं से इस जादुई मगर निष्ठुर दुनिया में मेरा पहला कदम पड़ा था। तब कहाँ मालूम था कि यह राह इतनी लंबी, इतनी उतार-चढ़ाव भरी और इतनी खूबसूरत होगी। इन साढ़े तीन दशकों में मैंने कई शहरों की पत्रकारिता को जिया, कई घाटों का पानी पिया और हर शहर की आबो-हवा को महसूस किया। हर जगह की अपनी एक दास्तान थी, अपनी एक तासीर थी।
मुजफ्फरपुर में पदार्पण
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो मुजफ्फरपुर का वह दौर बरबस याद आता है। जब बिहार और झारखंड का बंटवारा हो रहा था, तब नियति मुझे 'दैनिक जागरण' के मुजफ्फरपुर ब्यूरो की कमान सौंप रही थी। आदरणीय श्री देवेंद्र सिंह जी को झारखंड में दैनिक जागरण की नींव मजबूत करने के लिए रांची भेजा गया, और मुझे पटना की व्यस्तता से निकालकर मुजफ्फरपुर की इस ऊर्जस्वित धरती पर आना पड़ा।
यहीं से साल 2001 में 'हिन्दुस्तान' के साथ मेरा एक नया और अटूट अध्याय शुरू हुआ। तब मुजफ्फरपुर में 'हिन्दुस्तान' नया-नया लॉन्च हो रहा था। हम सब युवा थे, रगों में गर्म खून था और अखबार को शीर्ष पर ले जाने की एक जिद थी। हम सबने अपनी जी-जान लगा दी।
मेरठ में 14 साल
6 साल तक मुजफ्फरपुर में 'हिन्दुस्तान' को सींचने के बाद, सफर मुझे 'अमर उजाला' के साथ गोरखपुर ले गया। वहां करीब डेढ़ साल बिताने के बाद, आदरणीय श्री राजीव मित्तल जी के कुशल नेतृत्व में मेरा रुख मेरठ 'हिन्दुस्तान' की तरफ हुआ। मेरठ में बिताए वह 14 साल... जहां मैं बेहद सुरक्षित और सहज महसूस करता था। वह मेरा 'कंफर्ट जोन' बन चुका था। पर कहते हैं न, अपनी मिट्टी और घर का मोह इंसान को कभी चैन से बैठने नहीं देता। वही मोह मुझे भागलपुर खींच लाया।
जीवन चक्र में राहु और शनि
कुछ दिन तो सब कुछ ठीक रहा, पर शायद वक्त को कुछ और मंजूर था। जीवन चक्र में राहु और शनि का ऐसा क्रूर प्रभाव पड़ा कि जो कुछ संजोया था, वह बिखरने लगा। एक ऐसा कठिन दौर भी आया जब 'हिन्दुस्तान' भागलपुर से मुझे अलग होना पड़ा। वह मेरी व्यावसायिक और मानसिक परीक्षा की घड़ी थी।
मुजफ्फरपुर: अंधेरे के बाद उजाला
लेकिन, अंधेरे के बाद उजाला अवश्य आता है। संकट के उस दौर में आदरणीय प्रधान संपादक श्री शशिशेखर जी की असीम सदाशयता और आदरणीय श्री तीरविजय सिंह जी के स्नेहिल सान्निध्य ने मुझे संबल दिया। उनके आशीर्वाद से 15 फरवरी 2025 को मुझे दोबारा मुजफ्फरपुर 'हिन्दुस्तान' के आँचल में आने का सौभाग्य मिला। यहाँ के स्थानीय संपादक श्री आलोक कुमार मिश्र जी के नेतृत्व में पूरी टीम न केवल सुशिक्षित है, बल्कि सुसंस्कारित भी है। इस टीम के साथ काम करते हुए मुझे कभी यह अहसास नहीं हुआ कि मैं किसी कठिन दौर से गुजर कर आया हूँ।
आज जब मैं इस कमान को सौंप रहा हूँ, तो मुजफ्फरपुर 'हिन्दुस्तान' की इस सुसंस्कारित टीम को, उन तमाम मार्गदर्शकों को जिन्होंने मुझे उंगली पकड़कर साथ लाया, और उन अनगिनत पाठकों को, जिन्होंने 35 साल तक मेरे शब्दों पर भरोसा किया, हृदय की गहराइयों से नमन करता हूँ।
पत्रकारिता के इस सार्वजनिक जीवन से भले ही मैं विदा ले रहा हूँ, लेकिन शब्दों से मेरा नाता कभी नहीं टूटेगा। अब 'डेडलाइन' का दबाव नहीं होगा, पर यादों की स्याही हमेशा पन्नों पर बिखरती रहेगी।
आप सभी के स्नेह और साथ के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद।
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सर मुझे आज भी याद है बरेली में पेज वन पर मेरा पहला दिन। साल था 2016। जनरल डेस्क पर आए कुल तीन दिन हुए थे और तीसरे दिन ही पेज वन निकालने की चुनौती। कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करें, कैसे करें। मुझे आपका नंबर देते हुए बताया गया कि मेरठ को फॉलो करना है। आप मेरठ पेज वन देखते हैं। संकोच के साथ आपसे बात की और बताया कि सर मेरा पहला दिन है और मुझे समझ में नहीं आ रहा। आपका जवाब था, परेशान क्यों होते हो बाबू, जैसा मैं पेज छोड़ूंगा उसमे फोलियो बदलकर तुम छोड़ लेना। आपकी बात ने कुछ यूं हिम्मत बढ़ाई कि फिर कभी कोई समस्या नहीं आई। आपको ढेरों शुभकामनाएं।
ReplyDeleteधन्यवाद अनुराग जी
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